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Sultanpur News: लंपी पर निगरानी बढ़ी, पशुशालाओं में मच्छरदानी लगाने की सलाह
Sun, 06 Sep 2026 12:44 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sun, 06 Sep 2026 12:44 AM IST
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सुल्तानपुर। पशुओं में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) पर पशुपालन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। जिले में इस बीमारी का एक भी मामला सामने नहीं आया है और न ही विभाग को कोई शिकायत मिली है। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर 5000 लंपी वैक्सीन मंगाई गई है। पशुपालकों को पशुशालाओं में मच्छरदानी लगाने और मक्खी-मच्छरों से बचाव के उपाय करने की सलाह दी गई है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि मुख्यालय से बीमारी पर लगातार नजर रखने के निर्देश मिले हैं। बताया कि लंपी संक्रमित पशु को तत्काल स्वस्थ पशुओं से अलग करना चाहिए। बीमारी में तेज बुखार, भूख न लगना, कमजोरी और दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। त्वचा पर शरीर, सिर, गर्दन और थनों के आसपास उभरी कठोर गांठें भी प्रमुख लक्षण हैं। बताया कि बीमारी फैलाने वाले कीटों पर नियंत्रण जरूरी है। पशुशाला में नियमित साफ-सफाई, कीटाणुनाशक का छिड़काव और मक्खी-मच्छरों की रोकथाम की जानी चाहिए।
संक्रमित पशु को 28 दिन रखें अलग
लंपी की आशंका होने पर पशु को कम से कम 28 दिन तक स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की सलाह दी गई है। टीकाकरण पशु चिकित्सक की सलाह से कराया जाए। त्वचा पर घाव होने पर बिना चिकित्सकीय परामर्श दवा न दें। लंपी कैप्रीपॉक्स वायरस से होने वाली संक्रामक बीमारी है। इसका प्रसार मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और टिक्स जैसे कीटों के काटने से होता है।
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-डॉ. गौरव पांडेय, पशु चिकित्सा वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र बरासिन
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि मुख्यालय से बीमारी पर लगातार नजर रखने के निर्देश मिले हैं। बताया कि लंपी संक्रमित पशु को तत्काल स्वस्थ पशुओं से अलग करना चाहिए। बीमारी में तेज बुखार, भूख न लगना, कमजोरी और दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। त्वचा पर शरीर, सिर, गर्दन और थनों के आसपास उभरी कठोर गांठें भी प्रमुख लक्षण हैं। बताया कि बीमारी फैलाने वाले कीटों पर नियंत्रण जरूरी है। पशुशाला में नियमित साफ-सफाई, कीटाणुनाशक का छिड़काव और मक्खी-मच्छरों की रोकथाम की जानी चाहिए।
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संक्रमित पशु को 28 दिन रखें अलग
लंपी की आशंका होने पर पशु को कम से कम 28 दिन तक स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की सलाह दी गई है। टीकाकरण पशु चिकित्सक की सलाह से कराया जाए। त्वचा पर घाव होने पर बिना चिकित्सकीय परामर्श दवा न दें। लंपी कैप्रीपॉक्स वायरस से होने वाली संक्रामक बीमारी है। इसका प्रसार मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और टिक्स जैसे कीटों के काटने से होता है।
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-डॉ. गौरव पांडेय, पशु चिकित्सा वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र बरासिन