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Sultanpur News: दो साल बाद लोक अदालत को मिला स्थायी चेयरमैन

Thu, 13 Jul 2023 12:04 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 13 Jul 2023 12:04 AM IST
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Lok Adalat got permanent chairman after two years
सुल्तानपुर। जन उपयोगी सेवाओं के त्वरित निस्तारण के लिए गठित लोक अदालत को दो साल बाद स्थाई चेयरमैन मिला है। यह पद मार्च 2021 से खाली चल रहा था। स्थायी नियुक्ति होने से वादकारियों को अब वादों की सुनवाई में बड़ी राहत मिलेगी। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22 बी के तहत स्थाई लोक अदालत का गठन करने का प्रावधान है। इसमें जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े मामलों का त्वरित निस्तारण किया जाता है।
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जिले में वर्ष 2016 में स्थाई लोक अदालत का गठन किया गया था। इसमें बिना किसी शुल्क के लोगों के मामलों का निस्तारण हो रहा था। मार्च 2021 में स्थाई लोक अदालत के तत्कालीन चेयरमैन अरुण कुमार मिश्र का स्थानांतरण लखनऊ हो गया था। तब से यह पद खाली होने के कारण स्थाई लोक अदालत में लंबित मामलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा था।
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इससे वादकारियों को काफी परेशानी उठाना पड़ रही थी। बीते दिनों गोरखपुर के मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए न्यायाधीश धरनीधर ओझा को जिले की स्थाई लोक अदालत का चेयरमैन नामित किया गया है। उन्होंने अपना नया पदभार भी संभाल लिया है। इससे वादकारियों को बड़ी राहत मिली है।
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स्थाई लोक अदालत में 37 मामले लंबित
स्थाई लोक अदालत में अधिवक्ता रमेश यादव व मृदुला राय सदस्य हैं। रमेश यादव ने बताया कि मौजूदा समय में यहां पर 37 मामले लंबित हैं। स्थाई लोक अदालत में दायर होने वाले मामलों में वादकारी को कोर्ट फीस नहीं देना पड़ती है। बताया कि स्थाई लोक अदालत के निर्णय के खिलाफ किसी भी अदालत में अपील दायर नहीं हो सकती है। इसके निर्णय के खिलाफ सिर्फ हाईकोर्ट में ही रिट दाखिल हो सकती है।




इन मामलों से जुड़े वादों की सुनवाई
स्थाई लोक अदालत में वायु, सड़क व जल मार्ग से यात्रियों के माल के वहन के लिए यातायात सेवा से संबंधित विवाद, डाक, तार या टेलीफोन सेवा से संबंधित विवाद किसी स्थापना से जनता को विद्युत, प्रकाश या जल से संबंधित विवाद, स्वच्छता प्रणाली से जुड़े मामले दायर होते हैं। इसके अलावा अस्पताल या औषधालय सेवा से संबंधित विवाद, बीमा से संबंधित विवाद, शैक्षिक या अशैक्षिक संस्थाओं से जुड़े विवाद और आवास या भू-संपदा से संबंधित विवाद का निपटारा भी स्थाई लोक अदालत के माध्यम से ही होता है।
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