फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   The potter's lamp of hope is taking shape on the wheel

चाक पर आकार ले रहा कुम्हारों के उम्मीदों का दीया

Wed, 19 Oct 2022 12:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Oct 2022 12:06 AM IST
विज्ञापन
The potter's lamp of hope is taking shape on the wheel
दुद्धी क्षेत्र के मलदेवा गांव में दीपावली की तैयारी को लेकर दीया बनाते हरिहर प्रजापति। - फोटो : SONBHADRA
दुद्धी। दीपोत्सव पर बाजार सजने लगे हैं। हर कोई अच्छे कारोबार को लेकर उत्साहित है। कुछ ऐसी ही उम्मीद उन लोगों में भी बनी है, जिनका व्यवसाय ही मिट्टी के दीपक बनाकर बेचना है। दीपावली पर घर-घर दीपक जलाने की परंपरा के कारण इस पर्व पर दीपों की मांग बढ़ जाती है। लिहाजा वह पूरे मनोयोग से दीपक बनाने में दिन-रात जुटे हुए हैं। हालांकि उनके मन में यह चिंता भी है कि कहीं बिजली के झालर और चीनी दीपक के मोह में लोग उनके परिश्रम की अनदेखी न कर दें।
विज्ञापन

दुद्धी ब्लाक के मल्देवा गांव निवासी बुजुर्ग हरिहर प्रजापति पिछले चार दशकों से मिट्टी के बर्तन और दीया बनाते आ रहे हैं। इस बार भी दीपावली को लेकर वह पूरे परिवार के साथ इस कार्य में जुटे हैं। उनका कहना है कि दीपावली और छठ पूजा पर मिट्टी के दीपक, बर्तन की मांग रहती है। लोगों की मांग पूरी करने के लिए इस उम्र में भी हम पसीना बहा रहे हैं।
विज्ञापन

हरिहर का कहना है कि तेजी से बढ़ती महंगाई के चलते उनके व्यवसाय में मुनाफा नहीं रह गया है। चीनी दीपक और झालरों के प्रति आकर्षण ने उनके व्यवसाय को प्रभावित किया है। फिर भी उन्हें उम्मीद है कि इस बार लोग दीपक खरीदेंगे। राजू प्रजापति ने बताया कि पूरा परिवार मिलकर इस मिट्टी से दिया, ढकनी, घड़ा, कलश, चुक्कड़, कटोरी सहित अन्य चीजें बनाते हैं। यह काम पीढ़ियों से करते आ रहे हैं। इस महंगाई में जितना लागत हमारी लगती है वही निकल रहा है। कमाई तो पता ही नहीं चलता। वर्तमान समय में दीये की बिक्री तो होती है, लेकिन उतनी नही हो पाती हैं जितनी होनी चाहिए। छठ के लिए बनने वाली कोशी, ढकनी व दीपक सहित अन्य खिलौने भी बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। नंदलाल ने बताया कि मिट्टी का दीया और बर्तन बेचकर ही परिवार का भरण-पोषण होता है। इलेक्ट्रिक झालरों से व्यवसाय प्रभावित हुआ है। फिर जिस तरह लोग अपनी परंपराओं की ओर लौटने की बात कह रहे हैं, उससे हमारे दीपक की बिक्री इस बार अच्छी होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed