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रोजगार का जरिया बनेगी कड़कनाथ हैचरी
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सुल्तानपुर। मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में पाए जाने वाले कड़कनाथ मुर्गा की प्रजाति को जिले में भी विकसित किया जाएगा। पीएम के मन की बात से प्रेरित होकर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अतुल वत्स ने कड़कनाथ मुर्गा प्रजाति की हैचरी स्थापित करवाने का निर्णय लिया है।
सीडीओ ने मेरठ वेटरिनरी इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों से हैचरी की तकनीकी के बारे में सहयोग लेते हुए अधिकारियों को जानकारी दी। इसके बाद जिले के भदैंया विकास खंड के सकरसी ग्राम पंचायत में कड़कनाथ मुर्गा के हैचरी की स्थापना का कार्य शुरू करवा दिया गया है।
योजना के मुताबिक कड़कनाथ मुर्गा प्रजाति का अंडा गैर जनपद या फिर गैर प्रांत से लाया जाएगा। उसे हैचरी में रखकर चूजा तैयार किया जाएगा।
21 दिन में चूजा तैयार होने के बाद उसे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सस्ती दरों पर दिया जाएगा। महिलाएं चूजे को विकसित करके मुर्गी से अंडा तैयार करेगी व मुर्गें को बाजार में बेच करके मुनाफा कमाएंगी।
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छह से सात सौ रुपये में बिकेगा एक मुर्गा
कड़कनाथ मुर्गा प्रजाति का अंडा बाहर से 20 से 25 रुपये में लाया जाएगा। अंडे को मशीन से चूजा के रूप मे विकसित करके उसे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को करीब 50 रुपये में दिया जाएगा। महिलाएं चूजे को विकसित करके मुर्गी से अंडा तैयार कर सकेंगी और मुर्गा को बाजार में बेच सकेंगी। अधिकारियों के मुताबिक बाजार में कड़कनाथ मुर्गा की कीमत करीब छह से सात सौ रुपये है। कम समय में अधिक फायदा मिलने से समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
कड़कनाथ मुर्गा फैट फ्री होता है। यह अन्य प्रजातियों से ज्यादा फायदेमंद है। इस प्रजाति को विकसित करने से महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी। इसे देखते हुए जिले में दो हैचरी यूनिट की स्थापना का निर्णय लिया गया है। अभी एक हैचरी पर काम चल रहा है। इसमें करीब पांच सौ अंडों को विकसित किया जा सकेगा। - अतुल वत्स, सीडीओ
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सीडीओ ने मेरठ वेटरिनरी इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों से हैचरी की तकनीकी के बारे में सहयोग लेते हुए अधिकारियों को जानकारी दी। इसके बाद जिले के भदैंया विकास खंड के सकरसी ग्राम पंचायत में कड़कनाथ मुर्गा के हैचरी की स्थापना का कार्य शुरू करवा दिया गया है।
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योजना के मुताबिक कड़कनाथ मुर्गा प्रजाति का अंडा गैर जनपद या फिर गैर प्रांत से लाया जाएगा। उसे हैचरी में रखकर चूजा तैयार किया जाएगा।
21 दिन में चूजा तैयार होने के बाद उसे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सस्ती दरों पर दिया जाएगा। महिलाएं चूजे को विकसित करके मुर्गी से अंडा तैयार करेगी व मुर्गें को बाजार में बेच करके मुनाफा कमाएंगी।
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छह से सात सौ रुपये में बिकेगा एक मुर्गा
कड़कनाथ मुर्गा प्रजाति का अंडा बाहर से 20 से 25 रुपये में लाया जाएगा। अंडे को मशीन से चूजा के रूप मे विकसित करके उसे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को करीब 50 रुपये में दिया जाएगा। महिलाएं चूजे को विकसित करके मुर्गी से अंडा तैयार कर सकेंगी और मुर्गा को बाजार में बेच सकेंगी। अधिकारियों के मुताबिक बाजार में कड़कनाथ मुर्गा की कीमत करीब छह से सात सौ रुपये है। कम समय में अधिक फायदा मिलने से समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
कड़कनाथ मुर्गा फैट फ्री होता है। यह अन्य प्रजातियों से ज्यादा फायदेमंद है। इस प्रजाति को विकसित करने से महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी। इसे देखते हुए जिले में दो हैचरी यूनिट की स्थापना का निर्णय लिया गया है। अभी एक हैचरी पर काम चल रहा है। इसमें करीब पांच सौ अंडों को विकसित किया जा सकेगा। - अतुल वत्स, सीडीओ