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एएमयू : पूर्वोत्तर की शिक्षिका का ऑनलाइन उत्पीड़न, क्षेत्रीय टिप्पणियों पर रिपोर्ट दर्ज
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प्रतीकात्मक फोटो
- फोटो : Archive
एएमयू में पूर्वोत्तर भारत से ताल्लुक रखने वाली एक शिक्षिका को सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने का मामला सामने आया है। कुछ खुराफाती तत्वों ने उनके खिलाफ अपमानजनक और क्षेत्रीय वैमनस्य वाली टिप्पणियां की हैं। शिक्षिका ने थाना सिविल लाइन में रिपोर्ट दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।
शिकायत के अनुसार, आरोपी लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शिक्षिका के खिलाफ झूठी सामग्री परोस रहे थे। उनके व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों का सार्वजनिक रूप से उपहास उड़ाया गया। इस साइबर बुलिंग से शिक्षिका को भारी मानसिक तनाव और सामाजिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है।
यह मामला केवल व्यक्तिगत उत्पीड़न तक सीमित नहीं है। इसमें क्षेत्रीय भेदभाव का खतरनाक पहलू भी सामने आया है। पीड़िता के गृह राज्य असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत के लोगों को निशाना बनाया गया। आरोप है कि यह सब एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
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खुद को असुरक्षित महसूस कर रही शिक्षिका ने प्रॉक्टर कार्यालय के जरिये पुलिस को प्रार्थना पत्र दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पेजों से जुड़े असामाजिक तत्वों की पहचान कर गिरफ्तारी की मांग की है। सभी आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत हटवाने और संबंधित अकाउंट्स को निलंबित करने की भी मांग की गई। पीड़िता ने आरोपियों से सार्वजनिक रूप से लिखित माफी की भी अपेक्षा की है। भविष्य के लिए अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और साइबर उत्पीड़न के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग भी की गई।
सीओ तृतीय सर्वम सिंह के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। साइबर सेल की मदद से आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट खंगाले जा रहे हैं।
.............................
शिक्षिका के लिए बेहद गलत शब्दों का प्रयोग करते हुए क्षेत्रीय आधार पर टिप्पणी की गई। शिक्षिका की शिकायत को थाना सिविल लाइन भेजा गया। वहां केस दर्ज कर लिया गया है। - प्रो. मोहम्मद नवेद, प्रॉक्टर, एएमयू
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शिकायत के अनुसार, आरोपी लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शिक्षिका के खिलाफ झूठी सामग्री परोस रहे थे। उनके व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों का सार्वजनिक रूप से उपहास उड़ाया गया। इस साइबर बुलिंग से शिक्षिका को भारी मानसिक तनाव और सामाजिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है।
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यह मामला केवल व्यक्तिगत उत्पीड़न तक सीमित नहीं है। इसमें क्षेत्रीय भेदभाव का खतरनाक पहलू भी सामने आया है। पीड़िता के गृह राज्य असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत के लोगों को निशाना बनाया गया। आरोप है कि यह सब एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
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खुद को असुरक्षित महसूस कर रही शिक्षिका ने प्रॉक्टर कार्यालय के जरिये पुलिस को प्रार्थना पत्र दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पेजों से जुड़े असामाजिक तत्वों की पहचान कर गिरफ्तारी की मांग की है। सभी आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत हटवाने और संबंधित अकाउंट्स को निलंबित करने की भी मांग की गई। पीड़िता ने आरोपियों से सार्वजनिक रूप से लिखित माफी की भी अपेक्षा की है। भविष्य के लिए अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और साइबर उत्पीड़न के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग भी की गई।
सीओ तृतीय सर्वम सिंह के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। साइबर सेल की मदद से आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट खंगाले जा रहे हैं।
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शिक्षिका के लिए बेहद गलत शब्दों का प्रयोग करते हुए क्षेत्रीय आधार पर टिप्पणी की गई। शिक्षिका की शिकायत को थाना सिविल लाइन भेजा गया। वहां केस दर्ज कर लिया गया है। - प्रो. मोहम्मद नवेद, प्रॉक्टर, एएमयू