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Sonebhadra News: सरकार दे रही मुफ्त टैबलेट, पर लेने नहीं आ रहे 1646 अभ्यर्थी

Fri, 02 May 2025 10:56 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 02 May 2025 10:56 PM IST
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The government is giving free tablets, but 1646 candidates are not coming to get them
सोनभद्र। युवाओं का कौशल निखारने और तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए सरकार उन्हें निशुल्क टैबलेट व स्मार्टफोन दे रही है। बावजूद जिले के सैकड़ों युवा टैबलेट लेने को तैयार ही नहीं है। इनकी संख्या 1600 से भी अधिक है। विभिन्न आईटीआई व पॉलिटेक्निक संस्थानों में पंजीकृत इन विद्यार्थियों को लगातार टैबलेट लेने के लिए बुलावा भेजा जा रहा है, मगर वह आने को तैयार ही नहीं है। उनके इंतजार में ही अब शिक्षण सत्र भी खत्म होने को है। विद्यार्थियों के निशुल्क टैबलेट लेने न आने से उनके पंजीकरण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को निशुल्क स्मार्ट फोन का वितरण किया जाना है। वहीं आईटीआई और पॉलीटेक्निक की कौशल आधारित शिक्षा लेने वाले विद्यार्थियों को टैबलेट प्रदान किया जा रहा है। शिक्षण सत्र 2024-25 में वितरण के करीब साढ़े सात हजार टैबलेट जिले में आए थे। इनमें से छह हजार का वितरण कई चरणों में किया जा चुका है, लेकिन 1646 टैबलेट अब भी गोदाम में डंप पड़े हैं। इनमें ज्यादातर निजी संस्थाओं में पंजीकृत अभ्यर्थियों के हैं। शत-प्रतिशत वितरण के लिए नोडल संस्था माध्यमिक शिक्षा विभाग पर लगातार शासन स्तर से दबाव बन रहा है। विभाग भी संबंधित संस्थानों से संपर्क कर पंजीकृत विद्यार्थियों का डाटा सत्यापित कराते हुए टैबलेट वितरण के निर्देश दे रहा है, मगर निजी संस्थान इसमें रुचि नहीं दिखा रहे। कई जगह से पंजीकृत अभ्यर्थियों के ही न आने की दलील दी जा रहा है। अब तक 4-5 बार पत्र भेजने के बाद भी निजी संस्थाओं की ओर से टैबलेट के लिए पंजीकृत अभ्यर्थियों को उपस्थित न करा पाने से विभाग भी पशोपेश में हैं। तमाम आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल संबंधितों को मई में अंतिम मौका दिया गया है। इसके बाद टैबलेट वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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इसलिए नहीं आ रहे अभ्यर्थी
निशुल्क टैबलेट पाने के लिए अभ्यर्थियों के न आने की कई वजह बताई जा रही है। इसमें निजी संस्थाओं की ओर से विद्यार्थियों का उत्पीड़न भी मुख्य है। बताते हैं कि कई संस्थाओं की ओर से रिजल्ट व टैबलेट के बदले विद्यार्थियों से अतिरिक्त शुल्क की मांग की जाती है। यह राशि टैबलेट के मूल्य से भी ज्यादा है। इसके अलावा कई ऐसे अभ्यर्थियों का भी पंजीयन किया गया है, जो वास्तव में दूसरे प्रांतों में रहकर रोजगार कर रहे हैं। अब वह सिर्फ टैबलेट के लिए हजारों रुपये खर्च करना नहीं चाहते हैं। फर्जी नामांकन भी एक वजह है। फिलहाल विभाग संस्थाओं से संपर्क साधने में जुटा है।
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टैबलेट वितरण के लिए निजी संस्थाओं से पंजीकृत अभ्यर्थियों को उपस्थित कराने के लिए लगातार निर्देशित किया जा रहा है, मगर वह अभ्यर्थियों के बाहर होने की दलील दे रहे हैं। अभी 1646 टैबलेट का वितरण नहीं हुआ है। इसमें से कुछ टैबलेट का सत्यापन कराकर वितरण जल्द ही करा दिया जाएगा। इसके बाद जो भी बचेगा, उसे शासन को वापस कर दिया जाएगा। -जयराम सिंह, डीआईओएस।
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