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Sultanpur News: फरार इंस्पेक्टर नीशू तोमर दुष्कर्म के आरोप से मुुक्त
Thu, 22 Feb 2024 01:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 22 Feb 2024 01:35 AM IST
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सुल्तानपुर। महिला आरक्षी के साथ दुष्कर्म के आरोप में डेढ़ साल से फरार 50 हजार के इनामी इंस्पेक्टर नीशू तोमर को पुलिस विवेचना ने भारी राहत दे दी है। पुलिस ने कोर्ट में दाखिल आरोप पत्र में इंस्पेक्टर को दुष्कर्म का आरोपी नहीं माना। उस पर केवल पीड़िता से गालीगलौज करने व धमकाने के मामले में ही आरोप पत्र दाखिल किया है। हालांकि पीड़िता ने इस पर आपत्ति जता दी है जिस पर 16 मार्च को सुनवाई होगी।
जिले में तैनात एक महिला आरक्षी ने इंस्पेक्टर नीशू तोमर के खिलाफ 14 जुलाई 2022 को कोतवाली नगर में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि हलियापुर थाने में दोनों की तैनाती के दौरान इंस्पेक्टर ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। आरक्षी ने इंस्पेक्टर पर अश्लील फोटो व वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया था।
आरोपी इंस्पेक्टर नीशू तोमर 22 सितंबर 2022 को दीवानी न्यायालय के पास से हिरासत में लिया गया था। उसे पुलिस महिला थाने ले गई थी जहां से वह फरार हो गया था। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। हालांकि, तत्कालीन पुलिस अफसरों ने उसे फरार न बताकर खुद छोड़ने की बात कही थी।
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तभी से नीशू तोमर फरार चल रहा है। इस मामले की पूरी विवेचना पूर्व सीओ सिटी राघवेंद्र चतुर्वेदी ने की थी। उन्होंने जो विवेचना की थी, उसमें भी नीशू को दुष्कर्म का आरोपी नहीं बताया था। किंतु कुछ तकनीकी कारणों के चलते कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल नहीं हो सका था।
बाद में नए विवेचक सीओ शिवम मिश्र ने विवेचना के बिंदुओं में कुछ सुधार करते हुए 19 फरवरी को आरोपपत्र सीजेएम कोर्ट में दाखिल कर दिया। आरोपपत्र में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कुछ आदेशों का हवाला देते हुए यह पीड़िता और आरोपी के बीच सहमति से शारीरिक संबंध बनने, दोनों के बालिग होने और दोनों को कानून का जानकार बताते हुए दुष्कर्म के आरोप से क्लीनचिट दे दी है। पीड़िता के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने सीजेएम कोर्ट में अर्जी देकर चार्जशीट पर आपत्ति दाखिल करने के लिए मौका मांगा है। इस पर 16 मार्च को सुनवाई होगी।
घोषित इनाम भी वापस लेने की तैयारी
इंस्पेक्टर नीशू तोमर केस दर्ज होने के बाद से ही फरार चल रहा है। ऐसे में तत्कालीन डीआईजी ने उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। जिसे 17 दिसंबर 2022 को बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया था। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इनाम की घोषणा भी वापस लेने की तैयारी हो गई है। पुलिस के सूत्रों के अनुसार इसके लिए पुलिस अधिकारियों ने पत्र भी भेज दिया है। हालांकि एसपी सोमेन बर्मा कहते हैं कि इस बारे में कोर्ट की अगली सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया जाएगा।
मॉनीटरिंग अर्जी पर 28 को होगी सुनवाई
आरक्षी ने 26 जुलाई 2022 को केस की विवेचना की मॉनीटरिंग करने के लिए सीजेएम कोर्ट में अर्जी दी थी। आरोप लगाया था कि पुलिस अफसर जानबूझकर आरोपी के प्रभाव में विवेचना लटकाए हुए है और गिरफ्तारी भी नहीं कर रहे हैं। अर्जी पर सुनवाई के लिए 28 फरवरी की तिथि नियत की गई है।
हाईकोर्ट में अवमानना केस में आज होगी सुनवाई
महिला आरक्षी ने केस की विवेचना जल्द पूरी कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पीड़िता को याचिका पर हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2022 को एसपी को आदेश दिया था कि वे आठ सप्ताह में विवेचना पूरी कराएं। पीड़िता के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने बताया कि निर्धारित समयावधि में विवेचना पूरी न होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई है। हाईकोर्ट ने एसपी से जवाब मांगा है। इस पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी।
ट्रांसफर पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक
दुष्कर्म का मामला सुर्खियों में आने के बाद महिला आरक्षी का तबादला गैरजिला कर दिया गया था। इसके खिलाफ आरक्षी ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट से स्टे होने के बाद आरक्षी की जिले में तैनाती कर दी गई थी।
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जिले में तैनात एक महिला आरक्षी ने इंस्पेक्टर नीशू तोमर के खिलाफ 14 जुलाई 2022 को कोतवाली नगर में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि हलियापुर थाने में दोनों की तैनाती के दौरान इंस्पेक्टर ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। आरक्षी ने इंस्पेक्टर पर अश्लील फोटो व वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया था।
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आरोपी इंस्पेक्टर नीशू तोमर 22 सितंबर 2022 को दीवानी न्यायालय के पास से हिरासत में लिया गया था। उसे पुलिस महिला थाने ले गई थी जहां से वह फरार हो गया था। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। हालांकि, तत्कालीन पुलिस अफसरों ने उसे फरार न बताकर खुद छोड़ने की बात कही थी।
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तभी से नीशू तोमर फरार चल रहा है। इस मामले की पूरी विवेचना पूर्व सीओ सिटी राघवेंद्र चतुर्वेदी ने की थी। उन्होंने जो विवेचना की थी, उसमें भी नीशू को दुष्कर्म का आरोपी नहीं बताया था। किंतु कुछ तकनीकी कारणों के चलते कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल नहीं हो सका था।
बाद में नए विवेचक सीओ शिवम मिश्र ने विवेचना के बिंदुओं में कुछ सुधार करते हुए 19 फरवरी को आरोपपत्र सीजेएम कोर्ट में दाखिल कर दिया। आरोपपत्र में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कुछ आदेशों का हवाला देते हुए यह पीड़िता और आरोपी के बीच सहमति से शारीरिक संबंध बनने, दोनों के बालिग होने और दोनों को कानून का जानकार बताते हुए दुष्कर्म के आरोप से क्लीनचिट दे दी है। पीड़िता के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने सीजेएम कोर्ट में अर्जी देकर चार्जशीट पर आपत्ति दाखिल करने के लिए मौका मांगा है। इस पर 16 मार्च को सुनवाई होगी।
घोषित इनाम भी वापस लेने की तैयारी
इंस्पेक्टर नीशू तोमर केस दर्ज होने के बाद से ही फरार चल रहा है। ऐसे में तत्कालीन डीआईजी ने उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। जिसे 17 दिसंबर 2022 को बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया था। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इनाम की घोषणा भी वापस लेने की तैयारी हो गई है। पुलिस के सूत्रों के अनुसार इसके लिए पुलिस अधिकारियों ने पत्र भी भेज दिया है। हालांकि एसपी सोमेन बर्मा कहते हैं कि इस बारे में कोर्ट की अगली सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया जाएगा।
मॉनीटरिंग अर्जी पर 28 को होगी सुनवाई
आरक्षी ने 26 जुलाई 2022 को केस की विवेचना की मॉनीटरिंग करने के लिए सीजेएम कोर्ट में अर्जी दी थी। आरोप लगाया था कि पुलिस अफसर जानबूझकर आरोपी के प्रभाव में विवेचना लटकाए हुए है और गिरफ्तारी भी नहीं कर रहे हैं। अर्जी पर सुनवाई के लिए 28 फरवरी की तिथि नियत की गई है।
हाईकोर्ट में अवमानना केस में आज होगी सुनवाई
महिला आरक्षी ने केस की विवेचना जल्द पूरी कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पीड़िता को याचिका पर हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2022 को एसपी को आदेश दिया था कि वे आठ सप्ताह में विवेचना पूरी कराएं। पीड़िता के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने बताया कि निर्धारित समयावधि में विवेचना पूरी न होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई है। हाईकोर्ट ने एसपी से जवाब मांगा है। इस पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी।
ट्रांसफर पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक
दुष्कर्म का मामला सुर्खियों में आने के बाद महिला आरक्षी का तबादला गैरजिला कर दिया गया था। इसके खिलाफ आरक्षी ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट से स्टे होने के बाद आरक्षी की जिले में तैनाती कर दी गई थी।