{"_id":"59c932054f1c1bae538b459d","slug":"new-trauma-building-gets-cracks","type":"story","status":"publish","title_hn":"शुरू होने से पहले ही ट्रॉमा सेंटर भवन में दरारें","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
शुरू होने से पहले ही ट्रॉमा सेंटर भवन में दरारें
Amarujala Bureau
Updated Mon, 25 Sep 2017 10:12 PM IST
विज्ञापन
अफसरों में हड़कंप
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांच जिलों की सुविधा के लिए हाईवे पर खोला गया ट्रॉमा सेंटर विधिवत शुरू भी नहीं हो सका था कि भवन में दरारें आ गईं। भवन में दरारें आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। एक करोड़ 19 लाख रुपये की लागत से तैयार हुए ट्रॉमा सेंटर में आईं दरारें छिपाने के लिए स्वास्थ्य महकमा हर तरह के हथकंडे अपना रहा है।
विज्ञापन
प्रति वर्ष इलाहाबाद-फैजाबाद और लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सैकड़ों लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल होते हैं। इनमें ज्यादातर समय पर उचित उपचार न मिल पाने से मौत के शिकार हो जाते हैं। हाईवे पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को शासन ने गंभीरता से लेते हुए सुल्तानपुर जिले में जनपद स्तरीय ट्रॉमा सेंटर खोले जाने की मंशा जताई थी।
विज्ञापन
आसपास के पांच जिले के लोगों को इसका लाभ मिलता। इसी कड़ी में शासन ने वर्ष 2013-14 में एक करोड़ 19 लाख 26 हजार रुपये की लागत से अमहट के पास स्वास्थ्य विभाग की 7,000 वर्गफुट भूमि पर ट्रॉमा सेंटर खोले जाने को स्वीकृति दी थी। ट्रॉमा सेंटर बनाने के लिए कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने जनवरी 2014 में कार्य शुरू किया था। संस्था की ओर से कार्य समाप्ति की तिथि जून 2015 नियत की गई थी लेकिन समय पर ट्रॉमा सेंटर का निर्माण पूरा नहीं हो सका था।
विज्ञापन
वर्ष 2017 के शुरुआती महीने में ट्रॉमा सेंटर बनकर तैयार हो गया। उसके बाद कार्यदायी संस्था ने ट्रॉमा सेंटर को स्वास्थ्य विभाग को सौंप भी दिया। मौजूदा समय में ट्रॉमा सेंटर के भवन की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। पिलर हो या फिर कमरा कई स्थानों पर पड़ी दरारें कार्यदायी संस्था की ओर से कराए गए निर्माण पर सवाल उठा रही हैं।