{"_id":"5e820f1e8ebc3e76ab7440e8","slug":"somebody-reached-the-village-traveling-on-foot-with-some-truck-sultanpur-news-lko515847930","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोई पैदल तो कुछ ट्रक से सफर कर पहुंचे गांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोई पैदल तो कुछ ट्रक से सफर कर पहुंचे गांव
विज्ञापन
सुल्तानपुर। दिल्ली के नागलोई से सुल्तानपुर की दूरी करीब पांच सौ किमी है लेकिन मोतिगरपुर थाना क्षेत्र के खोजगीपुर के दंपती पैदल ही घर को निकल पड़े। साथ में उनका एक रिश्तेदार शिवपाल भी था। तीनों 34 किमी पैदल चलकर दिल्ली के सीमापुरी बॉर्डर पर पहुंचे, जहां पुलिस ने बिस्किट, पानी व भोजन का पैकेट दिया। तब जाकर सूखते हलक में जान आई।
शनिवार की देर शाम दूसरे दिन घर पहुंचा पिंटू निषाद बताता है कि पैदल चलने की आदत कम हो गई थी। सिर पर बैग भारी पड़ रही थी। तेज धूप में 34 किमी के पैदल सफर में ही हलक सूख गई थी। पास में साढ़े तीन हजार रुपये बचे थे। दुकानें भी बंद थीं।
ऐसे में कुछ खाने को नहीं मिल रहा था। लगता था कि अब अचेत होकर गिर पड़ेंगे या तब। फिलहाल सीमापुरी बॉर्डर पर पुलिस की ओर से दिया गया लंच पैकेट जीवन का सहारा बना। कोई साधन नहीं मिलने पर फिर पैदल ही तीनों लोग आगे बढ़े।
विज्ञापन
इस बीच आजमगढ़ जनपद जा रहा एक ट्रक मिल गया। ट्रक चालक ने प्रति व्यक्ति एक हजार रुपया किराया मांगा। तीनों के लिए उसे तीन हजार रुपया किराया दिया। ट्रक में करीब 70 लोग पहले से ही बैठे थे। किसी तरह उसमें बैठकर दूसरे दिन शनिवार को गांव पहुंचा।
इस बीच पुलिस ने ट्रक कई जगह रोका लेकिन न कहीं भोजन मिला और न पानी। दिल्ली से वापसी के सफर का वाकया बताते हुए उसकी आंखें भर आती हैं। पिंटू के मुताबिक दिल्ली से न निकलता को तीनों भूख से मर जाते। ऐसे में पैदल ही घर निकलने का ही फैसला लेना पड़ा। यही हाल गाजियाबाद से पहुंचे राजेंद्र, फरीदाबाद से पहुंचे प्रभात व नागपुर से पहुंचे शिवप्रसाद का भी है।
विज्ञापन
शनिवार की देर शाम दूसरे दिन घर पहुंचा पिंटू निषाद बताता है कि पैदल चलने की आदत कम हो गई थी। सिर पर बैग भारी पड़ रही थी। तेज धूप में 34 किमी के पैदल सफर में ही हलक सूख गई थी। पास में साढ़े तीन हजार रुपये बचे थे। दुकानें भी बंद थीं।
विज्ञापन
ऐसे में कुछ खाने को नहीं मिल रहा था। लगता था कि अब अचेत होकर गिर पड़ेंगे या तब। फिलहाल सीमापुरी बॉर्डर पर पुलिस की ओर से दिया गया लंच पैकेट जीवन का सहारा बना। कोई साधन नहीं मिलने पर फिर पैदल ही तीनों लोग आगे बढ़े।
विज्ञापन
इस बीच आजमगढ़ जनपद जा रहा एक ट्रक मिल गया। ट्रक चालक ने प्रति व्यक्ति एक हजार रुपया किराया मांगा। तीनों के लिए उसे तीन हजार रुपया किराया दिया। ट्रक में करीब 70 लोग पहले से ही बैठे थे। किसी तरह उसमें बैठकर दूसरे दिन शनिवार को गांव पहुंचा।
इस बीच पुलिस ने ट्रक कई जगह रोका लेकिन न कहीं भोजन मिला और न पानी। दिल्ली से वापसी के सफर का वाकया बताते हुए उसकी आंखें भर आती हैं। पिंटू के मुताबिक दिल्ली से न निकलता को तीनों भूख से मर जाते। ऐसे में पैदल ही घर निकलने का ही फैसला लेना पड़ा। यही हाल गाजियाबाद से पहुंचे राजेंद्र, फरीदाबाद से पहुंचे प्रभात व नागपुर से पहुंचे शिवप्रसाद का भी है।