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Sonebhadra News: खेतों से नहीं निकला पानी, अंकुरित होने लगा धान, आलू भी सड़ा
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कोर्गी गांव में धान की बालियों में नया अंकुरण दिखाता किसान । स्रोत स्वयं
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सोनभद्र/महुली। चक्रवाती तूफान के चलते मौसम का मिजाज बदला हुआ है। खराब मौसम की वजह से हफ्ते भर काटे गए धान की फसलें अंकुरित होने लगी है। शनिवार को किसान खेतों में कटी धान की फसल को इधर से उधर करते रहे। खेताें से अभी तक पानी नहीं निकल सका है। फसल खराब होने से किसान चिंतित है।
जिला मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज के साथ ही आस-पास के ग्रामीण इलाकों में शनिवार को भी मौसम खराब रहा। दिन में भी मौसम साफ नहीं हुआ। छह दिनों से लगातार हो रही बारिश से धान की कटी फसल अंकुरित होकर खराब होने लगे हैं। नगवां और घोरावल ब्लॉक में अधिकांश किसानों की धान की फसल कट गई है। वहीं रॉबर्ट्सगंज, चतरा और करमा ब्लॉक में पानी भरे खेतों में फसल गिरकर खराब हो रही है।
प्रकृति की मार के आगे किसान वेवश हैं। खेतों में पानी भर जाने से नये सीजन में रोपे गए आलू के बीज भी सड़ने लगे हैं। दुद्धी ब्लॉक के डूमरा, कोरगी, हीराचक, फुलवार, महुली, पतरिहा, जोरुखाड़, घिवही, केवाल आदि दर्जनों गांवों में काटी गई धान की फसलों में नया अंकुरण आ गया है। इससे किसानों की कड़ी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। किसानों ने कहा कि समय से धान की रोपाई करने से दीपावली पर अधिकांश किस्म की प्रजातियां तैयार हो जाने के बाद उन्हें काटकर खेत में ही छोड़ दिया गया था। लेकिन इधर लगातार बारिश से इन कटी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा और इसकी बालियां फिर से अंकुरित हो गयीं।
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वहीं खेतों में पानी भर जाने से अधिकांश धान सड़ गए। केवाल गांव निवासी खीरुराम ने बताया कि गांव में बांध के नीचे कई बीघा भूमि पर काटकर छोड़ी गई धान की फसलों के ऊपर से पानी बह रहा है। यहां करीब 80 फीसदी किसान अपनी फसल को काट चुके हैं और अब इसे नष्ट होते हुए देखने को विवश हैं। कोरगी गांव निवासी मथुरा सिंह, जसवंत सिंह, राजेन्द्र मौर्या, भेषमन कुशवाहा, कैलाश आदि ने कहा कि धान की फसलों के नष्ट हो जाने से उनके परिवार के सामने खाने का संकट खड़ा हो गया है। वहीं मवेशियों के चारा पानी पर भी संकट मंडराने लगा है। किसानों ने शासन से सर्वे कर उचित क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है।
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वर्जन:
चक्रवात मोंथा की वजह से अभी दो दिन मौसम खराब रहने के आसार हैं। फसलों के नुकसान का सर्वे कराने के लिए राजस्व विभाग से कहा गया है। उन्हीं फसलों को ज्यादा क्षति हुई है, जो कट चुकी हैं या पानी भरे खेतों में गिर गई हैं। -वीरेंद्र कुमार, जिला कृषि अधिकारी-सोनभद्र।
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जिला मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज के साथ ही आस-पास के ग्रामीण इलाकों में शनिवार को भी मौसम खराब रहा। दिन में भी मौसम साफ नहीं हुआ। छह दिनों से लगातार हो रही बारिश से धान की कटी फसल अंकुरित होकर खराब होने लगे हैं। नगवां और घोरावल ब्लॉक में अधिकांश किसानों की धान की फसल कट गई है। वहीं रॉबर्ट्सगंज, चतरा और करमा ब्लॉक में पानी भरे खेतों में फसल गिरकर खराब हो रही है।
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प्रकृति की मार के आगे किसान वेवश हैं। खेतों में पानी भर जाने से नये सीजन में रोपे गए आलू के बीज भी सड़ने लगे हैं। दुद्धी ब्लॉक के डूमरा, कोरगी, हीराचक, फुलवार, महुली, पतरिहा, जोरुखाड़, घिवही, केवाल आदि दर्जनों गांवों में काटी गई धान की फसलों में नया अंकुरण आ गया है। इससे किसानों की कड़ी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। किसानों ने कहा कि समय से धान की रोपाई करने से दीपावली पर अधिकांश किस्म की प्रजातियां तैयार हो जाने के बाद उन्हें काटकर खेत में ही छोड़ दिया गया था। लेकिन इधर लगातार बारिश से इन कटी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा और इसकी बालियां फिर से अंकुरित हो गयीं।
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वहीं खेतों में पानी भर जाने से अधिकांश धान सड़ गए। केवाल गांव निवासी खीरुराम ने बताया कि गांव में बांध के नीचे कई बीघा भूमि पर काटकर छोड़ी गई धान की फसलों के ऊपर से पानी बह रहा है। यहां करीब 80 फीसदी किसान अपनी फसल को काट चुके हैं और अब इसे नष्ट होते हुए देखने को विवश हैं। कोरगी गांव निवासी मथुरा सिंह, जसवंत सिंह, राजेन्द्र मौर्या, भेषमन कुशवाहा, कैलाश आदि ने कहा कि धान की फसलों के नष्ट हो जाने से उनके परिवार के सामने खाने का संकट खड़ा हो गया है। वहीं मवेशियों के चारा पानी पर भी संकट मंडराने लगा है। किसानों ने शासन से सर्वे कर उचित क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है।
वर्जन:
चक्रवात मोंथा की वजह से अभी दो दिन मौसम खराब रहने के आसार हैं। फसलों के नुकसान का सर्वे कराने के लिए राजस्व विभाग से कहा गया है। उन्हीं फसलों को ज्यादा क्षति हुई है, जो कट चुकी हैं या पानी भरे खेतों में गिर गई हैं। -वीरेंद्र कुमार, जिला कृषि अधिकारी-सोनभद्र।