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हैरान करने वाला है गायत्री का हैसियत सफरनामा

Wed, 15 Mar 2017 10:21 PM IST
Amarujala Bureau
Amarujala Bureau Updated Wed, 15 Mar 2017 10:21 PM IST
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Gayatri made crores in few years
घर और दफ्तर पर सन्नाटा - फोटो : अमर उजाला

गैंगरेप और पॉक्सो एक्ट में फंसे पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की सियासी और आर्थिक हैसियत का सफरनामा हैरान करने वाला है। महज डेढ़ दशक पहले तक बीपीएल कार्ड धारक रह चुके गायत्री इस दौरान न केवल सूबे की सियासत में जाना-माना चेहरा बन गए बल्कि अरबपतियों में शुमार होने लगे। उनका ऐसा रसूख कायम हुआ कि रिश्तेदारों से लेकर चहेते तक लाखों-करोड़ों में खेलने लगे। 

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अमेठी से सटे परसावां गांव में जन्मे गायत्री प्रसाद प्रजापति का बचपन और जवानी के शुरुआती दिन मुफलिसी में गुजरे। खेतीबाड़ी कुछ खास नहीं थी। पिता चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करते थे। 1993 में गायत्री ने अमेठी से बहुजन क्रांति दल के टिकट पर चुनाव लड़ा। चुनाव में उन्हें भले ही 1526 मत मिले लेकिन गांव से बाहर तक उनकी थोड़ी पहचान बढ़ी। 1996 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़कर वे तीसरे स्थान पर रहे।
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2002 में भी सपा ने उन्हें मैदान में उतारा लेकिन उसमें भी शिकस्त का मुंह देखना पड़ा। इस दौरान वे छोटे-मोटे धंधे में लगे रहे। खासतौर पर वे निर्माणाधीन सरकारी आवासों में पेंटिंग का ठेका लेते थे। 2007 में उन्होंने सपा से फिर टिकट का दावा किया लेकिन पार्टी ने उन्हें मौका नहीं दिया। यह नाकामी ही गायत्री की हैसियत की टर्निंग पॉइंट साबित हुई। उन्होंने खाली वक्त को अपनी आर्थिक हैसियत सुधारने में लगाया। वे प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे में उतरे। यह धंधा उन्हें रास आ गया। दिन दूना रात चौगुना उनकी हैसियत बढ़ती गई। इस दौरान वे सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के संपर्क में भी बने रहे।
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2012 के चुनाव में उन्हें सपा ने मैदान में उतारा और जीतकर विधानसभा पहुंच गए। वे सूबे की सरकार में मंत्री बने। मंत्री बनने के बाद उनका आर्थिक साम्राज्य खड़ा हो गया। पांच साल के भीतर ही वे अरबपतियों में शुमार होने लगे। उनके रिश्तेदार और चहेते तक लाखों में खेलने लगे। इस बीच गायत्री से लेकर उनके बेटे और चहेतों पर तरह-तरह के आरोप लगते रहे। इसके बावजूद गायत्री के रसूख के दम पर किसी का बाल तक बांका नहीं हुआ। बात दीगर है कि सत्ता की हनक कम होते ही उन्हें और उनके चहेतों को सलाखों के पीछे जाना पड़ा। पुराने मामले खुले तो उनके परिवारीजनों व अन्य चहेतों पर भी कानून का शिकंजा कस सकता है।

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