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Sultanpur News: खराब हो रही हवा, अस्थमा मरीजों की बढ़ी परेशानी
Fri, 26 Sep 2025 12:56 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Fri, 26 Sep 2025 12:56 AM IST
सार
सुल्तानपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 83 पर पहुंच गया है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह हवा सांस लेने पर कई सिगरेट पीने जितनी हानिकारक है। बच्चे, बुजुर्ग और मरीज विशेष सतर्कता बरतें।
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मेडिकल कॉलेज में दवा लेने के लिए कतार में लगे मरीज।
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विस्तार
सुल्तानपुर। जिले की हवा इन दिनों स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होती जा रही है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 0 से 50 तक बेहतर माना जाता है, लेकिन वर्तमान में यह 83 पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी खराब हवा सांस लेने पर तीन से चार सिगरेट पीने के बराबर नुकसान पहुंचा रही है।
इस स्तर की हवा दिल, फेफड़े और अस्थमा के मरीजों के लिए विशेष रूप से नुकसानदायक साबित हो सकती है। यही कारण है कि मेडिकल कॉलेज में अस्थमा व फेफड़े के इलाज के लिए रोजाना 80 से 100 मरीज पहुंच रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. एसी गुप्ता ने बताया कि एक्यूआई का यह स्तर ‘मध्यम श्रेणी’ में आता है। सामान्य लोगों के लिए यह हवा ठीक है, लेकिन बच्चों, बुजुर्ग और हृदय व फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोग इसके दुष्प्रभाव झेल सकते हैं। बताया कि ऐसे लोगों को खांसी, सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न जैसे हल्के लक्षण महसूस हो सकते हैं।
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पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश तिवारी ने बताया कि शाम के समय मौसम साफ होने और ओस गिरने से हवा में नमी बढ़ जाती है। हवा की गति कम होने से धूल ऊपर तक नहीं उड़ पाती, और वातावरण में जमा होकर प्रदूषण बढ़ाती है। इससे वायु की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है।
बरतें सावधानी
घर से बाहर जाने पर माॅस्क जरूर पहनें।
घरों की खिड़कियां बंद रखें, जिससे धूल और धुआं भीतर न जा सके।
रसोई या घर में धुआं और हानिकारक रसायनों का उपयोग कम करें।
बच्चों और बुजुर्गों को प्रदूषित जगहों से दूर रखें।
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इस स्तर की हवा दिल, फेफड़े और अस्थमा के मरीजों के लिए विशेष रूप से नुकसानदायक साबित हो सकती है। यही कारण है कि मेडिकल कॉलेज में अस्थमा व फेफड़े के इलाज के लिए रोजाना 80 से 100 मरीज पहुंच रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. एसी गुप्ता ने बताया कि एक्यूआई का यह स्तर ‘मध्यम श्रेणी’ में आता है। सामान्य लोगों के लिए यह हवा ठीक है, लेकिन बच्चों, बुजुर्ग और हृदय व फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोग इसके दुष्प्रभाव झेल सकते हैं। बताया कि ऐसे लोगों को खांसी, सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न जैसे हल्के लक्षण महसूस हो सकते हैं।
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पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश तिवारी ने बताया कि शाम के समय मौसम साफ होने और ओस गिरने से हवा में नमी बढ़ जाती है। हवा की गति कम होने से धूल ऊपर तक नहीं उड़ पाती, और वातावरण में जमा होकर प्रदूषण बढ़ाती है। इससे वायु की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है।
बरतें सावधानी
घर से बाहर जाने पर माॅस्क जरूर पहनें।
घरों की खिड़कियां बंद रखें, जिससे धूल और धुआं भीतर न जा सके।
रसोई या घर में धुआं और हानिकारक रसायनों का उपयोग कम करें।
बच्चों और बुजुर्गों को प्रदूषित जगहों से दूर रखें।