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रैंकिंग में पिछड़ा सोनभद्र, इस बार पांचवां स्थान, नीति आयोग जारी की सूची
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कौशल विकास और वित्तीय समावेशन की खराब प्रगति ने आकांक्षी जिलों की श्रेणी में सोनभद्र की ओवरऑल रैंकिंग गिरा दी है। पिछले माह पहले नंबर पर रहा सोनभद्र अब पांचवें नंबर पर आ गया है। सबसे खराब स्थिति कौशल विकास और वित्तीय समावेशन की है। इस श्रेणी में जिले को 102वीं रैंक मिला है। इस क्षेत्र में सुधार होता तो नंबर वन का रुतबा इस बार भी कायम रहता।
विभिन्न मापदंडों के आधार पर नीति आयोग ने देश के 112 अति पिछड़े जिलों को चिह्नित किया है। इसमें सोनभद्र समेत यूपी के आठ जिले हैं। इन जिलों में स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, बुनियादी ढांचा, कृषि, कौशल विकास और वित्तीय समावेशन के क्षेत्रों में नियमित कार्य चल रहा है। महीने की उपलब्धि के आधार पर रैंकिंग भी निर्धारित की जाती है। पिछले माह सोनभद्र पूरे देश में नंबर एक पर था। इस बार राजस्थान का बारन शीर्ष पर पहुंच गया है। कुल 54.2 प्रतिशत अंकों के साथ सोनभद्र पांचवें नंबर पर है। यूपी का सिद्धार्थनगर दूसरे, चित्रकूट तीसरे और बिहार का कटिहार चौथे नंबर पर है। रैंकिंग में पिछड़ने की मुख्य वजह वित्तीय समावेशन व कौशल विकास में पिछड़ने को कारण माना जाना रहा है। रैंकिंग निर्धारण के इस मापदंड में जनपद 102 नंबर पर है। स्वास्थ्य एवं पोषण क्षेत्र में 5वीं, शिक्षा क्षेत्र में 9वीं, कृषि व बुनियादी विकास में 32वीं रैंक प्राप्त हुई है।
कौशल विकास के क्षेत्र में लक्ष्य से कई गुना कार्य पहले ही हो चुका है। ऐसे में डेल्टा रैंकिंग में अपेक्षाकृत सुधार नहीं हो पाया है। इसके आधार पर पूर्व में हम नंबर वन रैंक भी रह चुके हैं। आगे इसे सुधारने का प्रयास किया जाएगा। - निशांत ओझा, जिला प्रबंधक, कौशल विकास मिशन।
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विभिन्न मापदंडों के आधार पर नीति आयोग ने देश के 112 अति पिछड़े जिलों को चिह्नित किया है। इसमें सोनभद्र समेत यूपी के आठ जिले हैं। इन जिलों में स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, बुनियादी ढांचा, कृषि, कौशल विकास और वित्तीय समावेशन के क्षेत्रों में नियमित कार्य चल रहा है। महीने की उपलब्धि के आधार पर रैंकिंग भी निर्धारित की जाती है। पिछले माह सोनभद्र पूरे देश में नंबर एक पर था। इस बार राजस्थान का बारन शीर्ष पर पहुंच गया है। कुल 54.2 प्रतिशत अंकों के साथ सोनभद्र पांचवें नंबर पर है। यूपी का सिद्धार्थनगर दूसरे, चित्रकूट तीसरे और बिहार का कटिहार चौथे नंबर पर है। रैंकिंग में पिछड़ने की मुख्य वजह वित्तीय समावेशन व कौशल विकास में पिछड़ने को कारण माना जाना रहा है। रैंकिंग निर्धारण के इस मापदंड में जनपद 102 नंबर पर है। स्वास्थ्य एवं पोषण क्षेत्र में 5वीं, शिक्षा क्षेत्र में 9वीं, कृषि व बुनियादी विकास में 32वीं रैंक प्राप्त हुई है।
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कौशल विकास के क्षेत्र में लक्ष्य से कई गुना कार्य पहले ही हो चुका है। ऐसे में डेल्टा रैंकिंग में अपेक्षाकृत सुधार नहीं हो पाया है। इसके आधार पर पूर्व में हम नंबर वन रैंक भी रह चुके हैं। आगे इसे सुधारने का प्रयास किया जाएगा। - निशांत ओझा, जिला प्रबंधक, कौशल विकास मिशन।
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