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डिप्टी सीएम तक पहुंचा एंबुलेंस सेवा में हुआ फर्जीवाड़ा
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उन्नाव। जीवनदायिनी एंबुलेंस सेवा में मरीजों को ले जाने के नाम पर फर्जीवाड़े का मामला उपमुख्यमंत्री तक पहुंच गया है। उन्होंने जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
108 व 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक मिश्रा के नेतृत्व में डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से एंबुलेंस संचालन में फर्जीवाड़े की शिकायत की है। उनका आरोप है कि जीवीकेएमआरआई कंपनी के अधिकारी लगातार फर्जी केस करने का दबाव डालते हैं। जो चालक इसका विरोध करते हैं, उन्हें कंपनी से बाहर निकालने की धमकी दी जाती है।
जिले में भी ऐसे कई प्रकरण सामने आए हैं। एंबुलेंस अस्पताल से गई नहीं और 80 किलोमीटर का संचालन दिखा दिया गया। उन्होंने मामले की जांच भी ठीक से न होने की बात कही। पदाधिकारियों ने बताया कि डिप्टी सीएम ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी। कर्मचारियों ने धरने के समय दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी की।
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जीपीएस डेटा से सामने आ सकती सच्चाई
कर्मचारियों का कहना है कि 108 व 102 एंबुलेंस में जीपीएस लगा होता है। सरकार भी सेवा प्रदाता कंपनी से इसकी रिपोर्ट मांगती है। जीपीएस रिपोर्ट दर्शाती है कि एंबुलेंस मरीज को किस गांव व किस स्थान से लेकर आई और कहां तक गई। अगर जीपीएस डेटा की जांच हो तो हकीकत सामने आएगी।
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108 व 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक मिश्रा के नेतृत्व में डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से एंबुलेंस संचालन में फर्जीवाड़े की शिकायत की है। उनका आरोप है कि जीवीकेएमआरआई कंपनी के अधिकारी लगातार फर्जी केस करने का दबाव डालते हैं। जो चालक इसका विरोध करते हैं, उन्हें कंपनी से बाहर निकालने की धमकी दी जाती है।
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जिले में भी ऐसे कई प्रकरण सामने आए हैं। एंबुलेंस अस्पताल से गई नहीं और 80 किलोमीटर का संचालन दिखा दिया गया। उन्होंने मामले की जांच भी ठीक से न होने की बात कही। पदाधिकारियों ने बताया कि डिप्टी सीएम ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी। कर्मचारियों ने धरने के समय दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी की।
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जीपीएस डेटा से सामने आ सकती सच्चाई
कर्मचारियों का कहना है कि 108 व 102 एंबुलेंस में जीपीएस लगा होता है। सरकार भी सेवा प्रदाता कंपनी से इसकी रिपोर्ट मांगती है। जीपीएस रिपोर्ट दर्शाती है कि एंबुलेंस मरीज को किस गांव व किस स्थान से लेकर आई और कहां तक गई। अगर जीपीएस डेटा की जांच हो तो हकीकत सामने आएगी।