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Sultanpur News: पुणे से सुल्तानपुर पधार रहे दगडूसेठ गणपति बप्पा
Fri, 11 Sep 2026 12:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Fri, 11 Sep 2026 12:39 AM IST
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सुल्तानपुर। शहर में इस बार गणेशोत्सव का आयोजन खास होने जा रहा है। पहली बार पुणे के प्रसिद्ध श्रीमंत दगडूसेठ हलवाई गणपति बप्पा की प्रतिमा यहां विराजमान होगी। 14 सितंबर से शुरू होने वाले उत्सव के लिए श्री प्रथम गणेश पूजा समिति ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 10 दिन तक चलने वाले महोत्सव के लिए शुक्रवार से पंडाल सजाने का काम शुरू होगा। उत्सव में मराठी समाज के लोग भी सक्रिय भागीदारी करेंगे।
समिति के अध्यक्ष सिद्धू काले ने बताया कि पांच फीट की प्रतिमा पुणे से विशेष रूप से मंगाई जा रही है। प्रतिमा की लागत 45 हजार रुपये है। प्रतिदिन सुबह नौ बजे और शाम आठ बजे पूजा-अर्चना होगी। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और पूजन की व्यवस्था रहेगी। समिति ने शहरवासियों से सपरिवार पहुंचकर गणपति बप्पा के दर्शन करने की अपील की है।
मेजरगंज में 1974 में रखी गई थी पहली प्रतिमा
महाराष्ट्र के बालकृष्ण पुजारी वर्ष 1970 में व्यापार के सिलसिले में सुल्तानपुर आए थे। उन्होंने यहां सराफा कारोबार शुरू किया। कारोबार बढ़ने पर महाराष्ट्र से अन्य लोगों को यहां बुलाया। बताया कि वर्ष 1974 में उन्होंने शहर के मेजरगंज में पहली बार गणेश उत्सव कराया। इसी के साथ श्री प्रथम गणेश पूजा समिति की नींव पड़ी। बालकृष्ण पुजारी समिति के संस्थापक हैं।
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12 मराठी परिवारों में उत्सव को लेकर उत्साह
सिद्धू काले के अनुसार, वर्तमान में शहर में करीब 12 मराठी परिवार रहते हैं। इनमें लगभग 40 लोग शामिल हैं। समिति के आयोजन में इन परिवारों का विशेष सहयोग रहेगा। इस बार पुणे के प्रसिद्ध दगडूसेठ गणपति की प्रतिमा आने से उत्सव को लेकर मराठी समाज के साथ स्थानीय श्रद्धालुओं में भी उत्साह है।
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समिति के अध्यक्ष सिद्धू काले ने बताया कि पांच फीट की प्रतिमा पुणे से विशेष रूप से मंगाई जा रही है। प्रतिमा की लागत 45 हजार रुपये है। प्रतिदिन सुबह नौ बजे और शाम आठ बजे पूजा-अर्चना होगी। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और पूजन की व्यवस्था रहेगी। समिति ने शहरवासियों से सपरिवार पहुंचकर गणपति बप्पा के दर्शन करने की अपील की है।
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मेजरगंज में 1974 में रखी गई थी पहली प्रतिमा
महाराष्ट्र के बालकृष्ण पुजारी वर्ष 1970 में व्यापार के सिलसिले में सुल्तानपुर आए थे। उन्होंने यहां सराफा कारोबार शुरू किया। कारोबार बढ़ने पर महाराष्ट्र से अन्य लोगों को यहां बुलाया। बताया कि वर्ष 1974 में उन्होंने शहर के मेजरगंज में पहली बार गणेश उत्सव कराया। इसी के साथ श्री प्रथम गणेश पूजा समिति की नींव पड़ी। बालकृष्ण पुजारी समिति के संस्थापक हैं।
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12 मराठी परिवारों में उत्सव को लेकर उत्साह
सिद्धू काले के अनुसार, वर्तमान में शहर में करीब 12 मराठी परिवार रहते हैं। इनमें लगभग 40 लोग शामिल हैं। समिति के आयोजन में इन परिवारों का विशेष सहयोग रहेगा। इस बार पुणे के प्रसिद्ध दगडूसेठ गणपति की प्रतिमा आने से उत्सव को लेकर मराठी समाज के साथ स्थानीय श्रद्धालुओं में भी उत्साह है।