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Sonebhadra News: 24 घंटे में एक बार आता है टैंकर, पानी के लिए जूझते हैं लोग
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सोनभद्र। दोपहर की चिलचिलाती धूप में जब लोग घर में दुबके हुए थे, तब मुसही के चरका टोला में महिलाएं और बच्चे डब्बा-बाल्टी लेकर टैंकर के आगे लाइन लगाए हुए थे। उन्हें न धूप की चिंता थी और न ही लू के थपेड़ों की। पहले पानी भरने की उनमें मची होड़ बता रही थी कि वह किस पीड़ा से जूझ रहे हैं। मुसही वह गांव है, जहां से जिला मुख्यालय की दूरी बमुश्किल दो किमी होगी। बगल में ही इंजीनियरिंग कॉलेज है तो पुलिस ऑफिस और निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज भी महज 700 मीटर दूर है।
करीब सौ घरों की आबादी वाले चरका टोला के लोग पिछले दो माह से पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। हैंडपंप सूख चुके हैं और अधिकांश घरों में लगे सबमर्सिबल पंप भी पानी देने में हाफ रहे हैं। ऐसे में लोगों के पास टैंकर का पानी ही सहारा बना हुआ है। ग्राम पंचायत की ओर से दिन में एक बार टैंकर आता है। इससे भी काफी मशक्कत के बाद कोई सात-आठ तो कोई दस डब्बा पानी भर पाता है। अगले दिन टैंकर आने तक यही पानी उनकी दिनचर्या की सभी जरूरत का सहारा बनता है। बस्ती के लोग कहते हैं कि गर्मी के दिन उनके लिए सबसे कठिन होते हैं। वर्षों से वह पानी के इस संकट से जूझते आ रहे हैं, लेकिन अब तक इसका कोई समाधान नहीं हुआ है। लड़-झगड़कर अगर टैंकर से पानी नहीं भरें तो वह भी नसीब नहीं होगा। इस बस्ती में सड़क किनारे हर घर के बाहर 20-25 खाली डब्बे हर वक्त नजर आएंगे। लोग इसी ताक में रहते हैं कि कब टैंकर आए और वह पानी भर लें। मुख्यालय से सटे इस गांव में पानी का संकट बता रहा है कि सुदूरवर्ती इलाकों में स्थिति और गंभीर है।
ग्राम पंचायतों में प्रधान व सेक्रेट्री के माध्यम से जरूरत के अनुसार टैंकर से पानी की आपूर्ति कराई जा रही है। हर रोज करीब ढाई सौ गांवों में साढ़े तीन सौ से अधिक टैंकर चल रहे हैं। फिर भी कहीं दिक्कत हो तो लोग ब्लाक, जिला या कंट्रोल रूम में सूचना दें, पानी की व्यवस्था कराई जाएगी। - विशाल सिंह, डीपीआरओ।
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करीब सौ घरों की आबादी वाले चरका टोला के लोग पिछले दो माह से पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। हैंडपंप सूख चुके हैं और अधिकांश घरों में लगे सबमर्सिबल पंप भी पानी देने में हाफ रहे हैं। ऐसे में लोगों के पास टैंकर का पानी ही सहारा बना हुआ है। ग्राम पंचायत की ओर से दिन में एक बार टैंकर आता है। इससे भी काफी मशक्कत के बाद कोई सात-आठ तो कोई दस डब्बा पानी भर पाता है। अगले दिन टैंकर आने तक यही पानी उनकी दिनचर्या की सभी जरूरत का सहारा बनता है। बस्ती के लोग कहते हैं कि गर्मी के दिन उनके लिए सबसे कठिन होते हैं। वर्षों से वह पानी के इस संकट से जूझते आ रहे हैं, लेकिन अब तक इसका कोई समाधान नहीं हुआ है। लड़-झगड़कर अगर टैंकर से पानी नहीं भरें तो वह भी नसीब नहीं होगा। इस बस्ती में सड़क किनारे हर घर के बाहर 20-25 खाली डब्बे हर वक्त नजर आएंगे। लोग इसी ताक में रहते हैं कि कब टैंकर आए और वह पानी भर लें। मुख्यालय से सटे इस गांव में पानी का संकट बता रहा है कि सुदूरवर्ती इलाकों में स्थिति और गंभीर है।
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ग्राम पंचायतों में प्रधान व सेक्रेट्री के माध्यम से जरूरत के अनुसार टैंकर से पानी की आपूर्ति कराई जा रही है। हर रोज करीब ढाई सौ गांवों में साढ़े तीन सौ से अधिक टैंकर चल रहे हैं। फिर भी कहीं दिक्कत हो तो लोग ब्लाक, जिला या कंट्रोल रूम में सूचना दें, पानी की व्यवस्था कराई जाएगी। - विशाल सिंह, डीपीआरओ।
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