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अधिग्रहीत भूमि पर उगाई 232 किसानों की फसल जब्त

Sat, 09 Apr 2016 10:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर Updated Sat, 09 Apr 2016 10:44 PM IST
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232 farmers grow crops on the acquired land seized
कब्जे में ली गई गेहूं की खड़ी व कटी फसल - फोटो : अमर उजाला
स्थायी कलेक्ट्रेट के लिए अधिग्रहीत भूमि का मालिकाना हक बदलने के बावजूद उस पर खेती करना 232 किसानों को भारी पड़ा। एसडीएम के आदेश पर शनिवार को नायब तहसीलदार के नेतृत्व में पहुंची राजस्व टीम ने भूमि पर खड़ी व काटकर रखी गई गेहूं व अन्य फसल को कब्जे में ले लिया। फसल को कब्जे में लेने के बाद प्रशासन जहां इसे नीलाम करने की तैयारी में जुटा है वहीं लंबी लागत लगाकर खेती करने वाले किसानों में हड़कंप मचा है। फसल काटकर घर ले जा चुके किसानों के खिलाफ प्रशासन केस भी दर्ज कराएगा। 
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जिला प्रशासन के आदेश पर स्थानीय तहसील प्रशासन ने अमेठी जनपद के कलेक्ट्रेट, दीवानी न्यायालय व एसपी कार्यालय के साथ सूचना संकुल बनाने के लिए शहर से सटे जामों रोड स्थित विशुनदासपुर गांव में 36.52 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की। प्रशासन की ओर से मुआवजा वितरण व पुनर्वास के साथ अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद जमीन पर सभी 232 किसानों ने खेती करना बंद नहीं किया।
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रबी के मौसम में भी किसानों ने अधिग्रहीत भूमि पर गेहूं, मटर व सरसों की फसल बोई थी। शनिवार को एसडीएम वंदिता श्रीवास्तव के आदेश पर नायब तहसीलदार नीलम उपाध्याय के नेतृत्व में अधिग्रहीत भूमि पर पहुंची राजस्व टीम ने किसानों को गेहूं काटने से मना किया। इतना ही नहीं टीम ने खड़ी गेहूं की फसल के साथ अधिकांश खेतों में काटकर रखी गई फसल को कब्जे में ले लिया। कब्जा दिखाने के लिए प्रशासन ने फसल के चारों तरफ लाल झंडियां गड़वा दीं। फसल को
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कब्जे में लेने के बाद जहां प्रशासन इसे नीलाम करने की तैयारी में है वहीं लंबी लागत लगाकर फसल बोने के बाद इस पर मालिकाना हक समाप्त होने से प्रभावित किसानों में हड़कंप मचा है।

करीब 16.5 लाख की थी फसल
तहसील प्रशासन ने शनिवार को किसानों की ओर से बोई गई जिस फसल को कब्जे में लेकर नीलामी प्रक्रिया शुरू की वह करीब 16.5 लाख रुपये की बताई जा रही है। किसानों के मुताबिक यह आंकड़ा सरकार की ओर से गेहूं, मटर व सरसों के घोषित समर्थन मूल्य के आधार पर निकाला गया है।

छह माह पूर्व कलेक्ट्रेट के नाम दर्ज हुई थी भूमि
करीब छह वर्ष पूर्व गठित जिले में कलेक्ट्रेट निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की कवायद बीते अगस्त माह में पूरी हुई थी। 31 अगस्त 2015 को गौरीगंज-जगदीशपुर मार्ग स्थित विशुनदासपुर गांव के 110 खातों से 36.52 हेक्टेयर भूमि को खतौनी में दर्ज किसानों के नाम से खारिज कर सरकार के नाम दर्ज की गई थी।

प्रशासन ने कराई थी बेरिकेडिंग
एसडीएम वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि अधिग्रहीत भूमि 232 किसानों से ली गई थी। प्रभावित किसानों में सर्किल रेट के चार गुना की दर से 13 करोड़ रुपये मुआवजा व पुनर्वास योजना के तहत 3.68 करोड़ रुपये वितरित किए गए। 232 किसानों में 190 किसानों ने मुआवजा लिया था जिन 42 किसानों ने मुआवजा नहीं लिया उनकी राशि आरडी (रेवन्यू डिपॉजिट) के रूप में कोषागार में जमा है। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद प्रशासन ने संपूर्ण भूमि की बेरिकेडिंग भी कराई है।

नहीं मिली कोई लिखित नोटिस
विशुनदासपुर के किसान रामबहोर मिश्र, त्रिवेणी शंकर व अन्य किसानों ने प्रशासन की इस कार्रवाई को गलत बताया। कहा कि न तो उन्हें भूमि का मुआवजा मिला है न ही उन्हें फसल बोने से मनाही के संबंध में कोई नोटिस ही मिली है। किसानों का कहना था कि प्रशासन की ओर से की गई इस एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ वे न्यायालय की शरण लेंगे। 


किसानों पर दर्ज होगा केस : एसडीएम
एसडीएम वंदिता श्रीवास्तव ने कहा कि भूमि अधिग्रहीत करने के साथ ही सभी किसानों को लिखित नोटिस तामील कराने के अलावा मौखिक रूप से फसल बोने से मना किया गया था। ऐसे सभी किसानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी जो अधिग्रहीत भूमि पर बोई गई फसल काटकर घर ले जा चुके हैं।
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