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कहने को राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज, व्यवस्था जूनियर स्तर की भी नहीं
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सुल्तानपुर। जिले के तीन राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों में उधार के प्रधानाचार्यों की तैनाती कर किसी तरह काम चलाया जा रहा है।
जिले के तीन पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों में करीब 898 बच्चे पंजीकृत हैं और पांच शिक्षकों पर इनके शिक्षण कार्य का दायित्व है। इस हिसाब से एक शिक्षक पर करीब 180 बच्चों की तालीम की जिम्मेदारी है।
शिक्षक भले ही किसी भी विषय के हों लेकिन गणित, विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी से लेकर इतिहास, भूगोल तक पढ़ाने की घंटावार खानापूरी उन्हें ही करनी है। यही नहीं उधार के प्रधानाचार्यों के भरोसे कॉलेज की जिम्मेदारी है, जो किसी तरह शिक्षण व्यवस्था चलाने की कोशिश कर रहे हैं।
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जिले के राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों की यही स्याह तस्वीर है। ऐसे शैक्षिक परिवेश में शिक्षा की गुणवत्ता और यहां के छात्र-छात्राओं के भविष्य का अंदाजा स्वत: ही लगाया जा सकता है। विद्यालयों का मॉडल बनना तो दूर की बात है। इन विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था ही संचालित कर पाना टेढ़ी खीर है।
सपा शासन काल में जिले में चार राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों की बिल्डिंग बनवाई गई थी लेकिन संचालन शुरू नहीं हो सका था। इसी में से एक भदैंया के पन्ना टिकरी को तत्कालीन सरकार ने इंग्लिश मीडियम अभिनव विद्यालय बनवा दिया था।
सरकार बदलने के बाद मॉडल इंटर कॉलेजों का नाम बदलकर पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज कर दिया गया। तीनों राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों में जीआईसी से शिक्षक बतौर प्रधानाचार्य भेजे गए। इन विद्यालयों में अब पढ़ाई कराने के लिए शिक्षक नहीं है।
माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग से तेंदुआकाजी में दो, बुआपुर में एक और अमिलिया सिकरा में दो शिक्षकों की तैनाती हुई है जबकि हर एक विद्यालय में 13 से 17 शिक्षक की तैनाती होनी है। शिक्षकों की कमी की वजह से अध्यापन कार्य नहीं हो पा रहा है।
प्रधानाचार्य किसी तरह शिक्षण व्यवस्था चलाने की कोशिश कर रहे हैं। दोस्तपुर के तेंदुआकाजी में कक्षा नौ से 12 तक 335 बच्चे, बुआपुर में 277 बच्चे और अमिलिया सिकरा में 286 बच्चे पंजीकृत हैं। तीनों विद्यालयों में इंटरमीडिएट स्तर पर विज्ञान व कला वर्ग की कक्षाएं संचालित हैं। शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों को अध्ययन में दिक्कतें हो रही हैं।
पिछले वर्षों में राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों में सेवानिवृत्त शिक्षकों को मानदेय पर रखकर व्यवस्था संचालित की जा रही थी। इस बार आवेदन मांगे गए हैं लेकिन अभी तक प्रस्ताव का नवीनीकरण नहीं हुआ।
विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी स्टाफ भी नहीं हैं। प्रधानाचार्य को ही विद्यालय का ताला खोलने से लेकर हर काम करना पड़ता है। हालात ऐसे ही रहे तो इन विद्यालयों का मॉडल बनने का सपना पूरा नहीं होगा। साथ ही बच्चों व उनके अभिभावकों का भी मोह भंग हो जाएगा। स्ववित्तपोषित विद्यालयों की तुलना में शुल्क बेहद कम होने व वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने पर ही मजबूरी में लोग यहां प्रवेश ले रहे हैं।
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जिले के तीन पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों में करीब 898 बच्चे पंजीकृत हैं और पांच शिक्षकों पर इनके शिक्षण कार्य का दायित्व है। इस हिसाब से एक शिक्षक पर करीब 180 बच्चों की तालीम की जिम्मेदारी है।
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शिक्षक भले ही किसी भी विषय के हों लेकिन गणित, विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी से लेकर इतिहास, भूगोल तक पढ़ाने की घंटावार खानापूरी उन्हें ही करनी है। यही नहीं उधार के प्रधानाचार्यों के भरोसे कॉलेज की जिम्मेदारी है, जो किसी तरह शिक्षण व्यवस्था चलाने की कोशिश कर रहे हैं।
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जिले के राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों की यही स्याह तस्वीर है। ऐसे शैक्षिक परिवेश में शिक्षा की गुणवत्ता और यहां के छात्र-छात्राओं के भविष्य का अंदाजा स्वत: ही लगाया जा सकता है। विद्यालयों का मॉडल बनना तो दूर की बात है। इन विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था ही संचालित कर पाना टेढ़ी खीर है।
सपा शासन काल में जिले में चार राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों की बिल्डिंग बनवाई गई थी लेकिन संचालन शुरू नहीं हो सका था। इसी में से एक भदैंया के पन्ना टिकरी को तत्कालीन सरकार ने इंग्लिश मीडियम अभिनव विद्यालय बनवा दिया था।
सरकार बदलने के बाद मॉडल इंटर कॉलेजों का नाम बदलकर पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज कर दिया गया। तीनों राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों में जीआईसी से शिक्षक बतौर प्रधानाचार्य भेजे गए। इन विद्यालयों में अब पढ़ाई कराने के लिए शिक्षक नहीं है।
माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग से तेंदुआकाजी में दो, बुआपुर में एक और अमिलिया सिकरा में दो शिक्षकों की तैनाती हुई है जबकि हर एक विद्यालय में 13 से 17 शिक्षक की तैनाती होनी है। शिक्षकों की कमी की वजह से अध्यापन कार्य नहीं हो पा रहा है।
प्रधानाचार्य किसी तरह शिक्षण व्यवस्था चलाने की कोशिश कर रहे हैं। दोस्तपुर के तेंदुआकाजी में कक्षा नौ से 12 तक 335 बच्चे, बुआपुर में 277 बच्चे और अमिलिया सिकरा में 286 बच्चे पंजीकृत हैं। तीनों विद्यालयों में इंटरमीडिएट स्तर पर विज्ञान व कला वर्ग की कक्षाएं संचालित हैं। शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों को अध्ययन में दिक्कतें हो रही हैं।
पिछले वर्षों में राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों में सेवानिवृत्त शिक्षकों को मानदेय पर रखकर व्यवस्था संचालित की जा रही थी। इस बार आवेदन मांगे गए हैं लेकिन अभी तक प्रस्ताव का नवीनीकरण नहीं हुआ।
विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी स्टाफ भी नहीं हैं। प्रधानाचार्य को ही विद्यालय का ताला खोलने से लेकर हर काम करना पड़ता है। हालात ऐसे ही रहे तो इन विद्यालयों का मॉडल बनने का सपना पूरा नहीं होगा। साथ ही बच्चों व उनके अभिभावकों का भी मोह भंग हो जाएगा। स्ववित्तपोषित विद्यालयों की तुलना में शुल्क बेहद कम होने व वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने पर ही मजबूरी में लोग यहां प्रवेश ले रहे हैं।