{"_id":"40-198035","slug":"Unnao-198035-40","type":"story","status":"publish","title_hn":"कई बार कराया एक काम, पांच लाख का घोटाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कई बार कराया एक काम, पांच लाख का घोटाला
Unnao
Updated Wed, 17 Sep 2014 05:31 AM IST
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उन्नाव। विकासखंड सिकंदरपुर सरोसी की ग्राम पंचायत परियर में सात सालों में मनरेगा से कराए गए कार्यों में लाखों रुपये का दुरुपयोग किया गया। लोकपाल की जांच में मामले का खुलासा हुआ। एक कार्य पर तीन बार भुगतान कराया गया। पौधरोपण पर लाखों रुपये का अनियमित व्यय किया गया।
8 जुलाई 14 को परियर सुब्बाखेड़ा निवासी सुरेश चंद्र ने लोकपाल रघुबीर शंकर चौरसिया को पत्र देकर ग्राम पंचायत परियर में वर्ष 2007 से 2014 तक मनरेगा से कराए गए 7 कार्यों की जांच कराए जाने का अनुरोध किया था। 4 अगस्त को लोकपाल ने वीडीओ शिवदत्त तिवारी की मौजूदगी में कार्यों का निरीक्षण किया। शिकायती पत्र में जानकीकुंड से परियर में श्रीराम रैदास के दरवाजे तक चकरोड निर्माण 3 बार कराने की बात कही गई थी लेकिन जांच में पाया गया कि वर्ष 2006-07 में कराए गए कार्यों पर ही दुबारा 2010-11 में धनराशि व्यय की गई। करवॉसा से जानकीकुंड तक चकरोड निर्माण में पूर्व में कराए गए कार्य पर दुबारा दो गुने से भी ज्यादा व्यय किए जाने की जानकारी हुई। लोकपाल आरएस चौरसिया ने बताया कि एक ही कार्य कई बार कराया गया। उन श्रमिकों से योजना में काम कराया गया जो जॉबकार्डधारक नहीं थे। पौधरोपण के लिए जनपद के बाहर से पौध की आपूर्ति ली गई। इस प्रकार अन्य कार्यों को मिलाकर 527647 रुपये का दुरुपयोग पाया गया। इसकी रिपोर्ट शासन, आयुक्त ग्राम्य विकास व डीएम को भेजी है।
लोकपाल के मुताबिक, ग्राम पंचायत परियर की शिकायत की जांच न करने के लिए कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा अधिनियम की धारा 23 के अनुसार दोषी पाए गए। स्थलीय निरीक्षण के समय किसी अभियंता के उपस्थित न होने के कारण कार्यों की वास्तविक माप और मूल्यांकन नहीं किया जा सका।
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लोकपाल को मनरेगा के तहत आने वाली शिकायतों की जांच का तो अधिकार है लेकिन वह सीधे किसी पर कार्रवाई नहीं कर सकता है। रिपोर्ट के आधार पर डीएम को कार्रवाई का अधिकार है। लोकपाल आरएस चौरसिया ने बताया कि उनका काम जांच कर रिपोर्ट भेजने है। उन्होंने रिपोर्ट भेज दी है। अब आगे की कार्रवाई डीएम को करनी है।
पौधरोपण में हजारों का भुगतान, मौके पर एक भी पेड़ नहीं
वर्ष 2006-07 में पौधरोपण में हजारों रुपये खर्च करना दर्शाया गया। 2500 यूकेलिप्टस और 2500 जटरोफा के पौधों की खरीद पुष्पांजलि दलित महिला कल्याण समिति उप्र लखनऊ से खरीदे गए। श्रमांश पर 23664 रुपये व्यय किए गए। निरीक्षण के समय कहीं भी पेड़/पौधे नहीं पाए गए। एनजीओ से पौधे क्रय करने से पूर्व वन/उद्यान विभाग की जनपद स्थित नर्सरी में पौध उपलब्ध न होने की भी स्थिति की जानकारी नहीं पाई गई। इस कार्य पर कुल 41664 रुपये भुगतान किए गए जो अनियमित पाए गए।
इन कार्यों में मिला अनियमित भुगतान
1-जानकीकुंड से परियर श्रीराम रैदास के दरवाजे तक चकरोड-लागत 216120 रुपए।
2-करवॉसा से जानकीकुंड चकरोड निर्माण-लागत 80800 रुपए।
3-वर्ष 2006-07 में कराया गया वृक्षारोपण-लागत 41664 रुपए।
4-कुक्कुट काम्प्लेक्स में वृक्षारोपण पर अनियमित भुगतान-लागत 131050 रुपए।
5-सुब्बाखेड़ा सैदापुर मार्ग पर फर्जी श्रमिकों को भुगतान-लागत 12500 रुपए।
6-करवॉसा तालाब पर फर्जी श्रमिकों को भुगतान-लागत 10500 रुपए।
7-सुब्बाखेड़ा सैदापुर मार्ग पर अधिक ऊंचाई/कड़ी मिट्टी दिखाकर व्यय-लागत 16771 रुपए।
8-जॉबकार्डधारक के अतिरिक्त अन्य श्रमिक को पानी पिलाने पर व्यय-लागत 16242 रुपए।
9-बिना जॉबकार्डधारक महिला श्रमिक को बच्चों की देखभाल के लिए व्यय-लागत 2000 रुपए।
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8 जुलाई 14 को परियर सुब्बाखेड़ा निवासी सुरेश चंद्र ने लोकपाल रघुबीर शंकर चौरसिया को पत्र देकर ग्राम पंचायत परियर में वर्ष 2007 से 2014 तक मनरेगा से कराए गए 7 कार्यों की जांच कराए जाने का अनुरोध किया था। 4 अगस्त को लोकपाल ने वीडीओ शिवदत्त तिवारी की मौजूदगी में कार्यों का निरीक्षण किया। शिकायती पत्र में जानकीकुंड से परियर में श्रीराम रैदास के दरवाजे तक चकरोड निर्माण 3 बार कराने की बात कही गई थी लेकिन जांच में पाया गया कि वर्ष 2006-07 में कराए गए कार्यों पर ही दुबारा 2010-11 में धनराशि व्यय की गई। करवॉसा से जानकीकुंड तक चकरोड निर्माण में पूर्व में कराए गए कार्य पर दुबारा दो गुने से भी ज्यादा व्यय किए जाने की जानकारी हुई। लोकपाल आरएस चौरसिया ने बताया कि एक ही कार्य कई बार कराया गया। उन श्रमिकों से योजना में काम कराया गया जो जॉबकार्डधारक नहीं थे। पौधरोपण के लिए जनपद के बाहर से पौध की आपूर्ति ली गई। इस प्रकार अन्य कार्यों को मिलाकर 527647 रुपये का दुरुपयोग पाया गया। इसकी रिपोर्ट शासन, आयुक्त ग्राम्य विकास व डीएम को भेजी है।
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लोकपाल के मुताबिक, ग्राम पंचायत परियर की शिकायत की जांच न करने के लिए कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा अधिनियम की धारा 23 के अनुसार दोषी पाए गए। स्थलीय निरीक्षण के समय किसी अभियंता के उपस्थित न होने के कारण कार्यों की वास्तविक माप और मूल्यांकन नहीं किया जा सका।
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लोकपाल को मनरेगा के तहत आने वाली शिकायतों की जांच का तो अधिकार है लेकिन वह सीधे किसी पर कार्रवाई नहीं कर सकता है। रिपोर्ट के आधार पर डीएम को कार्रवाई का अधिकार है। लोकपाल आरएस चौरसिया ने बताया कि उनका काम जांच कर रिपोर्ट भेजने है। उन्होंने रिपोर्ट भेज दी है। अब आगे की कार्रवाई डीएम को करनी है।
पौधरोपण में हजारों का भुगतान, मौके पर एक भी पेड़ नहीं
वर्ष 2006-07 में पौधरोपण में हजारों रुपये खर्च करना दर्शाया गया। 2500 यूकेलिप्टस और 2500 जटरोफा के पौधों की खरीद पुष्पांजलि दलित महिला कल्याण समिति उप्र लखनऊ से खरीदे गए। श्रमांश पर 23664 रुपये व्यय किए गए। निरीक्षण के समय कहीं भी पेड़/पौधे नहीं पाए गए। एनजीओ से पौधे क्रय करने से पूर्व वन/उद्यान विभाग की जनपद स्थित नर्सरी में पौध उपलब्ध न होने की भी स्थिति की जानकारी नहीं पाई गई। इस कार्य पर कुल 41664 रुपये भुगतान किए गए जो अनियमित पाए गए।
इन कार्यों में मिला अनियमित भुगतान
1-जानकीकुंड से परियर श्रीराम रैदास के दरवाजे तक चकरोड-लागत 216120 रुपए।
2-करवॉसा से जानकीकुंड चकरोड निर्माण-लागत 80800 रुपए।
3-वर्ष 2006-07 में कराया गया वृक्षारोपण-लागत 41664 रुपए।
4-कुक्कुट काम्प्लेक्स में वृक्षारोपण पर अनियमित भुगतान-लागत 131050 रुपए।
5-सुब्बाखेड़ा सैदापुर मार्ग पर फर्जी श्रमिकों को भुगतान-लागत 12500 रुपए।
6-करवॉसा तालाब पर फर्जी श्रमिकों को भुगतान-लागत 10500 रुपए।
7-सुब्बाखेड़ा सैदापुर मार्ग पर अधिक ऊंचाई/कड़ी मिट्टी दिखाकर व्यय-लागत 16771 रुपए।
8-जॉबकार्डधारक के अतिरिक्त अन्य श्रमिक को पानी पिलाने पर व्यय-लागत 16242 रुपए।
9-बिना जॉबकार्डधारक महिला श्रमिक को बच्चों की देखभाल के लिए व्यय-लागत 2000 रुपए।