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Sonebhadra News: सामूहिक दुष्कर्म के 3 दोषियों को सजा, 2 को आजीवन कारावास, एक को 20 साल की कैद

Wed, 11 Mar 2026 11:03 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 11 Mar 2026 11:03 PM IST
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Three gang rape convicts sentenced, two sentenced to life imprisonment, one to 20 years' imprisonment
सोनभद्र। करमा थाना क्षेत्र में अनुसूचित जाति की महिला के साथ 2014 में हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अदालत ने तीन दोषियों को सजा सुनाई है। दो दोषियों काे आजीवन कारावास और 60-60 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया, जबकि तीसरे दोषी को 35 हजार अर्थदंड व 20 वर्ष की कैद मिली है। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट आबिद शमीम की अदालत ने बुधवार को मामले की सुनवाई के बाद सजा सुनाई। अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़िता को दी जाएगी।
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पीड़िता ने धारा 156(3) के तहत न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। आरोप लगाया था कि उसके पति काम के सिलसिले में बाहर गए थे। 22 जुलाई 2014 की रात उसके घर शाहगंज थाना क्षेत्र के राजपुर निवासी कांग्रेस बियार, नंदलाल और मिर्जापुर के जिगना थाना क्षेत्र के भतड़ा गांव निवासी विनय सिंह वाहन लेकर आए। कहा कि उसके पति सड़क हादसे में घायल हो गए हैं। करमा स्थित अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया है। उनकी बातों में आकर घर में रखे आठ हजार रुपये लेकर वह उनके साथ चली गई। आरोप है कि रात आठ बजे के करीब उसे एक विद्यालय में लेकर पहुंचे और उसके मुंह में कपड़ा ठूंस कर सामूहिक दुष्कर्म किया। पति के इलाज के लिए लाए रुपये भी छिन लिए और जान से मारने की धमकी दी। न्यायालय के आदेश पर पांच सितंबर 2014 को मुकदमा दर्ज किया गया और विवेचना के बाद पर्याप्त सबूत मिलने का दावा करते हुए न्यायालय में दो बार में चार्जशीट दाखिल की गई। 15 मई 2015 से इस मामले की विधिवत सुनवाई शुरू हुई।
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बचाव पक्ष का दावा : जमीन विवाद को लेकर रची गई साजिश, दर्ज कराया गया झूठा केस
बचाव पक्ष की तरफ से दलीलें दी गई थीं कि उनका उनके सगे पट्टीदार से जमीन का विवाद चल रहा है। इसको लेकर प्राथमिकी भी दर्ज हुई थी। इसी मामले में एक साजिश के तहत पीड़िता का नाम गलत दर्शाते हुए झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया। दावा किया था कि उनके पट्टीदारों ने पीड़िता को जमीन का लालच दिया है और उसी के चलते उसने दुष्कर्म का आरोप लगाया। आरोपों को अविश्वसनीय और असत्य बताते हुए खारिज करने की मांग की। अन्य ने भी खुद को निर्दोष होने का दावा किया था लेकिन सुनवाई के दौरान आए साक्ष्यों और गवाहों की तरफ से परीक्षित कराए गए बयानों ने दलीलों को बेअसर कर दिया।
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न्यायालय ने कहा : दोषियों के कृत्य से पीड़िता और परिवार की सामाजिक मर्यादा हुई धूमिल
शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक न्यायालय में पाया कि अभियोजन-बचाव दोनों पक्षों की दलीलों और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट है कि झूठ बोलकर पीड़िता को साथ ले जाया गया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गालियां और धमकी दी गईं। आठ हजार रुपये भी छीन लिए गए। दोषियों के इस कृत्य से पीड़िता की निजता भंग हुई और उसके व उसके उसके परिवार की सामाजिक मर्यादा धूमिल हुई। किया गया अपराध, उसकी प्रकृति, समाज व पीड़िता पर पड़ने वाले प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए निर्णय लिया जाना जरूरी है।

इन्हें मिली सजा
नंदलाल, कांग्रेस बियार और विनय सिंह को सामूहिक दुष्कर्म के मामले में 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। उन्हें मारपीट, अभद्रता, लूट के तहत भी दोषी पाया गया। वहीं एससी-एसटी के मामले में कांग्रेस और विनय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। नंदलाल को अनुसूचित जाति का होने के कारण सिर्फ दुष्कर्म व अन्य धाराओं के लिए दोषी पाया गया। सभी सजा साथ-साथ चलेगी।
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