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एमपी ने जीती रणजी ट्रॉफी, कुवांसी में जश्न
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जीत के बाद खुशी मनाते लोग।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। मध्य प्रदेश की टीम ने पहली बार रणजी ट्रॉफी जीत कर इतिहास रचा और इतराने का मौका सुल्तानपुर जिले के कुवांसी गांव को दे दिया। दरअसल मध्य प्रदेश की टीम में शामिल कुमार कार्तिकेय जिले के कुवांसी गांव के हैं। मध्य प्रदेश की जीत में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है। मैच जीतते ही कुवांसी में गांव में मिठाइयां बांटी गईं। युवाओं ने पटाखे फोड़े। एक-दूसरे को बधाइयां दी।
मध्य प्रदेश की टीम से खेल रहे बल्दीराय क्षेत्र के कुवांसी गांव निवासी कुमार कार्तिकेय इस सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में दूसरे नंबर पर रहे। उन्होंने छह मैचों की 11 पारियों में 32 विकेट अपने नाम किए। इस दौरान एक पारी में उन्होंने 50 रन देकर छह विकेट लेने का कारनामा भी किया। वहीं, मैच में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 128 रन देकर आठ विकेट रहा। उन्होंने 21 के औसत और 2.27 के इकोनॉमी रेट से गेंदबाजी की। बंगलुरु में हुए रणजी ट्रॉफी के फाइनल में मुंबई के पांच अहम विकेट कार्तिकेय ने लिए।
रणजी ट्रॉफी के फाइनल मैच को लेकर कुवांसी गांव में काफी उत्साह रहा। लोग टीवी पर लगातार जमे रहे। कुमार कार्तिकेय के विकेट लेने पर तालियां बजती रहीं। मध्य प्रदेश के मैच जीतते ही लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां बांटी। उत्साही युवाओं ने पटाखे भी फोड़े। इस मौके पर जयेंद्र सिंह, रामचंद्र सिंह, रंजीत सिंह, अमरेश सिंह, श्यामधर सिंह, रघुनाथ सिंह, शोभनाथ सिंह, धर्मेश सिंह, रूपेश सिंह, शुभम सिंह, शिवम सिंह समेत कई ग्रामवासी मौजूद रहे।
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पिता बोले, इंडियन टीम की जर्सी में देखने का सपना
कुमार कार्तिकेय के पिता श्यामनाथ सिंह पीएसी में तैनात हैं। झांसी में तैनात श्यामनाथ सिंह ने फोन पर बात करते हुए बताया कि कार्तिकेय में क्रिकेट के प्रति इतना जुनून था कि वह खाना-पीना भूल जाता था। कानपुर में तैनाती के दौरान क्रिकेट ग्राउंड पर कभी-कभी मुझे या कार्तिकेय की मम्मी को खाना लेकर जाना पड़ता था। एक स्टंप लगाकर लगातार गेंदबाजी की प्रैक्टिस करना उसकी दिनचर्या थी। उनका सपना है कि कार्तिकेय टीम इंडिया की जर्सी में देश का नेतृत्व करे।
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मध्य प्रदेश की टीम से खेल रहे बल्दीराय क्षेत्र के कुवांसी गांव निवासी कुमार कार्तिकेय इस सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में दूसरे नंबर पर रहे। उन्होंने छह मैचों की 11 पारियों में 32 विकेट अपने नाम किए। इस दौरान एक पारी में उन्होंने 50 रन देकर छह विकेट लेने का कारनामा भी किया। वहीं, मैच में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 128 रन देकर आठ विकेट रहा। उन्होंने 21 के औसत और 2.27 के इकोनॉमी रेट से गेंदबाजी की। बंगलुरु में हुए रणजी ट्रॉफी के फाइनल में मुंबई के पांच अहम विकेट कार्तिकेय ने लिए।
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रणजी ट्रॉफी के फाइनल मैच को लेकर कुवांसी गांव में काफी उत्साह रहा। लोग टीवी पर लगातार जमे रहे। कुमार कार्तिकेय के विकेट लेने पर तालियां बजती रहीं। मध्य प्रदेश के मैच जीतते ही लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां बांटी। उत्साही युवाओं ने पटाखे भी फोड़े। इस मौके पर जयेंद्र सिंह, रामचंद्र सिंह, रंजीत सिंह, अमरेश सिंह, श्यामधर सिंह, रघुनाथ सिंह, शोभनाथ सिंह, धर्मेश सिंह, रूपेश सिंह, शुभम सिंह, शिवम सिंह समेत कई ग्रामवासी मौजूद रहे।
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कुमार कार्तिकेय के पिता श्यामनाथ सिंह पीएसी में तैनात हैं। झांसी में तैनात श्यामनाथ सिंह ने फोन पर बात करते हुए बताया कि कार्तिकेय में क्रिकेट के प्रति इतना जुनून था कि वह खाना-पीना भूल जाता था। कानपुर में तैनाती के दौरान क्रिकेट ग्राउंड पर कभी-कभी मुझे या कार्तिकेय की मम्मी को खाना लेकर जाना पड़ता था। एक स्टंप लगाकर लगातार गेंदबाजी की प्रैक्टिस करना उसकी दिनचर्या थी। उनका सपना है कि कार्तिकेय टीम इंडिया की जर्सी में देश का नेतृत्व करे।