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Sultanpur News: साॅफ्टवेयर इंस्टॉल न होने से शोपीस बनीं मशीनें
Mon, 15 Apr 2024 12:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Mon, 15 Apr 2024 12:19 AM IST
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सुल्तानपुर। मेडिकल कॉलेज के एमसीएच भवन में रखीं नई जांच मशीनें शोपीस बनी हुई हैं। महीनों से एमसीएच विंग के पैथाेलॉजी में रखी विशेष जांच मशीनों में साॅफ्टवेयर इंस्टॉल नहीं होने के कारण इन्हें शुरू नहीं किया जा सका है। इस कारण मरीजों को हार्मोनल, थायराइड, प्रोस्टेट व डायबिटीज की जांच के लिए बाहर जाना पड़ता है।
नई मशीनों से कई प्रकार की हार्मोनल समेत अन्य जांच शुरू होनी थीं। इसमें हार्मोनल की एफएसएच व एलएफ, थायराइड फंग्सनल ट्रेसर जांच पीएसएस, खून की सीए-125, बी-12, थायराइड व प्रोस्टेट जांच शामिल हैं। पैथाेलॉजी में महीनों पहले आईं मशीनें शुरू नहीं हो सकी हैं।
मेडिकल कॉलेज में अभी सीबीसी, एलएफटी, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल व आरबीएस जांच हो रही हैं। जबकि सीटी स्कैन की जांच के लिए मरीजों को दूबेपुर स्थित ट्राॅमा सेंटर जाना पड़ता है। वहीं विशेष जांच के मरीजों को बाहर जाकर जांच करानी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज में इलाज के आईं चौरेबाजार की रानी पांडेय ने बताया कि उन्हें सीए-125 की खून की जांच बाहर जाकर करानी पड़ी।
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जल्द शुरू होंगी जांचें
एमसीएच विंग की पैथाेलॉजी में जल्द ही जांच मशीनें शुरू होंगी। एमसीएच विंग के चौथे फ्लोर पर अलग से जांच कक्ष बनाया गया है। लखनऊ से सॉफ्टवेयर इंस्टाॅल के लिए पत्र भेजा गया है।
डॉ़ एसके गोयल, सीएमएस मेडिकल कॉलेज
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नई मशीनों से कई प्रकार की हार्मोनल समेत अन्य जांच शुरू होनी थीं। इसमें हार्मोनल की एफएसएच व एलएफ, थायराइड फंग्सनल ट्रेसर जांच पीएसएस, खून की सीए-125, बी-12, थायराइड व प्रोस्टेट जांच शामिल हैं। पैथाेलॉजी में महीनों पहले आईं मशीनें शुरू नहीं हो सकी हैं।
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मेडिकल कॉलेज में अभी सीबीसी, एलएफटी, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल व आरबीएस जांच हो रही हैं। जबकि सीटी स्कैन की जांच के लिए मरीजों को दूबेपुर स्थित ट्राॅमा सेंटर जाना पड़ता है। वहीं विशेष जांच के मरीजों को बाहर जाकर जांच करानी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज में इलाज के आईं चौरेबाजार की रानी पांडेय ने बताया कि उन्हें सीए-125 की खून की जांच बाहर जाकर करानी पड़ी।
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जल्द शुरू होंगी जांचें
एमसीएच विंग की पैथाेलॉजी में जल्द ही जांच मशीनें शुरू होंगी। एमसीएच विंग के चौथे फ्लोर पर अलग से जांच कक्ष बनाया गया है। लखनऊ से सॉफ्टवेयर इंस्टाॅल के लिए पत्र भेजा गया है।
डॉ़ एसके गोयल, सीएमएस मेडिकल कॉलेज