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सहालग में चमका प्रतिबंधित पॉलिथीन का कारोबार
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सुल्तानपुर। सहालग में एक बार फिर प्रतिबंधित पॉलिथीन का कारोबार चमक गया है। हालत यह है कि पूरे जिले में करीब एक टन पॉलिथीन की खपत हो रही है। शादी-विवाह समारोह की शुरुआत होने से मार्केट में प्लास्टिक से बने गिलास, प्लेट की डिमांड भी बढ़ गई है।
प्रदेश भर में 50 माइक्रॉन से कम वाली पॉलिथीन पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया है। पॉलिथीन के साथ ही प्लास्टिक से बने डिस्पोजल कटोरी, ग्लास, चम्मच आदि भी बैन किए गए हैं। जनपद में पॉलिथीन की कोई फैक्टरी नहीं है लेकिन यहां कानपुर व दिल्ली से पॉलिथीन मंगाई जाती है।
यहां फुटपाथ और किराना व्यवसायी ज्यादातर 50 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन का प्रयोग कर रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार हर घर में रोज करीब 10 से 12 प्रतिबंधित (50 माइक्रॉन से कम) पॉलिथीन पहुंचती है। जनपद में पॉलिथीन की बिक्री करने वाले व्यापारियों ने बताया कि पॉलिथीन व प्लास्टिक उत्पाद मिलाकर करीब एक टन की बिक्री की जाती है।
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बृहस्पतिवार से सहालग का दौर शुरू हो रहा है। अगले महीने तक बड़ी संख्या में वैवाहिक कार्यक्रम व शादी समारोह के आयोजन लगातार होंगे। कुछ तिथियों पर शादी व वैवाहिक आयोजनों की भरमार है। इसको लेकर भी मार्केट में पॉलिथीन व अन्य प्लास्टिक के सामानों की डिमांड बढ़ी है।
दुकानदारों ने बताया कि शादी-विवाह को लेकर प्लास्टिक के सामान के ऑर्डर मिलने लगे हैं। शहर में शादी समारोह के आयोजन के बाद मैरिज लॉन के बाहर कचरे का ढेर लग जाता है। इसमें प्रतिबंधित गिलास, प्लेट व अन्य सामान इस्तेमाल के बाद कचरे के रूप में फेंक दिए जाते हैं। इससे प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
50 माइक्रॉन से पतली पॉलिथीन के प्रयोग को प्रतिबंधित करने के निर्देश शासन से दिए गए हैं। रोक के बाद भी जिले में पानी के पाउच, सब्जियों की पैकिंग, दूध व कपड़ों की बिक्री पतली पॉलिथीन में की जा रही है। फुटपाथ पर चाय की दुकानों पर चाय के अलावा अन्य खाद्य सामग्री भी पॉलिथीन में ही दी जा रही है।
जिले में कानपुर समेत कुछ अन्य शहरों से पॉलिथीन की आपूर्ति ली जाती है। जिले में मौजूदा समय में 20 टन से अधिक पॉलिथीन डंप है। शहर में ही करीब 11 व्यापारी प्लास्टिक एवं पॉलिथीन के थोक व्यवसाय में लगे हैं।
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प्रदेश भर में 50 माइक्रॉन से कम वाली पॉलिथीन पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया है। पॉलिथीन के साथ ही प्लास्टिक से बने डिस्पोजल कटोरी, ग्लास, चम्मच आदि भी बैन किए गए हैं। जनपद में पॉलिथीन की कोई फैक्टरी नहीं है लेकिन यहां कानपुर व दिल्ली से पॉलिथीन मंगाई जाती है।
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यहां फुटपाथ और किराना व्यवसायी ज्यादातर 50 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन का प्रयोग कर रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार हर घर में रोज करीब 10 से 12 प्रतिबंधित (50 माइक्रॉन से कम) पॉलिथीन पहुंचती है। जनपद में पॉलिथीन की बिक्री करने वाले व्यापारियों ने बताया कि पॉलिथीन व प्लास्टिक उत्पाद मिलाकर करीब एक टन की बिक्री की जाती है।
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बृहस्पतिवार से सहालग का दौर शुरू हो रहा है। अगले महीने तक बड़ी संख्या में वैवाहिक कार्यक्रम व शादी समारोह के आयोजन लगातार होंगे। कुछ तिथियों पर शादी व वैवाहिक आयोजनों की भरमार है। इसको लेकर भी मार्केट में पॉलिथीन व अन्य प्लास्टिक के सामानों की डिमांड बढ़ी है।
दुकानदारों ने बताया कि शादी-विवाह को लेकर प्लास्टिक के सामान के ऑर्डर मिलने लगे हैं। शहर में शादी समारोह के आयोजन के बाद मैरिज लॉन के बाहर कचरे का ढेर लग जाता है। इसमें प्रतिबंधित गिलास, प्लेट व अन्य सामान इस्तेमाल के बाद कचरे के रूप में फेंक दिए जाते हैं। इससे प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
50 माइक्रॉन से पतली पॉलिथीन के प्रयोग को प्रतिबंधित करने के निर्देश शासन से दिए गए हैं। रोक के बाद भी जिले में पानी के पाउच, सब्जियों की पैकिंग, दूध व कपड़ों की बिक्री पतली पॉलिथीन में की जा रही है। फुटपाथ पर चाय की दुकानों पर चाय के अलावा अन्य खाद्य सामग्री भी पॉलिथीन में ही दी जा रही है।
जिले में कानपुर समेत कुछ अन्य शहरों से पॉलिथीन की आपूर्ति ली जाती है। जिले में मौजूदा समय में 20 टन से अधिक पॉलिथीन डंप है। शहर में ही करीब 11 व्यापारी प्लास्टिक एवं पॉलिथीन के थोक व्यवसाय में लगे हैं।