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Sultanpur News: ब्रिटिश हुकूमत में भी था राम दरबार के सिक्कों का चलन
Sat, 28 Sep 2024 01:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sat, 28 Sep 2024 01:29 AM IST
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ब्रिटिश हुकूमत के समय के सिक्के पर राम दरबार की तस्वीर। -संवाद
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- हलियापुर के दंपती ने संभाल कर रखे हैं 408 साल पुराने सिक्के
- ईस्ट इंडिया कंपनी भी करती थी प्रभु राम की प्रभुता का सम्मान
बल्दीराय (सुल्तानपुर)। भगवान श्रीराम के अस्तित्व को ब्रिटिश हुकूमत भी बखूबी मानती थी। इसका प्रमाण है कि उस दौर में भी श्रीराम दरबार का सिक्का चलन में था। ऐसे ही 408 साल पुराने दो सिक्के हलियापुर निवासी अवधेश उपाध्याय के घर पर मौजूद हैं, जो उनकी पत्नी को विवाह के समय उपहार स्वरूप मिले थे। वर्ष 1995 में अवधेश की शादी कूड़ेभार के लोकेपुर निवासी स्व. जय गोपाल उपाध्याय की बेटी कंचन के साथ हुई थी। उस समय श्रीराम दरबार के दो सिक्के कंचन के पिता ने यह कहते हुए दिए थे कि बिटिया तुमको जो चीज दे रहा हूं, इसको बहुत संभाल कर रखना। यह तुम्हारे लिए बहुत शुभ रहेगा। फिलहाल यह पता नहीं है कि दोनों सिक्के किस धातु से बने हैं। हालांकि, देखने में ये तांबे के प्रतीत होते हैं।
सन् 1616 में निर्मित इन सिक्कों के एक तरफ भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान का चित्र बना है तो दूसरी तरफ अंग्रेजी में हाफ आना और ईस्ट इंडिया कंपनी लिखा है। मतलब साफ है कि उस समय ईस्ट इंडिया कंपनी की हुकूमत थी और ये सिक्के प्रचलन में थे। इस सिक्के से यह बात भी साफ होती है कि अंग्रेज भी प्रभु श्री राम के प्रति भारतीय जनता की आस्था को स्वीकार करते थे। इसलिए यह सिक्के प्रचलन में थे।
महावीर मंदिर में संरक्षित सिक्कों में भी राम दरबार
अवधेश उपाध्याय ने बताया कि पटना के महावीर मंदिर के दानपात्र में भी सन् 1818 के 30 सिक्के मिले थे, जो ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से जारी किए गए था। ये सिक्के एक आना के थे। सिक्के पर एक तरफ श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान की तस्वीर तो दूसरी तरफ एक आना और ईस्ट इंडिया कंपनी लिखा है। महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव कुणाल किशोर ने मंदिर में इन सिक्कों को धरोहर के रूप में रखवा दिया है।
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- ईस्ट इंडिया कंपनी भी करती थी प्रभु राम की प्रभुता का सम्मान
बल्दीराय (सुल्तानपुर)। भगवान श्रीराम के अस्तित्व को ब्रिटिश हुकूमत भी बखूबी मानती थी। इसका प्रमाण है कि उस दौर में भी श्रीराम दरबार का सिक्का चलन में था। ऐसे ही 408 साल पुराने दो सिक्के हलियापुर निवासी अवधेश उपाध्याय के घर पर मौजूद हैं, जो उनकी पत्नी को विवाह के समय उपहार स्वरूप मिले थे। वर्ष 1995 में अवधेश की शादी कूड़ेभार के लोकेपुर निवासी स्व. जय गोपाल उपाध्याय की बेटी कंचन के साथ हुई थी। उस समय श्रीराम दरबार के दो सिक्के कंचन के पिता ने यह कहते हुए दिए थे कि बिटिया तुमको जो चीज दे रहा हूं, इसको बहुत संभाल कर रखना। यह तुम्हारे लिए बहुत शुभ रहेगा। फिलहाल यह पता नहीं है कि दोनों सिक्के किस धातु से बने हैं। हालांकि, देखने में ये तांबे के प्रतीत होते हैं।
सन् 1616 में निर्मित इन सिक्कों के एक तरफ भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान का चित्र बना है तो दूसरी तरफ अंग्रेजी में हाफ आना और ईस्ट इंडिया कंपनी लिखा है। मतलब साफ है कि उस समय ईस्ट इंडिया कंपनी की हुकूमत थी और ये सिक्के प्रचलन में थे। इस सिक्के से यह बात भी साफ होती है कि अंग्रेज भी प्रभु श्री राम के प्रति भारतीय जनता की आस्था को स्वीकार करते थे। इसलिए यह सिक्के प्रचलन में थे।
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महावीर मंदिर में संरक्षित सिक्कों में भी राम दरबार
अवधेश उपाध्याय ने बताया कि पटना के महावीर मंदिर के दानपात्र में भी सन् 1818 के 30 सिक्के मिले थे, जो ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से जारी किए गए था। ये सिक्के एक आना के थे। सिक्के पर एक तरफ श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान की तस्वीर तो दूसरी तरफ एक आना और ईस्ट इंडिया कंपनी लिखा है। महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव कुणाल किशोर ने मंदिर में इन सिक्कों को धरोहर के रूप में रखवा दिया है।
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