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भाजपा ने 1991 के बाद दर्ज की दूसरी बड़ी जीत
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सुल्तानपुर। विधानसभा चुनाव में वर्ष 1991 के बाद भाजपा ने जिले में दूसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। भाजपा ने चार विधानसभा सीटों पर परचम लहराते हुए सारी अटकलों पर विराम लगा दिया है।
वर्ष 1991 की राम लहर में भाजपा ने जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर पहली बार जीत दर्ज की थी। उसके बाद भाजपा लगातार चुनाव में हिस्सा लेती रही लेकिन वह बेहतर नहीं कर सकी। धीरे-धीरे भाजपा हाशिए पर चली गई। 1993 में हुए चुनाव में भाजपा का पूरी तरह से सफाया हो गया लेकिन वर्ष 1996 में उसने तीन सीटों कादीपुर, लंभुआ (चांदा) व सुल्तानपुर में जीत दर्ज कर फिर उम्मीद जगाई थी। वर्ष 2002 में भाजपा की यह उम्मीद फिर धूमिल हो गई। उसके पास से कादीपुर व लंभुआ (चांदा) सीट भी छिन गई। तब सिर्फ सुल्तानपुर विधानसभा सीट ही भाजपा के पास रह गई थी। सुल्तानपुर सीट पर भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश पांडेय विजयी हुए थेे।
इसके बाद के दो चुनाव में 2007 व 2012 में भाजपा का न सिर्फ सफाया हुआ बल्कि उसके प्रत्याशी जमानत बचाने को तरस गए। 2017 का चुनाव भाजपा के लिए एक बार फिर टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ। भाजपा ने कादीपुर, लंभुआ, सुल्तानपुर, सदर व विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कर सियासी हलके में तहलका मचा दिया था लेकिन इसौली सीट उसके हाथ से फिसल गई थी। इस बार के चुनाव में भाजपा ने फिर 2017 का इतिहास दोहराया है। उसके खाते में 2017 की सभी सीटें बरकरार रहीं। 1991 की रामलहर के बाद भाजपा की यह दूसरी सबसे बड़ी जीत है।
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वर्ष 1991 की राम लहर में भाजपा ने जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर पहली बार जीत दर्ज की थी। उसके बाद भाजपा लगातार चुनाव में हिस्सा लेती रही लेकिन वह बेहतर नहीं कर सकी। धीरे-धीरे भाजपा हाशिए पर चली गई। 1993 में हुए चुनाव में भाजपा का पूरी तरह से सफाया हो गया लेकिन वर्ष 1996 में उसने तीन सीटों कादीपुर, लंभुआ (चांदा) व सुल्तानपुर में जीत दर्ज कर फिर उम्मीद जगाई थी। वर्ष 2002 में भाजपा की यह उम्मीद फिर धूमिल हो गई। उसके पास से कादीपुर व लंभुआ (चांदा) सीट भी छिन गई। तब सिर्फ सुल्तानपुर विधानसभा सीट ही भाजपा के पास रह गई थी। सुल्तानपुर सीट पर भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश पांडेय विजयी हुए थेे।
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इसके बाद के दो चुनाव में 2007 व 2012 में भाजपा का न सिर्फ सफाया हुआ बल्कि उसके प्रत्याशी जमानत बचाने को तरस गए। 2017 का चुनाव भाजपा के लिए एक बार फिर टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ। भाजपा ने कादीपुर, लंभुआ, सुल्तानपुर, सदर व विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कर सियासी हलके में तहलका मचा दिया था लेकिन इसौली सीट उसके हाथ से फिसल गई थी। इस बार के चुनाव में भाजपा ने फिर 2017 का इतिहास दोहराया है। उसके खाते में 2017 की सभी सीटें बरकरार रहीं। 1991 की रामलहर के बाद भाजपा की यह दूसरी सबसे बड़ी जीत है।
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