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झूठ की रसोई से बंट रही कागजी थाली
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उन्नाव। जिले में ‘झूठ’ की रसोई से जरूरतमंदों को ‘कागजी’ थाली बंट रही है। जिला प्रशासन जिले में दो स्थानों पर सामुदायिक रसोई चलाने का दावा कर रहा है, हकीकत में ऐसा है नहीं। पहली रसोई पूर्णा देवी मंदिर में चलाने की बात कही गई है। यहां पर हमेशा पूरे साल भंडारा चलता है। इस समय यहां प्रसाद लेने वालों की गिनती जरूरतमंदों के रूप में करते हुए आंकड़े तैयार कर लिए जाते हैं। दूसरी सामुदायिक रसोई भल्लाफार्म में चलाने की बात पर पड़ताल की गई तो खुलासा हुआ कि यहां सिर्फ तीमारदारों को भोजन मिलता है। वह भी कई तीमारदारों ने सौ रुपये लेने की शिकायत की।
कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रदेश सरकार ने 30 अप्रैल को कोरोना कर्फ्यू लागू कर दिया था। तब से अभी तक कर्फ्यू लगातार बढ़ाया जा रहा है। फैक्टरियों को छोड़कर सभी दुकानें बंद ही चल रही हैं। ऐसे में कुछ लोगों के सामने आर्थिक तंगी के साथ पेट भरने की भी समस्या आ रही है। हालांकि शासन ने कर्फ्यू लागू करने के दौरान ही प्रशासन को जरूरतमंदों के खाने के लिए सामुदायिक रसोई संचालित करने को कहा था। प्रशासन ने 6 मई को सामुदायिक रसोई पूर्णादेवी मंदिर परिसर में खुलवाने का दावा किया। असलियत यह है कि पूर्णा देवी मंदिर प्रबंध समिति द्वारा साल के 12 माह यहां पर भंडारा चलाया जाता है। ऐसे में प्रशासन ने सामुदायिक रसोई शुरू करने का दावा कर दिया। भंडारे में प्रसाद लेने आने वाले लोगों की गिनती प्रशासन द्वारा जरूरतमंदों में के रूप में की जा रही है। प्रशासन का दावा लोगों के गले नहीं उतर रहा है।
20 मई को विकास भवन में पत्रकार वार्ता में जल शक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह के सामने डीएम रवींद्र कुमार ने जिले में पूर्णा देवी मंदिर परिसर और नवाबगंज के भल्लाफार्म में सामुदायिक रसोई संचालित होने की जानकारी दी थी। असलियत में भल्ला फार्म में संचालित रसोई में सरस्वती मेडिकल कालेज में भर्ती मरीजों के साथ आए तीमारदारों को ही खाने की व्यवस्था है। तीमारदारों से 100 रुपये भी लिए जाने की शिकायतें हैं। तीमारदारों को रसोई से नहीं बल्कि बाहर से मंगाकर खाना दिया जाता है।
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डीएम रवींद्र कुमार का कहना है कि सभी तहसीलों में सामुदायिक रसोई स्थापित कराने को कहा है। रसोई के माध्यम से खाने की व्यवस्था करने में असमर्थ संक्रमित परिवारों और जरूरतमंदों को भोजन की व्यवस्था कराई जाएगी। जरूरतमंद कंट्रोल रूम के फोन 0515-2820707 और 0515-2820256 पर संपर्क कर सकते हैं।
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कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रदेश सरकार ने 30 अप्रैल को कोरोना कर्फ्यू लागू कर दिया था। तब से अभी तक कर्फ्यू लगातार बढ़ाया जा रहा है। फैक्टरियों को छोड़कर सभी दुकानें बंद ही चल रही हैं। ऐसे में कुछ लोगों के सामने आर्थिक तंगी के साथ पेट भरने की भी समस्या आ रही है। हालांकि शासन ने कर्फ्यू लागू करने के दौरान ही प्रशासन को जरूरतमंदों के खाने के लिए सामुदायिक रसोई संचालित करने को कहा था। प्रशासन ने 6 मई को सामुदायिक रसोई पूर्णादेवी मंदिर परिसर में खुलवाने का दावा किया। असलियत यह है कि पूर्णा देवी मंदिर प्रबंध समिति द्वारा साल के 12 माह यहां पर भंडारा चलाया जाता है। ऐसे में प्रशासन ने सामुदायिक रसोई शुरू करने का दावा कर दिया। भंडारे में प्रसाद लेने आने वाले लोगों की गिनती प्रशासन द्वारा जरूरतमंदों में के रूप में की जा रही है। प्रशासन का दावा लोगों के गले नहीं उतर रहा है।
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20 मई को विकास भवन में पत्रकार वार्ता में जल शक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह के सामने डीएम रवींद्र कुमार ने जिले में पूर्णा देवी मंदिर परिसर और नवाबगंज के भल्लाफार्म में सामुदायिक रसोई संचालित होने की जानकारी दी थी। असलियत में भल्ला फार्म में संचालित रसोई में सरस्वती मेडिकल कालेज में भर्ती मरीजों के साथ आए तीमारदारों को ही खाने की व्यवस्था है। तीमारदारों से 100 रुपये भी लिए जाने की शिकायतें हैं। तीमारदारों को रसोई से नहीं बल्कि बाहर से मंगाकर खाना दिया जाता है।
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डीएम रवींद्र कुमार का कहना है कि सभी तहसीलों में सामुदायिक रसोई स्थापित कराने को कहा है। रसोई के माध्यम से खाने की व्यवस्था करने में असमर्थ संक्रमित परिवारों और जरूरतमंदों को भोजन की व्यवस्था कराई जाएगी। जरूरतमंद कंट्रोल रूम के फोन 0515-2820707 और 0515-2820256 पर संपर्क कर सकते हैं।