ई-गवर्नेंस बेपटरी, डिजिटल इंडिया दूर की कौड़ी
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सुल्तानपुर। डिजिटल इंडिया की कवायद में जुटे पीएम के लिए जिले के संकेत बेहतर नहीं हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब सात वर्ष पहले शुरू ई-गवर्नेंस परियोजना ही अभी अपने मुकाम पर नहीं पहुंच सकी है। ई-गवर्नेंस में आठ विभागों की 28 सेवाओं को सरकार ने जरूर शामिल कर दिया लेकिन कार्य व्यवहार में सिर्फ दो ही विभाग आए हैं। छह विभाग ऐसे हैं कि जिनके न तो आवेदन आ रहे हैं और न ही उनकी सेवाएं मिल पा रही हैं। इसके पीछे प्रचार-प्रसार के अभाव के साथ ऑनलाइन सेवाओं में खामियां बताई जा रही हैं। ऐसे में डिजिटल इंडिया से सभी विभागों को जोड़कर सेवाएं ऑनलाइन करने के प्रधानमंत्री के सपने को पूरा होने में अभी से संदेह दिख रहा है।
आठ विभाग ई-गवर्नेंस से जुड़े
करीब सात वर्ष पहले जिले में शुरू हुई ई-गवर्नेंस परियोजना के तहत अभी तक आठ विभागों को शामिल किया जा चुका हैं। इसमें राजस्व, नगर निकाय, समाज कल्याण, महिला कल्याण, विकलांग कल्याण, सेवायोजन, आपूर्ति व पंचायतीराज शामिल हैं। ई-गवर्नेंस की शुरुआत राजस्व से हुई थी।
28 सेवाएं शामिल
ई-गवर्नेंस के तहत आठ विभागों की कुल 28 सेवाओं को शामिल किया गया है। इसमें राजस्व से आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र के साथ खतौनी की नकल ऑनलाइन जनसेवा केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराने का प्रावधान है। नगर निकाय से जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र, सेवायोजन की सेवाओं में नवीन रोजगार पंजीकरण एवं नवीनीकरण, आपूर्ति विभाग की राशन कॉर्ड, नवीनीकरण, संशोधन व समर्पण, पंचायतराज की जन्म, मृत्यु प्रमाणपत्र व कुटुंब रजिस्टर की नकल की सेवाओं को शामिल किया गया है। इसी तरह समाज कल्याण की विभिन्न पेंशन योजनाओं, छात्रवृत्ति, शादी-विवाह अनुदान एवं उत्पीड़न संबंधी शिकायतों, महिला कल्याण में दहेज प्रथा से पीड़ित महिलाओं को आर्थिक सहायता, दंपती पुरस्कार व विकलांग कल्याण के पुनर्वास, ऋण, विवाह अनुदान योजना की सेवाओं को शामिल किया गया है।