{"_id":"5fa57eef8ebc3e9bf3042497","slug":"transport-city-could-not-be-settled-even-after-eight-years-sultanpur-news-lko5489589145","type":"story","status":"publish","title_hn":"आठ साल बाद भी आबाद नहीं हो सका ट्रांसपोर्ट नगर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आठ साल बाद भी आबाद नहीं हो सका ट्रांसपोर्ट नगर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुल्तानपुर। नगर पालिका का ट्रांसपोर्ट नगर आबाद करने का प्रोजेक्ट आठ साल बाद भी अधूरा है। करीब छह एकड़ भूमि में शोरूम समेत ए व बी की 50 दुकानें निष्प्रयोज्य पड़ी हैं।
आवंटन प्रक्रिया में बदलाव व निर्माण में अनियमितता से इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का उपयोग नहीं किया जा सका है। मौजूदा समय में ट्रांसपोर्ट नगर की दुकानें जर्जर हालत में हैं और यहां पर कुछ लोगों ने बगैर अनुमति के बसेरा बना लिया है।
शहर से सटे पयागीपुर क्षेत्र के निकट नगर पालिका की करीब छह एकड़ जमीन पर ट्रांसपोर्ट नगर बसाने की बहुआयामी योजना नगर पालिका की ओर से वर्ष 2012 में बनाई गई थी। सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत 14 फरवरी 2013 में नगर पालिका ने शोरूम, दुकान, गोदाम व अन्य आवंटन के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया। शुरुआती दौर में 336 लोगों ने दो करोड़ 84 लाख रुपये ट्रांसपोर्ट नगर में दुकानों के आवंटन के लिए जमा किया।
विज्ञापन
वहीं, कुछ लोगों ने इसकी शिकायत तत्कालीन कमिश्नर से की। वर्ष 2014 को कमिश्नर ने सेल्फ फाइनेंस स्कीम की आवंटन प्रक्रिया को निरस्त करते हुए शासनादेश के अनुरूप ट्रांसपोर्ट नगर में दुकानों के आवंटन में नीलामी प्रक्रिया अपनाए जाने का निर्देश जारी किया गया।
इसके बाद नगर पालिका की ओर से वर्ष 2016 में सूचना प्रकाशित कर मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में ट्रांसपोर्ट नगर में शोरूम व दुकानों की नीलामी कराई गई। आवंटन प्रक्रिया में परिर्वतन होने के बाद ट्रांसपोर्ट नगर में पूंजी निवेश करने वाले 336 निवेशकों में से 195 लोगों ने अपना 1.59 करोड़ रुपये नगर पालिका से वापस ले लिया है।
वर्ष 2013 से लेकर 2016 के बीच ट्रांसपोर्ट नगर में 11 शोरूम, ए टाइप की 14 व बी टाइप की 25 दुकानों का निर्माण कराया गया। नीलामी प्रक्रिया के खिलाफ कुछ लोगों ने उच्च न्यायालय में रिट भी दायर की है। इस सब के बीच ट्रांसपोर्ट नगर को आबाद करने की योजना मूर्तरूप नहीं ले सकी है।
नगर पालिका अध्यक्ष पति अजय जायसवाल ने ट्रांसपोर्ट नगर के विकास के लिए स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। इस वर्ष के पास हुए बजट में ट्रांसपोर्ट नगर के विकास का ब्यौरा देखना पड़ेगा। उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। दुकानें पहले की बनी हैं।
विज्ञापन
आवंटन प्रक्रिया में बदलाव व निर्माण में अनियमितता से इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का उपयोग नहीं किया जा सका है। मौजूदा समय में ट्रांसपोर्ट नगर की दुकानें जर्जर हालत में हैं और यहां पर कुछ लोगों ने बगैर अनुमति के बसेरा बना लिया है।
विज्ञापन
शहर से सटे पयागीपुर क्षेत्र के निकट नगर पालिका की करीब छह एकड़ जमीन पर ट्रांसपोर्ट नगर बसाने की बहुआयामी योजना नगर पालिका की ओर से वर्ष 2012 में बनाई गई थी। सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत 14 फरवरी 2013 में नगर पालिका ने शोरूम, दुकान, गोदाम व अन्य आवंटन के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया। शुरुआती दौर में 336 लोगों ने दो करोड़ 84 लाख रुपये ट्रांसपोर्ट नगर में दुकानों के आवंटन के लिए जमा किया।
विज्ञापन
वहीं, कुछ लोगों ने इसकी शिकायत तत्कालीन कमिश्नर से की। वर्ष 2014 को कमिश्नर ने सेल्फ फाइनेंस स्कीम की आवंटन प्रक्रिया को निरस्त करते हुए शासनादेश के अनुरूप ट्रांसपोर्ट नगर में दुकानों के आवंटन में नीलामी प्रक्रिया अपनाए जाने का निर्देश जारी किया गया।
इसके बाद नगर पालिका की ओर से वर्ष 2016 में सूचना प्रकाशित कर मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में ट्रांसपोर्ट नगर में शोरूम व दुकानों की नीलामी कराई गई। आवंटन प्रक्रिया में परिर्वतन होने के बाद ट्रांसपोर्ट नगर में पूंजी निवेश करने वाले 336 निवेशकों में से 195 लोगों ने अपना 1.59 करोड़ रुपये नगर पालिका से वापस ले लिया है।
वर्ष 2013 से लेकर 2016 के बीच ट्रांसपोर्ट नगर में 11 शोरूम, ए टाइप की 14 व बी टाइप की 25 दुकानों का निर्माण कराया गया। नीलामी प्रक्रिया के खिलाफ कुछ लोगों ने उच्च न्यायालय में रिट भी दायर की है। इस सब के बीच ट्रांसपोर्ट नगर को आबाद करने की योजना मूर्तरूप नहीं ले सकी है।
नगर पालिका अध्यक्ष पति अजय जायसवाल ने ट्रांसपोर्ट नगर के विकास के लिए स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। इस वर्ष के पास हुए बजट में ट्रांसपोर्ट नगर के विकास का ब्यौरा देखना पड़ेगा। उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। दुकानें पहले की बनी हैं।