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बेलन नदी के सूखने से तटवर्ती गांवों में पानी की किल्लत

Sat, 24 Apr 2021 12:13 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Apr 2021 12:13 AM IST
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Water shortage in coastal villages due to drying of Belan river
सोनभद्र। जिले के तीन ब्लॉक के सैकड़ों गांवों के लिए लाइफ लाइन कही जाने वाली बेलन नदी में इन दिनों धूल उड़ रही है। इस समय तालाब, पोखर भी सूख गए हैं। बेलन नदी के सूखने से इन दिनों सर्वाधिक दिक्कत पशुपालकों को हो रही है। पानी की समस्या को देखते हुए पशुपालकों ने प्रशासन से नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग की है।
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चतरा ब्लॉक के करद गांव से निकली बेलन नदी राबर्ट्सगंज ब्लॉक, करमा और घोरावल ब्लॉक होते हुए मिर्जापुर जिले के हलिया क्षेत्र को बहती है। बेलन नदी से जिले के तीन ब्लॉक के लगभग 400 से अधिक गांवों के लोगों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। नदी से न सिर्फ फसल की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है बल्कि पशुओं को पीने के लिए पानी मिलता है। इस वर्ष बारिश कम होने से बेलन नदी फरवरी माह में ही सूख गई है।
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घोरावल क्षेत्र में भी नदी में धूल उड़ने लगी है। नदी के अधिकांश तटवर्ती गांवों में तालाब, पोखर भी सूख गए हैं। इससे पशुपालकों को सर्वाधिक दिक्कत पशुओं को पानी पिलाने को लेकर हो रही है। पशुओं को लेकर बाहर से आने वाले पशुपालक भी पानी की समस्या से बेहाल है। चंदौली जिले के नौगढ़ क्षेत्र से हर साल गर्मी के दिनों में पशुओं को लेकर आने वाले पशुपालक लाल साहब का कहना है कि वे हर साल पशुओं को बेलन नदी के तटवर्ती गांवों में लेकर आते हैं। नदी में पानी होने से पशुओं को पानी पिलाने में दिक्कत नहीं होती थी। गर्मी के दिनों में घाघर मुख्य नहर में पानी नहीं छोड़े जाने पर बेलन नदी में भी पानी आ जाता था। क्षेत्र के पशुपालक अरविंद, हरिकृष्ण त्रिपाठी, हेमनाथ आदि ने घाघर मुख्य नहर में पानी छोड़े जाने की मांग की है।
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तटवर्ती गांवों में तेजी से खिसक रहा भू-जलस्तर
गर्मी के शुरुआती दिनों में ही बेलन नदी के सूख जाने के कारण तटवर्ती गांवों में तेजी से भू-जलस्तर खिसक रहा है। स्थिति यह है कि कच्ची बोर पानी देना छोड़ दिया है। पक्की बोर का जलस्तर नीचे जाने से पेयजल की समस्या बढ़ने लगी है। नहर के जरिए बेलन नदी में पानी छोड़ा जाता है तो इससे भू-जलस्तर में सुधार होगा।

मिर्जापुर नगर प्रखंड के एई राजीव सिंह ने बताया कि घाघर मुख्य नहर में धंधरौल बांध से 15 मई को पानी छोड़ा जाएगा। अभी कई गांवों में गेहूं की फसल नहीं कट सकी हैं।
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