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Sonebhadra News: मजदूरों को ब्लास्टिंग के लिए हर घंटे चार होल करने की मिली थी जिम्मेदारी

Wed, 19 Nov 2025 01:48 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Nov 2025 01:48 AM IST
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The workers were given the responsibility of making four holes every hour for blasting.
सोनभद्र। जिस खदान में हादसा हुआ, उसमें ठेके पर ब्लास्टिंग के लिए होल कराए जा रहे थे। ओबरा के रहने वाले दो ठेकेदारों (कंप्रेशर मशीन संचालकों) ने इसका ठेका ले रखा था। उन्हीं की तरफ से मजदूरों की व्यवस्था कराई गई थी। घटना के दिन दोनों ठेेकेदारों की तरफ से 10 कंप्रेशर मशीनें लगाई गई थी। गहराई में पानी भरा होने के कारण एक मशीन अलग खड़ी कर दी गई थी। नौ मशीनें होल करने में लगी थीं, तभी हादसा हो गया।
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बताया जा रहा है कि प्रत्येक कंप्रेशर मशीन संचालक को हर घंटे चार होल करने की जिम्मेदारी दी गई थी। एक होल की गहराई आठ फीट तक रखनी थी। इसी के हिसाब से उनकी मजदूरी और ठेकेदार को मुनाफा मिलना था। प्रत्येक कंप्रेशर मशीन के लिए एक ट्रैक्टर चालक और एक मशीन ऑपरेटर की जरूरत पड़ती है। इसलिए मौके पर 18 मजदूरों की मौजूदगी का दावा अभी भी किया जा रहा है। वहीं, प्रत्यक्षदर्शियों का दावा था कि तीन लोग बच गए और 15 लोग दब गए थे। मौके पर वास्तव में कितने मजदृूर थे और कितने दब गए, इस बारे में सही जानकारी ठेकेदार ही दे सकते हैं लेकिन हादसे के बाद से दोनों ठेकेदार गायब हैं।
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इनसेट -
दो घंटे तक दबा रहा मामला, मशीन लेकर भागते दिखे लोग, तब मचा शोर
हादसा दोपहर ढाई बजे हुआ था लेकिन दो घंटे तक मामला दबा रहा। इसको लेकर शोर तब मचा, जब कुछ लोग तीन कंप्रेशर मशीन लेकर वहां से भागते दिखे। आस-पास के कुछ लोगों ने मौके पर जाकर देखा तो पता चला कि बड़ा हादसा हो गया। यही कारण था कि वहां से महज पांच से छह किमी की दूरी पर सीएम के कार्यक्रम स्थल के पास मौजूद समाज कल्याण मंत्री को भी शाम पांच बजे हादसे की जानकारी हो पाई। बाकी लोगों को भी घटना के बारे में शाम का पता चला। राहत कार्य भी देर शाम शुरू हो सका।
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मजदूर नहीं ठेकेदार संभालते हैं खनन का काम :
खनन कार्य में मजदूरों की भले ही अहम भूमिका होती है लेकिन ज्यादातर काम ठेकेदार के जरिए संचालित किया जाता है। ठेकेदार भी समय-समय पर खदान बदलते रहते हैं। मजदूर भी सहूलियत के आधार पर कभी ठेकेदार के जरिए तो कभी साथियों के जरिए एक दूसरे खदान में पहुंचते रहते हैं। यही कारण है कि जहां हादसे वाली खदान में काम करने वाले मजदूरों का कोई लेखा-जोखा सामने नहीं आया। वहीं हादसे के वक्त कितने मजदूर थे कितने चपेट में आए इसको लेकर अभी तक अलग-अलग दावे बने हुए हैं।
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