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Sonebhadra News: महिला की गला काटकर हत्या करने वाले को अंतिम सांस तक मिली जेल

Wed, 21 Feb 2024 11:58 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 21 Feb 2024 11:58 PM IST
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The man who murdered a woman by slitting her throat was jailed till his last breath.
सोनभद्र। चार साल पहले जादू-टोना के शक में गला काटकर महिला की नृशंस हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या प्रथम एहसानुल्लाह खां ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सजा सुनाते समय कोर्ट ने दोषी को अंतिम सांस तक जेल में रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मृतका के पति को विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से एक लाख रुपये प्रतिकर सरकार के माध्यम से दिलाने को भी कहा।
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अभियोजन के मुताबिक ओबरा थाना क्षेत्र के पनारी टोला खैराही निवासी शिवमंगल गोंड ने 17 अक्तूबर 2019 को थाने में तहरीर देकर पत्नी के हत्या किए जाने की सूचना दी थी। तहरीर में बताया था कि गांव के ही गोपीलाल गाेंड के बेटे राजेंद्र व बहू कुंती के निधन पर वह अंतिम संस्कार में शामिल होने जंगल पिपरहिया में गया था। उसकी पत्नी कौशल्या मृत दंपती के घर ढांढ़स बंधाने गई थी। इसी दौरान मृतक राजेंद्र के भाई फूल सिंह ने गड़ासा से वार कर कौशल्या की हत्या कर दी। सूचना पाकर वह भागते हुए मौके पर पहुंचा तो पत्नी का सिर और धड़ अलग-अलग पड़ा था। फूल सिंह ने अपने भाई व भाभी की मौत के लिए जादू-टोना करने का आरोप लगाते हुए कौशल्या की नृशंस हत्या कर दी। तहरीर के आधार पर ओबरा पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना की और चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनने, गवाहों के बयान और तथ्यों के परीक्षण के बाद बुधवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने फूल सिंह को दोषी करार देते हुए उसे अंतिम सांस तक जेल में रखने और 25 हजार रुपये अर्थदंड वसूलने का आदेश दिया। अर्थदंड न देने पर उसे एक वर्ष की अतिरिक्त कैद होगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आदेश दिया कि मृतका के पति शिवमंगल को सरकार की ओर से एक लाख रुपये का प्रतिकर भी दिलाया जाय।
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महिला की हत्या को कोर्ट ने भी विभत्स माना, लेकिन मृत्यु दंड देने के लिए पर्याप्त कारणों का अभाव होने का आधार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि समाज में फैली हुई अशिक्षा और अंधविश्वास एक ऐसा तथ्य है, जिससे प्रत्येक अशिक्षित व्यक्ति और कभी-कभी शिक्षित व्यक्ति भी गंभीर रूप से प्रभावित हो जाता है। लोगों को शिक्षित बनाना, अंधविश्वास न पनपने देना और अंध विश्वास फैलाने वाले तत्वों पर प्रभावी कार्रवाई कर उन्हें समाज से दूर रखने का कार्य राज्य सरकार का है। इन कार्यों की विफलता सामान्य मस्तिष्क के लोगों को प्रभावित करेगी और ऐसे तथ्यों से प्रभावित होकर किए गए अपराध को आवर्धक परिस्थितियों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अंध विश्वास से प्रभावित मस्तिष्क अशिक्षा और परिवेश से प्रभावित होता है और इस परिवेश से प्रभावित मस्तिष्क का व्यक्ति अपराधी होते हुए भी उदारता का पात्र है।
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