खरवार जाति के लिए दो तरह के आरक्षण; चंदौली में जन्मे तो सांसद चुने जाने योग्य, सोनभद्र में विधायक ही बन सकते
Lok Sabha Election: सोनभद्र जिले के चार और चंदौली जिले के चकिया विधानसभा क्षेत्र को मिलाकर बनी इस लोकसभा सीट में सबसे ज्यादा आदिवासी मतदाता हैं। वहीं, चंदौली के नौगढ़ तहसील का बड़ा हिस्सा सोनभद्र से लगता है। नौगढ़ और उससे सटे सोनभद्र के राॅबर्ट्सगंज, चतरा, नगवां और करमा ब्लॉक का सामाजिक परिदृश्य लगभग एक जैसा ही है।
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जाति एक। परिवेश भी एक। लोकसभा क्षेत्र भी एक। बस चंद किमी का फासला उनकी अर्हता बदल देता है। खरवार जाति के लोग अगर चंदौली जिले की सीमा में जन्मे हैं तो वह सांसद चुने जाने के योग्य हैं। अगर उनका जन्म पड़ोस के सोनभद्र जिले में हुआ है तो वह सिर्फ विधायक ही बन सकते हैं। आरक्षण को लेकर विसंगतियों ने इस बिरादरी के लोगों के विकास पर भी असर डाला है। वह वर्षों से एक समान आरक्षण की मांग उठाते आ रहे हैं, मगर राजनीतिक गलियारे में उनकी आवाज अब तक मुखर नहीं हो पाई है।
रॉबर्ट्सगंज यूपी का अंतिम लोकसभा क्षेत्र है। सोनभद्र जिले के चार और चंदौली जिले के चकिया विधानसभा क्षेत्र को मिलाकर बने इस लोकसभा सीट में सबसे ज्यादा आदिवासी मतदाता हैं। इनकी संख्या 22 फीसदी से अधिक है। यह प्रदेश की एकमात्र ऐसी सीट भी है, जहां की दो विधानसभा (ओबरा और दुद्धी) अनुसूचित जनजाति के हिस्से में है, जबकि एक विधानसभा (चकिया) अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।
पूरे लोकसभा क्षेत्र में खरवार मतदाताओं की संख्या करीब सवा लाख है। पांचों विधानसभा क्षेत्र में इनकी अच्छी-खासी संख्या है। चंदौली जिले के रिकॉर्ड में खरवार अनुसूचित जाति के रूप में सूचीबद्ध हैं। उन्हें इसी का प्रमाण पत्र जारी होता है। वहीं सोनभद्र जिले में खरवार अनुसूचित जनजाति है। रॉबर्ट्सगंज लोकसभा सीट का आरक्षण अनुसूचित जाति के लिए है। लिहाजा खरवार जाति के वही लोग इस सीट पर लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं, जो चंदौली जिले में जन्मे हों।
जंगल-पहाड़ों के बीच भी लोग जीवन-यापन
चंदौली के नौगढ़ तहसील का बड़ा हिस्सा सोनभद्र से लगता है। नौगढ़ और उससे सटे सोनभद्र के राॅबर्ट्सगंज, चतरा, नगवां और करमा ब्लॉक का सामाजिक परिदृश्य लगभग एक जैसा ही है। गरीबी, बदहाली, पिछड़ापन, जनसुविधाओं का अभाव इन ब्लॉकों में है, ठीक वैसी ही परिस्थितियों में नौगढ़ के जंगल-पहाड़ों के बीच भी लोग जीवन-यापन कर रहे हैं।
एक जैसे सामाजिक परिवेश के बावजूद महज चंद किमी के अंतर से उनके जाति प्रमाण पत्र का स्वरूप बदल जाता है और इसके साथ उनकी योग्यता भी बदल जाती है। सरकारी नौकरियों में भी खरवार जाति के दो तरह के आरक्षण के चलते कई विवाद सामने आ चुके हैं।
खरवार महासभा के पदाधिकारी रामचंद्र खरवार का कहना है कि चंदौली और सोनभद्र के परिवेश में ज्यादा अंतर नहीं है। समय-समय पर समान आरक्षण की मांग उठती रही है, लेकिन मामला राजनीतिक नफा-नुकसान का होने के कारण कोई भी दल इस पर खुलकर बोलना नहीं चाहता।
वर्ष 2014 में सांसद बने थे छोटेलाल खरवार
मोदी लहर के बीच वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में रॉबर्ट्सगंज सीट से भाजपा प्रत्याशी छोटेलाल खरवार को प्रचंड जीत मिली थी। छोटेलाल यह चुनाव इसलिए लड़ पाए कि वह मूल रूप से चंदौली के नौगढ़ के रहने वाले हैं। इस बार चुनाव में भी भाजपा और सपा गठबंधन सहित अन्य दलों से कई खरवार नेता दावेदारी कर रहे हैं। उधर, दुद्धी विधानसभा के उपचुनाव में भी कई खरवार दावेदार हैं। यह सीट जनजाति के लिए आरक्षित है।
खरवार जाति को पांच जिलों में जनजाति का दर्जा
खरवार जाति को प्रदेश के पांच जिलों में जनजाति का दर्जा हासिल है। इसमें सोनभद्र के अलावा वाराणसी, गाजीपुर, बलिया और देवरिया शामिल है। चंदौली जिले का सृजन भी वाराणसी से ही हुआ है, लेकिन वहां उन्हें अनुसूचित जाति में रखा गया है।