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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   Women representatives will not rubber stamp, will develop

रबर स्टैंप नहीं होंगी महिला जनप्रतिनिधि, होगा विकास

Sat, 26 Mar 2016 11:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/सोनभद्र
ब्यूरो/अमर उजाला/सोनभद्र Updated Sat, 26 Mar 2016 11:42 PM IST
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पंचायत राज विभाग ने महिला ग्राम प्रधानों के क्षमता विकास के लिए नई पहल शुरू की है। इन्हें रबर स्टैंप से ऊपर उठकर खुद निर्णय लेने के लिए प्रेरित करने का निर्णय विभाग ने लिया है। इसके तहत 30 मार्च को नवीन कृषि मंडी समिति परिसर में क्षमता विकास प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है। इसमें जिले की 249 महिला प्रधानों के साथ ही 388 पुरुष प्रधानों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। 
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पिछले पंचवर्षीय में जिले में कुल 501 ग्राम पंचायतें थीं। इस बार नए परिसीमन के तहत कुल 637 ग्राम पंचायतें गठित हुईं। इन ग्राम पंचायतों में हुए चुनाव में 249 महिलाएं और 388 पुरुष प्रधान निर्वाचित घोषित किए गए। अब ग्राम पंचायतों के खाते भी खुल गए हैं। गांवों के विकास के लिए कार्ययोजनाएं बनाने और उनके स्वीकृति का काम भी शुरू हो गया है। अब इन ग्राम प्रधानों को क्षमता विकास का प्रशिक्षण दिए जाने का निर्णय लिया गया है।
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जिला पंचायत राज अधिकारी एमपी द्विवेदी ने बताया कि प्रधानों को प्रशिक्षण तो दिया ही जाएगा, साथ ही महिला प्रधानों को विशेष रूप से प्रोत्साहित कर उनका क्षमता विकास किया जाएगा ताकि वे रबर स्टैंप न बन सकें। इसके लिए सभी सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को निर्देशित किया गया है। 30 मार्च को नवीन कृषि मंडी परिसर में क्षमता विकास कार्यक्रम में प्रधानों की कुर्सी पर सिर्फ प्रधान ही बैठेंगे। खासकर महिला प्रधानों की कुर्सी पर उनके प्रतिनिधि के रूप में कोई नहीं बैठेगा। इसको लेकर निगरानी का निर्देश दिया गया है।
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सके अलावा एडीओ और सेक्रेटरियों को निर्देश दिया गया है कि समय-समय पर महिला प्रधानों की बैठक लेकर उन्हें उनके अधिकार के प्रति जागरूक करें और उस बैठक में उनके प्रतिनिधि या फिर परिवार वालों को दूर रखें। ताकि महिलाएं रबर स्टैंप से उपर उठकर कार्य कर सकें। 


बता दें कि अक्सर ऐसा सुनने में आता है कि महिलाएं प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर निर्वाचित तो हो जाती हैं लेकिन उन्हें सिवाय हस्ताक्षर बनाने के और किसी कार्य से मतलब नहीं होता है। उनके सामने विपरीत परिस्थतियां तब उत्पन्न हो जाती हैं, जब उन्हें किसी कार्यशाला या कार्यक्रम में संबंधित पंचायतों में संचालित योजनाओं के बारे में कोई स्पीच देनी होती है। 
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