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रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव ने बढ़ा दी परिवहन निगम की परेशानी

Sun, 27 Feb 2022 11:43 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 27 Feb 2022 11:43 PM IST
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The impact of the Russo-Ukraine war increased the troubles of the Transport Corporation
यूक्रेन और रूस के बीच छिड़ी जंग का असर भारत पर भी दिखने लगा है। खाद्य सामानों के दाम में वृद्धि हो रही है तो पेट्रो पदार्थ की कीमतें भी आंखें तरेरने लगी हैं। फिलहाल इसका असर रोडवेज बसों पर पड़ा है। बाजार भाव पर छूट के साथ मिलने वाला डीजल बंद होने के बाद रोडवेज की बसों में ईंधन का खर्च बढ़ गया है। इससे राहत पाने के लिए अब मुख्यालय ने डिपो की बजाय बसों को बाहर के पंप से डीजल खरीदने का निर्देश दिया है। इस पर निगरानी के लिए एक कर्मचारी को भी चिह्नित कर पंप पर बैठा दिया गया है।
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तेल कंपनियां रोडवेज को बाजार मूल्य पर ही डीजल देती रही हैं। इसमें सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी शामिल नहीं होती थी। तब रोडवेज और बाहर के पंप पर डीजल के दाम में 4-5 रुपये का अंतर था। यूक्रेन और रूस में युद्ध छिड़ने के बाद पिछले कुछ दिनों से डीजल के दाम में तेजी से वृद्धि हुई है। चुनावी असर के कारण निजी पंपों पर मिलने वाले डीजल के दाम पर तो कोई असर नहीं पड़ा है लेकिन रोडवेज को दिए जाने वाले डीजल का दाम तेल कंपनियों ने बढ़ा दिया है। अब अंतर 6-7 रुपये तक पहुंच गया है। इससे रोडवेज का रोजाना 2-3 लाख का अधिक खर्च बढ़ गया था। ऐसे में मुख्यालय ने निर्देश जारी कर सभी बसों में बाहर के निजी पंपों से डीजल भरवाने की छूट दी है। पहले 91-92 रुपये प्रति लीटर की दर से मिलने वाला डीजल अब बसों को 86 रुपये में ही सुलभ हो रहा है। फ्लीट कार्ड से डीजल के भुगतान पर अतिरिक्त छूट भी मिल रही है। इससे डिपो प्रबंधन का मुुनाफा बढ़ा है।
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जिले में सोनभद्र और विंध्यनगर डिपो की 108 बसों को हिंदुआरी स्थित विनायक फिलिंग स्टेशन से डीजल लेने के लिए निर्देशित किया गया है। वहीं डिपो पर डीजल का हिसाब रखने के लिए रखे गए बाबू को भी उसी टंकी पर बैठाया गया है। जो बसों में डीजल भराने के बाद बस संख्या सहित पर्ची का भी हिसाब कर रहा है। बाहर निजी संस्थानों से डीजल रिफ्यूलिंग कराने से डिपो प्रबंधन को साढ़े पांच लाख तक की मासिक बचत होगी। अभी हाल में 10-12 हजार लीटर डीजल डीपो पर रिजर्व रखा गया है। जिसका उपयोग इमरजेंसी कार्यों के लिए किया जा सकता है। वहीं निजी संस्थानों से भुगतान किए जा रहे डीजल के दाम पर एक रुपये से अधिक की छूट भी मिल रही है। जिसे डिपो अतिरिक्त बचत के रूप में भी देख रहा है।
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यात्रियों की बढ़ी मुश्किल
बाहर से डीजल खरीदने पर रोडवेज का तो मुनाफा हो रहा है लेकिन यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। अब डिपो पर बसों का आना कम हो रहा है। ज्यादातर बसें डिपो के बाहर मोड़ पर ही यात्रियों को छोड़कर निकल जा रही हैं। डिपो पर खड़े यात्रियों को बस नहीं मिल रही है।

सोनभद्र डिपो से लगी 108 बसों को विनायक फिलिंग स्टेशन से डीजल लेने के लिए निर्देशित किया गया है। मुख्यालय से सूचना मिलने के बाद डिपो के बाबू को भी वहीं बैठा दिया गया है, जो डीजल का हिसाब वहां से देख रहा है। इसके अलावा 10-12 हजार लीटर डीजल डिपो पर रिजर्व रखा गया है। - एके सिंह, एआरएम, सोनभद्र डिपो।
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