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जिला पंचायत के कार्यों पर कैग ने लगाई आपत्ति
Sultanpur
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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सुल्तानपुर। कैग की रिपोर्ट से जिला पंचायत में मनरेगा से कराए गए कार्यों में अनियमितता का खुलासा हुआ है। कैग ने 50 लाख रुपये से कराए गए विकास कार्यों में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए आपत्ति जताई है। आपत्ति के बाद हरकत में आए शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए रिपोर्ट तलब की है। शासन से इन कार्यों पर हुए खर्च का ब्योरा मांगे जाने से विभाग में खलबली मची है।
महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत वर्ष 2007-08 में जिला पंचायत से कराए गए लाखों के कार्यों में जांच के दौरान कैग ने अनियमितता जताई है। खर्च किए गए धन में सामानों की खरीद एवं मजदूरी पर व्यय अनुपात के हिसाब से सही नहीं पाया गया है। वर्ष 2007-08 व 2008-09 में कराए गए करीब 17 कार्यों में अनियमितता मिली है। सूत्रों की मानें तो इसमें करीब 50 लाख रुपया व्यय दिखाया गया है। कच्चे कार्य पर पैसा कम खर्च कर सामान की अधिक खरीद कर ली गई है। इसमें अधिकांश खड़ंजा मार्ग बनवाए गए हैं। अनुपात के हिसाब से धन का व्यय भी नहीं किया गया। यही नहीं जिला पंचायत ने धन लेने के बाद न तो कार्य पूरा हुआ और न ही कार्यपूर्ति जमा की गई। गंभीर अनियमितता पाए जाने पर कैग ने जांच के दौरान आपत्ति लगा दी। कैग की आपत्ति से शासन हरकत में आ गया है। आपत्ति पर बीते महीने शासन ने विकास विभाग से रिपोर्ट मांगी थी। शासन को रिपोर्ट भेजने के लिए जिला पंचायत से इस दौरान कराए गए विकास कार्यों का पूरा ब्योरा मांगा गया है।
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महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत वर्ष 2007-08 में जिला पंचायत से कराए गए लाखों के कार्यों में जांच के दौरान कैग ने अनियमितता जताई है। खर्च किए गए धन में सामानों की खरीद एवं मजदूरी पर व्यय अनुपात के हिसाब से सही नहीं पाया गया है। वर्ष 2007-08 व 2008-09 में कराए गए करीब 17 कार्यों में अनियमितता मिली है। सूत्रों की मानें तो इसमें करीब 50 लाख रुपया व्यय दिखाया गया है। कच्चे कार्य पर पैसा कम खर्च कर सामान की अधिक खरीद कर ली गई है। इसमें अधिकांश खड़ंजा मार्ग बनवाए गए हैं। अनुपात के हिसाब से धन का व्यय भी नहीं किया गया। यही नहीं जिला पंचायत ने धन लेने के बाद न तो कार्य पूरा हुआ और न ही कार्यपूर्ति जमा की गई। गंभीर अनियमितता पाए जाने पर कैग ने जांच के दौरान आपत्ति लगा दी। कैग की आपत्ति से शासन हरकत में आ गया है। आपत्ति पर बीते महीने शासन ने विकास विभाग से रिपोर्ट मांगी थी। शासन को रिपोर्ट भेजने के लिए जिला पंचायत से इस दौरान कराए गए विकास कार्यों का पूरा ब्योरा मांगा गया है।
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