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Sonebhadra News: आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत निस्तारण में नजीर बना सोनभद्र
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आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण में साेनभद्र प्रदेश के दूसरे जिलों के लिए मिसाल बन गया है। एक साल पहले 69वें स्थान पर रहा जिला जुलाई की रैंकिंग में पूरे प्रदेश में अव्वल आया है। यही नहीं पिछले तीन माह से लगातार टॉप-10 में भी बना हुआ है। इसके लिए खुद डीएम के स्तर से एक-एक शिकायतों की नियमित निगरानी और सख्ती के साथ अफसरों की जवाबदेही तय करने को कारण माना जा रहा है।
जन शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण समाधान और उस पर सतत निगरानी के लिए प्रदेश सरकार ने इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम (आईजीआरएस) पोर्टल स्थापित किया है। विभिन्न माध्यमों से आने वाली शिकायतों की पोर्टल के माध्यम से निगरानी की जाती है। आईजीआरएस पर आने वाली हर शिकायत को समय सीमा के अंदर निस्तारित करना होता है। निस्तारण के बाद मुख्यालय से फोन पर शिकायतकर्ता से जानकारी भी ली जाती है कि वह निस्तारण से संतुष्ट है या नहीं। पिछले साल जून में सोनभद्र 69वीं रैंक के साथ प्रदेश के फिसड्डी जिलों में था। इसके बाद डीएम चंद्र विजय सिंह ने शिकायतों के निस्तारण की खुद निगरानी शुरू की। निर्धारित समय सीमा के बाद भी शिकायत को लंबित रखने वाले अफसरों पर जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई शुरू की। इसका असर है कि जिले की रैंकिंग में लगातार सुधार हो रहा है। सितंबर में सोनभद्र 32वें रैंक पर आ गया था। इसके बाद दिसंबर में पहले रैंक पर आकर फिर पिछड़ गया था। अब पिछले तीन माह से लगातार जिला टॉप-10 में शामिल है। जुलाई माह की ताजा रैंकिंग में सोनभद्र को फिर पहला स्थान मिला है। भौगोलिक रूप से दुरुह और संचार सेवाओं के लिहाज से अब भी कई इलाकों के वंचित होने के बावजूद इस उपलब्धि को दूसरे जिलों के लिए नजीर माना जा रहा है।
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सबसे ज्यादा शिकायतें 1076 पर
लोगों की सहूलियत के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 नंबर चालू किया गया है। सबसे ज्यादा शिकायतें इसी पर आ रही है। दूरदराज बैठे लोग फोन के माध्यम से 1076 पर फोन कर अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं, जिसके बाद उसका समाधान और निगरानी शुरू हो जाती है। 31 जुलाई तक के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर 28307 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिसमें 27420 का समाधान किया जा चुका है। लंबित 887 शिकायतें भी समय सीमा के अंदर वाली हैं। ऑनलाइन संदर्भ की 16774 में 16260 शिकायतों का निस्तारण हो चुका है। वहीं अन्य माध्यमों से प्राप्त 27943 प्रकरणों में से भी 27215 का समाधान किया गया है। डिफाल्टर श्रेणी की शिकायतें शून्य हैं।
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घर बैठे की शिकायत, शुरू हो गई कार्रवाई
केस एक:
चोपन की सावित्री देवी ने शिल्पी गांव में मनरेगा के कार्यों में लघु सिंचाई विभाग के एक्सईएन का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर भुगतान किए जाने की शिकायत की गई थी। शिकायत का संज्ञान लेते हुए डीएम ने त्वरित जांच शुरू करा दी है। दस्तावेजों में हस्ताक्षर मिलान के साथ जेई की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है।
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केस दो::
कोन ब्लाॅक के राम कुमार ने आवास के लिए आवेदन किया। पात्रता के बावजूद उसे आवास नहीं दिया रहा था। पोर्टल पर शिकायत आने के बाद 15 दिनों में जांच के बाद उसका चयन योजना के तहत करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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केस तीन::
चतरा ब्लाॅक के ग्राम पंचायत बनौली निवासी प्रमोद कुमार मिश्रा ने 15 जुलाई को शिकायत की थी कि पूर्व प्रधान और सेकेट्री ने गांव में कई लोगों के शौचालय का पैसा निकाल लिया था, लेकिन निर्माण नहीं कराया। डीपीआरओ ने तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में पुष्टि के बाद रिकवरी की जाएगी।
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जन शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण समाधान और उस पर सतत निगरानी के लिए प्रदेश सरकार ने इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम (आईजीआरएस) पोर्टल स्थापित किया है। विभिन्न माध्यमों से आने वाली शिकायतों की पोर्टल के माध्यम से निगरानी की जाती है। आईजीआरएस पर आने वाली हर शिकायत को समय सीमा के अंदर निस्तारित करना होता है। निस्तारण के बाद मुख्यालय से फोन पर शिकायतकर्ता से जानकारी भी ली जाती है कि वह निस्तारण से संतुष्ट है या नहीं। पिछले साल जून में सोनभद्र 69वीं रैंक के साथ प्रदेश के फिसड्डी जिलों में था। इसके बाद डीएम चंद्र विजय सिंह ने शिकायतों के निस्तारण की खुद निगरानी शुरू की। निर्धारित समय सीमा के बाद भी शिकायत को लंबित रखने वाले अफसरों पर जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई शुरू की। इसका असर है कि जिले की रैंकिंग में लगातार सुधार हो रहा है। सितंबर में सोनभद्र 32वें रैंक पर आ गया था। इसके बाद दिसंबर में पहले रैंक पर आकर फिर पिछड़ गया था। अब पिछले तीन माह से लगातार जिला टॉप-10 में शामिल है। जुलाई माह की ताजा रैंकिंग में सोनभद्र को फिर पहला स्थान मिला है। भौगोलिक रूप से दुरुह और संचार सेवाओं के लिहाज से अब भी कई इलाकों के वंचित होने के बावजूद इस उपलब्धि को दूसरे जिलों के लिए नजीर माना जा रहा है।
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सबसे ज्यादा शिकायतें 1076 पर
लोगों की सहूलियत के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 नंबर चालू किया गया है। सबसे ज्यादा शिकायतें इसी पर आ रही है। दूरदराज बैठे लोग फोन के माध्यम से 1076 पर फोन कर अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं, जिसके बाद उसका समाधान और निगरानी शुरू हो जाती है। 31 जुलाई तक के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर 28307 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिसमें 27420 का समाधान किया जा चुका है। लंबित 887 शिकायतें भी समय सीमा के अंदर वाली हैं। ऑनलाइन संदर्भ की 16774 में 16260 शिकायतों का निस्तारण हो चुका है। वहीं अन्य माध्यमों से प्राप्त 27943 प्रकरणों में से भी 27215 का समाधान किया गया है। डिफाल्टर श्रेणी की शिकायतें शून्य हैं।
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घर बैठे की शिकायत, शुरू हो गई कार्रवाई
केस एक:
चोपन की सावित्री देवी ने शिल्पी गांव में मनरेगा के कार्यों में लघु सिंचाई विभाग के एक्सईएन का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर भुगतान किए जाने की शिकायत की गई थी। शिकायत का संज्ञान लेते हुए डीएम ने त्वरित जांच शुरू करा दी है। दस्तावेजों में हस्ताक्षर मिलान के साथ जेई की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है।
केस दो::
कोन ब्लाॅक के राम कुमार ने आवास के लिए आवेदन किया। पात्रता के बावजूद उसे आवास नहीं दिया रहा था। पोर्टल पर शिकायत आने के बाद 15 दिनों में जांच के बाद उसका चयन योजना के तहत करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
केस तीन::
चतरा ब्लाॅक के ग्राम पंचायत बनौली निवासी प्रमोद कुमार मिश्रा ने 15 जुलाई को शिकायत की थी कि पूर्व प्रधान और सेकेट्री ने गांव में कई लोगों के शौचालय का पैसा निकाल लिया था, लेकिन निर्माण नहीं कराया। डीपीआरओ ने तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में पुष्टि के बाद रिकवरी की जाएगी।