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Sultanpur News: पीतल के बर्तनों ने बिखेरी चमक, बढ़ी बिक्री
Tue, 02 Dec 2025 11:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Tue, 02 Dec 2025 11:17 PM IST
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ठठरीबाजार में दुकान पर साफ करने के लिए रखे गए पीतल के बर्तन।
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सुल्तानपुर। आधुनिक दौर में स्टील और एल्युमिनियम के बर्तन भले ही घरों में दिखते हों, लेकिन लोग इनसे दूरी बनाने लगे हैं। मौजूदा समय में लोगों का रुझान एक बार फिर पारंपरिक फूल (तांबा) और पीतल के बर्तनों की ओर बढ़ा है। इस बार सहालग में पीतल के बर्तनों की जमकर बिक्री हुई, इसके अलावा लोग घर में प्रयोग करने के लिए भी इन बर्तनों को खरीद रहे हैं। बर्तन बाजार गुलजार रहने से दुकानदारों के चेहरे पर मुस्कान है।
फूल (तांबा) और पीतल के बर्तन की बढ़ती मांग का असर कीमतों पर भी दिख रहा है। पिछले वर्ष जहां पीतल के पुराने बर्तन 450 रुपये प्रति किलो खरीदे जाते थे। इस बार कीमत बढ़कर 550 रुपये किलो तक पहुंच गई है। एक साल में लगभग 100 रुपये किलो की वृद्धि हुई है। मौजूदा समय में पीतल 750 रुपये किलो, तो फूल के बर्तन 1050 रुपये किलो तक बिक रहा है।
कारोबारियों का कहना है कि रोजमर्रा प्रयोग में आने वाले बर्तनों की सबसे अधिक मांग है। इसमें लोटा, थाली, गिलास और कटोरा प्रमुख हैं। दुकान संचालक पवन कसौधन व गणेश अग्रहरि ने बताया कि काफी समय के बाद फूल-पीतल के बाजार में ऐसी रौनक देखने को मिल रही है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मांग और अधिक बढ़ेगी। शहर के विजय सिंह ने बताया कि पहले घर में एल्युमिनियम के बर्तन का उपयोग होता था।
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चिकित्सक ने इससे नुकसान बताया, तो अब पीतल के बर्तन का उपयोग करने लगे। अजय पांडेय ने बताया कि पीतल के गिलास में पानी पीने से राहत महसूस होती है। भोजन बनाने से लेकर खाने के लिए तांबा व पीतल के बर्तन का उपयोग करते हैं।
पीतल व तांबे के बर्तन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक
मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. आरपी द्विवेदी ने बताया कि पीतल व तांबे के बर्तन स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक हैं। इसमें पानी व भोजन तैयार करने पर पाचन संबंधी बीमारी से निजात मिलती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि, पित्त संबंधी बीमारी से छुटकारा मिलता है। हीमोग्लोबिन में सुधार होता है।
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फूल (तांबा) और पीतल के बर्तन की बढ़ती मांग का असर कीमतों पर भी दिख रहा है। पिछले वर्ष जहां पीतल के पुराने बर्तन 450 रुपये प्रति किलो खरीदे जाते थे। इस बार कीमत बढ़कर 550 रुपये किलो तक पहुंच गई है। एक साल में लगभग 100 रुपये किलो की वृद्धि हुई है। मौजूदा समय में पीतल 750 रुपये किलो, तो फूल के बर्तन 1050 रुपये किलो तक बिक रहा है।
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कारोबारियों का कहना है कि रोजमर्रा प्रयोग में आने वाले बर्तनों की सबसे अधिक मांग है। इसमें लोटा, थाली, गिलास और कटोरा प्रमुख हैं। दुकान संचालक पवन कसौधन व गणेश अग्रहरि ने बताया कि काफी समय के बाद फूल-पीतल के बाजार में ऐसी रौनक देखने को मिल रही है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मांग और अधिक बढ़ेगी। शहर के विजय सिंह ने बताया कि पहले घर में एल्युमिनियम के बर्तन का उपयोग होता था।
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चिकित्सक ने इससे नुकसान बताया, तो अब पीतल के बर्तन का उपयोग करने लगे। अजय पांडेय ने बताया कि पीतल के गिलास में पानी पीने से राहत महसूस होती है। भोजन बनाने से लेकर खाने के लिए तांबा व पीतल के बर्तन का उपयोग करते हैं।
पीतल व तांबे के बर्तन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक
मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. आरपी द्विवेदी ने बताया कि पीतल व तांबे के बर्तन स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक हैं। इसमें पानी व भोजन तैयार करने पर पाचन संबंधी बीमारी से निजात मिलती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि, पित्त संबंधी बीमारी से छुटकारा मिलता है। हीमोग्लोबिन में सुधार होता है।