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Sultanpur News: वर्जित विषयों पर रचने के लिए जाने जाते हैं संजीव
Thu, 21 Dec 2023 12:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 21 Dec 2023 12:37 AM IST
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सुल्तानपुर। शोधपरक लेखन व वर्जित विषयों पर लिखे गए साहित्य के लिए मशहूर जिले के संजीव को 2023 का हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार दिए जाने की घोषणा से साहित्य प्रेमियों में उत्साह है। यह पुरस्कार कादीपुर तहसील अंतर्गत करौंदीकला ब्लाॅक के बांगरकला गांव में छह जुलाई 1947 को जन्मे संजीव को उनके उपन्यास मुझे पहचानो के लिए दिया जाएगा।
जिले को मिलने वाला यह दूसरा साहित्य अकादमी सम्मान है। इससे पहले 1982 में त्रिलोचन शास्त्री को यह सम्मान मिल चुका है। संजीव इस समय हिंदी कथा साहित्य के अग्रिम पंक्ति के लेखक हैं। 12 मार्च को नई दिल्ली में यह सम्मान संजीव को प्रदान किया जाएगा।
संजीव वर्तमान में नोएडा में रह रहे हैं। उन्होंने 38 वर्षों तक बिहार के कुलटी में एक निजी रासायनिक प्रयोगशाला में काम किया। इसके बाद सात वर्षों तक हंस समेत अनेक पत्रिकाओं का संपादन एवं स्तंभ लेखन किया। अब वह विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन करते हैं।
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संजीव को उनके शोधपरक लेखन व वर्जित विषयों पर लिखे गए साहित्य के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। संजीव वर्तमान में हिंदी साहित्य के पुरोधा हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार राम प्यारे प्रजापति कहते हैं कि इनकी कहानियां काफी चर्चित रहीं। संजीव की कहानियों में बिहार के आम आदमी का दर्द दिखता है। इनके उपन्यास सावधान नीचे आग है में कोयला खदानोें का मार्मिक वर्णन है। संजीव को यह पुरस्कार हम सभी के लिए संजीवनी जैसा है।
वहीं साहित्यकार डॉ़ ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह कहते हैं कि संजीव कोे जिस उपन्यास के लिए यह पुरस्कार दिया गया है, वह सती प्रथा व महिलाओं की स्थिति की हकीकत को जीवंत करता है। इसमें हमारे समाज में महिलाओं के संघर्ष की कहानी को पिरोया गया है। हिंदी साहित्य में सुल्तानपुर का डंका बज रहा है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है।
जिले के वरिष्ठ साहित्यकार कमल नयन पांडेय, कवि डॉ़ डीएम मिश्र, आलोचक डॉ़ राधेश्याम सिंह, डॉ़ सुशील कुमार पांडेय साहित्येन्दु, मथुरा प्रसाद सिंह जटायु, डॉ़ इंद्रमणि कुमार, जाहिल सुल्तानपुरी, हबीब अजमली व डाॅ़ मन्नान सुल्तानपुरी ने संजीव को बधाई दी है।
यह हैं प्रमुख कृतियां
संजीव की प्रमुख रचनाओं में तीस साल का सफरनामा, आप यहां हैं, भूमिका और अन्य कहानियां, दुनिया की सबसे हसीन औरत, प्रेतमुक्ति, प्रेरणास्रोत और अन्य कहानियां, ब्लैक होल, खोज, दस कहानियां, गति का पहला सिद्धांत, गुफा का आदमी, आरोहण (कहानी संग्रह), किशनगढ़ के अहेरी, सर्कस, सावधान! नीचे आग है, धार, पांव तले की दूब, जंगल जहां शुरू होता है, सूत्रधार, आकाश चम्पा, अहेर, फांस, प्रत्यंचा (उपन्यास), रानी की सराय (किशोर उपन्यास), डायन आदि शामिल हैं।
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जिले को मिलने वाला यह दूसरा साहित्य अकादमी सम्मान है। इससे पहले 1982 में त्रिलोचन शास्त्री को यह सम्मान मिल चुका है। संजीव इस समय हिंदी कथा साहित्य के अग्रिम पंक्ति के लेखक हैं। 12 मार्च को नई दिल्ली में यह सम्मान संजीव को प्रदान किया जाएगा।
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संजीव वर्तमान में नोएडा में रह रहे हैं। उन्होंने 38 वर्षों तक बिहार के कुलटी में एक निजी रासायनिक प्रयोगशाला में काम किया। इसके बाद सात वर्षों तक हंस समेत अनेक पत्रिकाओं का संपादन एवं स्तंभ लेखन किया। अब वह विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन करते हैं।
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संजीव को उनके शोधपरक लेखन व वर्जित विषयों पर लिखे गए साहित्य के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। संजीव वर्तमान में हिंदी साहित्य के पुरोधा हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार राम प्यारे प्रजापति कहते हैं कि इनकी कहानियां काफी चर्चित रहीं। संजीव की कहानियों में बिहार के आम आदमी का दर्द दिखता है। इनके उपन्यास सावधान नीचे आग है में कोयला खदानोें का मार्मिक वर्णन है। संजीव को यह पुरस्कार हम सभी के लिए संजीवनी जैसा है।
वहीं साहित्यकार डॉ़ ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह कहते हैं कि संजीव कोे जिस उपन्यास के लिए यह पुरस्कार दिया गया है, वह सती प्रथा व महिलाओं की स्थिति की हकीकत को जीवंत करता है। इसमें हमारे समाज में महिलाओं के संघर्ष की कहानी को पिरोया गया है। हिंदी साहित्य में सुल्तानपुर का डंका बज रहा है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है।
जिले के वरिष्ठ साहित्यकार कमल नयन पांडेय, कवि डॉ़ डीएम मिश्र, आलोचक डॉ़ राधेश्याम सिंह, डॉ़ सुशील कुमार पांडेय साहित्येन्दु, मथुरा प्रसाद सिंह जटायु, डॉ़ इंद्रमणि कुमार, जाहिल सुल्तानपुरी, हबीब अजमली व डाॅ़ मन्नान सुल्तानपुरी ने संजीव को बधाई दी है।
यह हैं प्रमुख कृतियां
संजीव की प्रमुख रचनाओं में तीस साल का सफरनामा, आप यहां हैं, भूमिका और अन्य कहानियां, दुनिया की सबसे हसीन औरत, प्रेतमुक्ति, प्रेरणास्रोत और अन्य कहानियां, ब्लैक होल, खोज, दस कहानियां, गति का पहला सिद्धांत, गुफा का आदमी, आरोहण (कहानी संग्रह), किशनगढ़ के अहेरी, सर्कस, सावधान! नीचे आग है, धार, पांव तले की दूब, जंगल जहां शुरू होता है, सूत्रधार, आकाश चम्पा, अहेर, फांस, प्रत्यंचा (उपन्यास), रानी की सराय (किशोर उपन्यास), डायन आदि शामिल हैं।