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Sonebhadra News: नगर में आ गए गांव के सामुदायिक शौचालय पर बदहाली बरकरार

Sun, 11 May 2025 12:24 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 11 May 2025 12:24 AM IST
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The community toilets of the village which have come to the city are in a bad condition
स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में बने सामुदायिक शौचालय बदहाली के शिकार हैं। कई जगह इनका नियमित ताला भी नहीं खुलता तो कुछ जगह सामुदायिक शौचालय पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।
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स्वयं सहायता समूहों को इनके संचालन की जिम्मेदारी दी गई, मगर वह भी सिर्फ कोरम पूरा कर रही है। नगरीय क्षेत्रों में शामिल हो चुकी ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालय उपयोग करने लायक नहीं रह हैं।
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पंचायती राज विभाग ने उनसे मुंह मोड़ लिया है और निकाय प्रशासन उन पर ध्यान नहीं दे रहा। गांवों को स्वच्छ बनाने के लिए घर-घर शौचालय का निर्माण कराया गया था।
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जिन परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय का लाभ नहीं मिल पाया था, ऐसे लोगों के लिए गांव में सामुदायिक शौचालय बनवाए। पूरे जिले में सभी 629 ग्राम पंचायतों में एक-एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था।
पंचायती राज विभाग ने शौचालयों में सभी सुविधाएं उपलब्ध कराकर स्वयं सहायता समूहों का संचालन का जिम्मा सौंपा था। इसके बदले समूह की महिलाओं को प्रतिमाह छह हजार रुपये मानदेय और सामग्री मद में तीन हजार रुपये भी दिया जाता है।
व्यक्तिगत और सामुदायिक शौचालयों से संतृप्त होने के बाद गांवों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है। कागजों में सभी सामुदायिक शौचालय सुचारू रूप से चल रहे हैं।
नियमित उनका ताला भी खुल रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। नगवां, दुद्धी, म्योरपुर, चोपन के सुदूर इलाकों में बने सामुदायिक शौचालय यदा-कदा ही खुल रहे हैं।

पंचायती राज भूला, नगर निकायों को परवाह नहीं
करीब ढाई साल पहले तक जिले में 629 ग्राम पंचायतें थीं। नगर निकायों के सीमा विस्तार के बाद आठ ग्राम पंचायतें नगरों का हिस्सा हो गईं। वहां की सभी संपत्तियां भी संबंधित निकाय को सुपुर्द कर दिया गया। इन पंचायतों में पहले से बने सामुदायिक शौचालय का अब हाल भी कोई पूछने वाला नहीं है। हाल यह है कि हस्तांतरण के वर्षों बाद भी उन पर संबंधित ग्राम पंचायत का ही नाम दर्ज है। रॉबर्ट्सगंज नगर पालिका में शामिल बढ़ौली ग्राम पंचायत का सामुदायिक शौचालय अकड़हवा पोखरा के पीछे है। यह गंदगी से पटा पड़ा है। दरवाजे-खिड़कियां क्षतिग्रस्त हैं। पानी की भी सुविधा नहीं है। इसी तरह पन्नूगंज मार्ग पर ही सहजौर ग्राम का सामुदायिक शौचालय भी क्रियाशील नहीं है। यह भी नगर में शामिल हो चुका है। कम्हारी, उरमौरा, पुसौली गांव के शौचालय की भी कमोवेश ऐसी ही स्थिति है।
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बंद पड़ा है खेतकटवा का सामुदायिक शौचालय
कोन। विकासखंड के सभी ग्राम पंचायतों में लाखों की लागत से सामुदायिक शौचालय का निर्माण तो कराया गया, मगर अधिकांश में सामुदायिक शौचालय का कोई उपयोग नहीं हो रहा। ग्रामीण खुले में शौच करने को विवश हैं। ग्राम पंचायत खेतकटवा में बने सामुदायिक शौचालय पर पिछले डेढ़ वर्षों से ताला लटक रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक शौचालय में पानी की व्यवस्था नहीं है। इसी तरह ग्राम पंचायत बरवाखाड़, नौडीहा, रोरवा, मोहिउद्दीनपुर, चननी, पिंडारी, ब्रहमोरी समेत कई ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालय शोपीस बने हुए हैं। संवाद


प्रत्येक सामुदायिक शौचालय पर केयर टेकर नियुक्त हैं। वह सुबह और शाम को सामुदायिक शौचालय खोल भी रहे हैं। किसी गांव में शौचालय पर ताला बंद रहने या संचालन न होने की शिकायत है तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
-नमिता शरण, जिला पंचायत राज अधिकारी।
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