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Sultanpur News: चंद्रप्रकाश मिश्र केले की खेती से बन गए केला मिसिर
Sun, 20 Jul 2025 11:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sun, 20 Jul 2025 11:42 PM IST
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भदैंया के हनुमानगंज में केले की बागवानी दिखाते चंद्र प्रकाश मिश्र।
भदैया (सुल्तानपुर)। लगातार मेहनत, नई तकनीक और उद्यान विभाग से तालमेल के बूते रामपुर हनुमानगंज गांव के चंद्रप्रकाश मिश्र आज क्षेत्र में केला मिसिर के नाम से मशहूर हो गए हैं। करीब 29 वर्षों से केले की खेती कर रहे चंद्रप्रकाश ने 1996 में केवल एक बीघा जमीन से इसकी शुरुआत की थी और अब 15 बीघे में केले की बागवानी कर रहे हैं। इस बार की फसल से उन्हें करीब 15 लाख रुपये की आमदनी की उम्मीद है।
चंद्रप्रकाश मिश्र ने बताया कि उन्होंने जी-9 वेरायटी के 1600 पौधे इस बार लगाए हैं। इसके अलावा पुरानी फसलें भी तैयार हैं। वह टिशू कल्चर विधि से केले की आधुनिक खेती कर रहे हैं। जिससे न केवल बेहतर उत्पादन मिल रहा है, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। उद्यान विभाग की निगरानी और तकनीकी सहयोग से उनकी खेती नकदी फसल का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है। चंद्रप्रकाश के मुताबिक जब फसल तैयार होती है तो मंडी के व्यापारी खुद खेत पर पहुंच जाते हैं। एक बीघे में 1 से 1.5 लाख रुपये तक का मुनाफा हो जाता है। इस बार केलों में 40 से 45 किलो की घार तैयार हुई है। फसल की बिक्री 1200 से 1650 रुपये प्रति क्विंटल तक हो जाती है। फिलहाल मंडी में केले का रेट 1800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुका है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं केला मिसिर
2018 में चंद्रप्रकाश ने आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा के लिए खेत की बैरीकेडिंग कराई थी। उन्होंने केले की आमदनी से ही चार लाख रुपये खर्च कर लोहे के एंगल और तार से चारों ओर घेराबंदी की। अब उनकी फसल पूरी तरह सुरक्षित है। चंद्रप्रकाश मिश्र न केवल स्थानीय किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, बल्कि क्षेत्र में खेती के नए रास्ते दिखाने का भी काम कर रहे हैं। उन्हें देखकर कई युवाओं ने केले की खेती शुरू की है।
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चंद्रप्रकाश मिश्र ने बताया कि उन्होंने जी-9 वेरायटी के 1600 पौधे इस बार लगाए हैं। इसके अलावा पुरानी फसलें भी तैयार हैं। वह टिशू कल्चर विधि से केले की आधुनिक खेती कर रहे हैं। जिससे न केवल बेहतर उत्पादन मिल रहा है, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। उद्यान विभाग की निगरानी और तकनीकी सहयोग से उनकी खेती नकदी फसल का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है। चंद्रप्रकाश के मुताबिक जब फसल तैयार होती है तो मंडी के व्यापारी खुद खेत पर पहुंच जाते हैं। एक बीघे में 1 से 1.5 लाख रुपये तक का मुनाफा हो जाता है। इस बार केलों में 40 से 45 किलो की घार तैयार हुई है। फसल की बिक्री 1200 से 1650 रुपये प्रति क्विंटल तक हो जाती है। फिलहाल मंडी में केले का रेट 1800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुका है।
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युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं केला मिसिर
2018 में चंद्रप्रकाश ने आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा के लिए खेत की बैरीकेडिंग कराई थी। उन्होंने केले की आमदनी से ही चार लाख रुपये खर्च कर लोहे के एंगल और तार से चारों ओर घेराबंदी की। अब उनकी फसल पूरी तरह सुरक्षित है। चंद्रप्रकाश मिश्र न केवल स्थानीय किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, बल्कि क्षेत्र में खेती के नए रास्ते दिखाने का भी काम कर रहे हैं। उन्हें देखकर कई युवाओं ने केले की खेती शुरू की है।
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