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आज राखी से सजेगी भाइयों की कलाई
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4. सुल्तानपुर के मुरारीदास गली में राखी की खरीदारी करती बहनें।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। भाई-बहन के पावन रिश्ते की डोर को मजबूत करने वाले रक्षाबंधन के त्यौहार की तैयारियां हर घरों में पूरी हो चुकी हैं। रविवार को परंपरागत ढंग से रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।
रक्षाबंधन का त्यौहार मनाने के लिए दूर-दराज रहने वाले भाई-बहन एक दूसरे से मिलने के लिए पहुंच रहे हैं। रक्षाबंधन पर्व को लेकर बाजार भी गुलजार रहा। शनिवार को राखी व मिठाई की दुकानों पर दिन भर भीड़ लगी रही। वहीं महिलाओं व युवतियों ने अपने हाथों में मेहंदी भी रचाई।
रक्षाबंधन पर्व पर बाजार में तमाम वेराइटी की राखी उतरी है। इसमें शंख, कमल फूल, लुंबा, कपल राखी, मेरे भइया, टेडीवियर, गणेशा, भीम, पप्पजी, स्टोन नग आदि शामिल हैं। शहर के मुरारीदास गली में राखी बेचने वाले दुकानदार फैजान अशरफ ने बताया कि हर तरह के राखियों की बिक्री हो रही है। कमल फूल, गणेशा व स्टोन को लोग ज्यादा तरजीह दे रहे हैं।
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देश ही नहीं विदेशों में भी भेजी गई राखियां
दूर-दराज रहने वाले भाइयों को बहनों ने राखी डाक के माध्यम से भेजी है। डाक विभाग के अनुसार स्पीड पोस्ट के जरिए भेजी जाने वाली राखियों की संख्या चार से पांच हजार हो चुकी हैं। प्रधान डाकघर के सहायक डाक अधीक्षक राजेश शर्मा ने बताया कि अब तक डाक विभाग की ओर से जिले में चार से पांच हजार राखियों की डिलीवरी की गई है।
इसके साथ ही रक्षाबंधन पर ढाई से तीन हजार राखी को भेजने की बुकिंग की गई है। बहनों ने भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भाइयों के लिए राखी भेजी है। जनपद से विदेशों को भेजी जाने वाली राखी की 30 बुकिंग की गई है।
भद्रा नक्षत्र न लगने से पूरे दिन बांधा जा सकता रक्षा सूत्र
कथा व्यास बृजेशाचार्य महराज ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा नक्षत्र नहीं पड़ रहा है। इसलिए पूरे दिन बहने अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांध सकती हैं। इसके अलावा विशेष मुहूर्त सुबह छह से दोपहर 12:07 बजे तक हैं। इस मुहूर्त में राखी बांधना बहुत शुभ माना जाता है। साथ ही शाम 4:30 से छह बजे तक राहुकाल में भी राखी बांधी जा सकती है। बृजेशाचार्य महराज बताते हैं कि श्रीमद् भागवत में कहा गया है कि सर्वप्रथम माता लक्ष्मी ने राजा बलि के हाथ में रक्षा सूत्र बांधकर भगवान वामन को उनके बंधन से मुक्त कराया था।
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रक्षाबंधन का त्यौहार मनाने के लिए दूर-दराज रहने वाले भाई-बहन एक दूसरे से मिलने के लिए पहुंच रहे हैं। रक्षाबंधन पर्व को लेकर बाजार भी गुलजार रहा। शनिवार को राखी व मिठाई की दुकानों पर दिन भर भीड़ लगी रही। वहीं महिलाओं व युवतियों ने अपने हाथों में मेहंदी भी रचाई।
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रक्षाबंधन पर्व पर बाजार में तमाम वेराइटी की राखी उतरी है। इसमें शंख, कमल फूल, लुंबा, कपल राखी, मेरे भइया, टेडीवियर, गणेशा, भीम, पप्पजी, स्टोन नग आदि शामिल हैं। शहर के मुरारीदास गली में राखी बेचने वाले दुकानदार फैजान अशरफ ने बताया कि हर तरह के राखियों की बिक्री हो रही है। कमल फूल, गणेशा व स्टोन को लोग ज्यादा तरजीह दे रहे हैं।
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देश ही नहीं विदेशों में भी भेजी गई राखियां
दूर-दराज रहने वाले भाइयों को बहनों ने राखी डाक के माध्यम से भेजी है। डाक विभाग के अनुसार स्पीड पोस्ट के जरिए भेजी जाने वाली राखियों की संख्या चार से पांच हजार हो चुकी हैं। प्रधान डाकघर के सहायक डाक अधीक्षक राजेश शर्मा ने बताया कि अब तक डाक विभाग की ओर से जिले में चार से पांच हजार राखियों की डिलीवरी की गई है।
इसके साथ ही रक्षाबंधन पर ढाई से तीन हजार राखी को भेजने की बुकिंग की गई है। बहनों ने भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भाइयों के लिए राखी भेजी है। जनपद से विदेशों को भेजी जाने वाली राखी की 30 बुकिंग की गई है।
भद्रा नक्षत्र न लगने से पूरे दिन बांधा जा सकता रक्षा सूत्र
कथा व्यास बृजेशाचार्य महराज ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा नक्षत्र नहीं पड़ रहा है। इसलिए पूरे दिन बहने अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांध सकती हैं। इसके अलावा विशेष मुहूर्त सुबह छह से दोपहर 12:07 बजे तक हैं। इस मुहूर्त में राखी बांधना बहुत शुभ माना जाता है। साथ ही शाम 4:30 से छह बजे तक राहुकाल में भी राखी बांधी जा सकती है। बृजेशाचार्य महराज बताते हैं कि श्रीमद् भागवत में कहा गया है कि सर्वप्रथम माता लक्ष्मी ने राजा बलि के हाथ में रक्षा सूत्र बांधकर भगवान वामन को उनके बंधन से मुक्त कराया था।