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Sonebhadra News: फर्जी फर्म के कागज पर छह करोड़ का सिरप खरीदने वाले को नहीं मिली जमानत

Sat, 24 Jan 2026 11:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 11:30 PM IST
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The person who bought syrup worth Rs 6 crore on the basis of fake firm papers did not get bail.
मां कृपा मेडिकल के नाम से फर्जी फर्म के कागज पर ही शैली ट्रेडर्स से छह करोड़ का सिरप खरीदने वाले सत्यम को जमानत देने से न्यायालय ने इन्कार कर दिया है। कागज पर खरीदे गए सिरप को सोनभद से भदोही स्थित दिलीप मेडिकल, आयुष मेडिकल, सनाया मेडिकल को आपूर्ति दिखाई गई थी। जिले की एसआईटी ने भोला की गिरफ्तारी के बाद उसे पिछले माह अधिवक्ता से मिलने जाते समय दबोचा था।
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वाराणसी के कबीरचौरा इलाके के रहने वाले सत्यम ने अधिवक्ता के जरिये जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत की अर्जी दाखिल की थी। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी आबिद शमीम की अदालत ने इसकी सुनवाई की। सत्यम की दलील थी कि उसने कोई तथ्य नहीं छिपाया है न ही जिस सिरप तस्करी को लेकर उसे आरोपी बनाया गया है, वह सिरप ही प्रतिबंधित है। पुलिस की तरफ से प्रस्तुत किए गए प्रपत्रों का अवलोकन करने पर न्यायालय ने पाया कि मां कृपा मेडिकल बरकरा का ड्रग लाइसेंस फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के जरिए हासिल किया गया। इसके आधार पर शैली ट्रेडर्स के प्रोप्राइटर भोला प्रसाद और उसके बेटे एवं सरगना शुभम जायसवाल से महज कागज में छह करोड़ की न्यू फेंसाडील सिरप खरीदी। इसे भदोही की फर्मों को आपूर्ति भी दिखा दिया गया। जांच में पाया कि दर्शाए गए पते पर न तो कभी कोई दवा फर्म संचालित थी न ही कोई सिरप की खेप ही सोनभद्र पहुंची। न्यायालय ने पाया कि शैली ट्रेडर्स के आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा बनते हुए आरोपी ने कोडिनयुक्त सिरप की तस्करी में सहयोग दिया। इस सिरप का प्रयोग मानव जीवन के लिए हानिकारक भी है। इसलिए फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती।
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माइंस मैनेजर सहित दो को हाईकोर्ट से मिली राहत
सोनभद्र। ओबरा खदान हादसे में गिरफ्तार किए गए माइंस मैनेजर अनिल कुमार झा और माइंस मेठ अजय कुमार को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। दाखिल की गई जमानत याचिका में खदान मालिक और उनके पार्टनर दिलीप केशरी की गिरफ्तारी पर रोक लगाए जाने को आधार बनाते हुए दलील दी गई थी। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की बेंच ने इसे विचारणीय मसला माना और कई शर्तें निर्धारित करते हुए जमानत अर्जी मंजूर कर ली।
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