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दूषित पानी पीकर हो रहे ग्रामीण हो रहे बीमार, अब बीडीओ देंगे जवाब
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सोनभद्र। जिले के 236 गांवों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए 680 हैंडपंपों में रिमूवल प्लांट लगाए गए हैं। लेकिन जिम्मेदरानों की लापरवाही से मरम्मत एवं देखरेख न होने से अधिकांश स्थानों के रिमूवल प्लांट खराब होकर शोपीस बन चुके हैं। प्लांटों के खराब होने से ग्रामीण दूषित पानी पीकर बीमार हो रहे हैं। पूर्व में अधिकारियों के निर्देश देने के बावजूद प्लांटों का मरम्मत कराने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं किया जा रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी सौरभ गंगवार ने संबंधित ब्लॉकों के बीडीओ से खराब पड़े रिमूवल प्लांटों के संबंध में रिपोर्ट तलब किया है।
म्योरपुर, दुद्दी, नगवां, बभनी और चतरा ब्लॉक क्षेत्र के 236 गांव फ़्लोराइड से प्रभावित हैं। इन गांवों के लोगों को शुद्द पेयजल मुहैया कराने के लिए कई वर्ष पूर्व प्रशासन की ओर से 680 हैंडपंपों में रिमूवल प्लांट लगाए गए हैं। लेकिन वर्तमान में म्योरपुर ब्लॉक क्षेत्र में दूषित पानी उगल रहे हैंडपंपों में लगे फ्लोराइड रिमूवल प्लांटों की हालत खस्ता हो गई है। इस क्षेत्र के लगभग तीन सौ हैंडपंपों में लगे प्लांट मरम्मत और रिचार्ज न होने की वजह से खराब पड़े हैं। जबकि प्लांटों के स्थापना के दौरान वाटर लाइफ इंडिया नामक एनजीओ द्वारा इसके मरम्मत और रिचार्ज का काम दिया गया था, लेकिन यह कुछ दिन बाद मरम्मत कार्य ठप हो गया। प्लांटों के खराब होने के बाद ग्रामीण दूषित पानी पीने को विवश हैं।
पर्यावरण प्रदूषण की वजह से पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने की वजह से लोग फ्लोरेसिस नामक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। ग्रामीणों की मानें तो हैंडपंपों में लगाए गए फ्लोराइड रिमूवर प्लांटों में पाउडर नहीं बदला जा रहा है जिसकी वजह से लोग दूषित पेयजल का सेवन करने को विवश हैं। बीते दिनों मकरा में हुई मौतों को लेकर जल निगम में चौंकाने वाली रिपोर्ट दी थी और दूषित पेयजल से लोगों की मौतों की वजह बताई थी।
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उधर फ्लोराइड की बात करें तो डब्ल्यूएचओ के मुताबिक शुद्ध पेयजल में 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर फ्लोराइड की मात्रा रह सकती है, लेकिन म्योरपुर इलाके में पीएसआई देहरादून व बनवासी सेवा आश्रम द्वारा किए गए सर्वे में यह मात्रा 7 से 8 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पाई गई थी। कुटोंधी, मनबसा, करमाडाड़, कुस्माहा, परवाकुंडवारी समेत कई गांव फ्लोराइड से प्रभावित है।
जिन ब्लॉकों के गांवों में स्थित हैंडपंपों में रिमूवल प्लांट लगे हैं, वहां के बीडीओ से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद रिमूवल प्लांटों की मरम्मत कराने में हिलाहवाली करने वाले जिम्मेदरानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सौरभ गंगवार, मुख्य विकास अधिकारी
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म्योरपुर, दुद्दी, नगवां, बभनी और चतरा ब्लॉक क्षेत्र के 236 गांव फ़्लोराइड से प्रभावित हैं। इन गांवों के लोगों को शुद्द पेयजल मुहैया कराने के लिए कई वर्ष पूर्व प्रशासन की ओर से 680 हैंडपंपों में रिमूवल प्लांट लगाए गए हैं। लेकिन वर्तमान में म्योरपुर ब्लॉक क्षेत्र में दूषित पानी उगल रहे हैंडपंपों में लगे फ्लोराइड रिमूवल प्लांटों की हालत खस्ता हो गई है। इस क्षेत्र के लगभग तीन सौ हैंडपंपों में लगे प्लांट मरम्मत और रिचार्ज न होने की वजह से खराब पड़े हैं। जबकि प्लांटों के स्थापना के दौरान वाटर लाइफ इंडिया नामक एनजीओ द्वारा इसके मरम्मत और रिचार्ज का काम दिया गया था, लेकिन यह कुछ दिन बाद मरम्मत कार्य ठप हो गया। प्लांटों के खराब होने के बाद ग्रामीण दूषित पानी पीने को विवश हैं।
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पर्यावरण प्रदूषण की वजह से पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने की वजह से लोग फ्लोरेसिस नामक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। ग्रामीणों की मानें तो हैंडपंपों में लगाए गए फ्लोराइड रिमूवर प्लांटों में पाउडर नहीं बदला जा रहा है जिसकी वजह से लोग दूषित पेयजल का सेवन करने को विवश हैं। बीते दिनों मकरा में हुई मौतों को लेकर जल निगम में चौंकाने वाली रिपोर्ट दी थी और दूषित पेयजल से लोगों की मौतों की वजह बताई थी।
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उधर फ्लोराइड की बात करें तो डब्ल्यूएचओ के मुताबिक शुद्ध पेयजल में 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर फ्लोराइड की मात्रा रह सकती है, लेकिन म्योरपुर इलाके में पीएसआई देहरादून व बनवासी सेवा आश्रम द्वारा किए गए सर्वे में यह मात्रा 7 से 8 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पाई गई थी। कुटोंधी, मनबसा, करमाडाड़, कुस्माहा, परवाकुंडवारी समेत कई गांव फ्लोराइड से प्रभावित है।
जिन ब्लॉकों के गांवों में स्थित हैंडपंपों में रिमूवल प्लांट लगे हैं, वहां के बीडीओ से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद रिमूवल प्लांटों की मरम्मत कराने में हिलाहवाली करने वाले जिम्मेदरानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सौरभ गंगवार, मुख्य विकास अधिकारी