{"_id":"687a8e1f4dbdb646580f2e4a","slug":"slowness-in-door-to-door-garbage-collection-and-disposal-spoiled-the-ranking-of-the-bodies-sonbhadra-news-c-194-1-son1002-131435-2025-07-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: डोर टू डोर कूड़ा उठान और निस्तारण में सुस्ती ने बिगाड़ी निकायों की रैंकिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: डोर टू डोर कूड़ा उठान और निस्तारण में सुस्ती ने बिगाड़ी निकायों की रैंकिंग
विज्ञापन
सोनभद्र। साफ-सफाई को लेकर निरंतर अभियान चलाने और संसाधनों पर करोड़ों खर्च के बाद भी स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग ने जिले के निकायों की पोल खोल दी है। पहली बार सर्वेक्षण में शामिल हुए अनपरा और डाला बाजार को छोड़ दें तो अन्य सभी निकायों की रैंकिंग प्रदेश में काफी नीचे आ गई है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के बाद उसकी छंटाई और कूड़ा निस्तारण के मामले में निकाय फिसड्डी साबित हुए हैं। सबसे खराब स्थिति चोपन, दुद्धी और पिपरी नगर पंचायत की है। इन तीनों निकायों में सत्ताधारी गठबंधन से जुड़े अध्यक्ष हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगरों को स्वच्छ बनाने के लिए की जा रही कवायदों की हकीकत परखने के मकसद से भारत सरकार के आवासीय एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की तरफ से हर वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण की प्रतियोगिता कराई जाती है। निकायों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, कूड़ा छंटाई, निस्तारण सहित अन्य बिंदुओं पर आकलन के बाद रैंकिंग तय की जाती है। वर्ष 2024 में हुए सर्वेक्षण की रैंकिंग बृहस्पतिवार को जारी हुई। 20 हजार से 50 हजार की आबादी वाले निकायों की श्रेणी में नगर पालिका सोनभद्र को रखते हुए मूल्यांकन किया गया है। आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों की सफाई में नगर पालिका को भले ही शत-प्रतिशत अंक मिले हैं, लेकिन डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और पृथक्करण में बेहद खराब स्थिति है। कूड़ा कलेक्शन में सिर्फ 36 प्रतिशत और घरों में सूखा व गीला कचरा अलग-अलग रखने के मानक पर सिर्फ 11 प्रतिशत अंक हासिल हुए हैं। नतीजा प्रदेश स्तर पर नगर पालिका की रैंकिंग 298 पहुंच गई है, जबकि पिछले साल 104वीं रैंक थी। 20 हजार से कम आबादी वाले निकायों में शामिल चोपन नगर पंचायत की स्टेट रैंकिंग 269 से बढ़कर 744 तक पहुंच गई है। डोर-टू-डोर कलेक्शन में निकाय का प्रदर्शन अच्छा है, लेकिन स्रोत पर ही कूड़ा अलग-अलग रखने में महज दो प्रतिशत अंक मिले हैं। यही हाल दुद्धी और पिपरी नगर पंचायत का है। इन तीनों नगर पंचायतों में सत्ताधारी दल से अध्यक्ष होने के कारण बजट व सुविधाएं भी अन्य निकायों से बेहतर मिल रही हैं, बावजूद इन निकायों की खराब स्थिति चिंताजनक है।
-- -
सबसे ज्यादा चुनौती, फिर भी बेहतर प्रदर्शन
आबादी के लिहाज से अनपरा जिले की सबसे बड़ी निकाय है। इसने 50 हजार से तीन लाख की आबादी वाली श्रेणी में हिस्सा लिया था। नवसृजित निकाय और बड़ी आबादी होने के चलते यहां चुनौतियां भी अधिक रहीं, बावजूद स्वच्छता के मामले में इस निकाय ने बेहतर प्रदर्शन किया है। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन में 66 और स्रोत स्तर से ही कूड़ा अलग-अलग रखने के मामले में 27 प्रतिशत, जबकि छंटाई व प्रोसेसिंग में 98 प्रतिशत अंक हासिल हुआ है। सबसे छोटी निकाय चुर्क-गुरमा में भी बजट और संसाधनों की चुनौती के बावजूद हर क्षेत्र में अच्छे अंक प्राप्त किए हैं।
विज्ञापन
-- -
यहां सुधार की जरूरत
इंदौर की तरह अपने निकायों को स्वच्छता में अव्वल बनाने के लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। जिले की सभी निकायों को घरों में गीला व सूखा कचरा अलग-अलग रखने के मामले में सबसे कम अंक मिले हैं। अमूमन एक ही डस्टबिन में लोग कूड़ा रखते हैं और उसे एक साथ बाहर निकाल देते हैं। इससे कूड़े की छंटाई और प्रसंस्करण में दिक्कत आ रही है।
-- -
पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण के मानक अलग थे। बावजूद निकायों ने राष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन किया है। स्टेट रैंकिंग में गिरावट के कारणों का अध्ययन कर सुधार किया जाएगा। जन सहयोग के माध्यम से आगे बेहतर प्रदर्शन का प्रयास रहेगा। -सत्यम पांडेय, जिला परियोजना प्रबंधक, स्वच्छ भारत मिशन नगरीय क्षेत्र-सोनभद्र।
-- -
नगर में स्थाई ईओ लंबे समय से नहीं है। इससे कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कार्यों की निगरानी, कर्मचारियों पर सही दबाव न बनने के कारण नगर की सफाई से लेकर विकास कार्य प्रभावित हो रहा है। जो भी कमियां हैं, उसे आगे दूर कराया जाएगा। -उस्मान अली, अध्यक्ष, नगर पंचायत चोपन।
-- -
छोटी नगर पंचायत होने के कारण बजट काफी कम है। संसाधन भी सीमित हैं। बावजूद बेहतर प्रदर्शन का प्रयास रहता है। लोगों में जागरूकता की कमी है। सर्वेक्षण में बताई गई खामियों पर फोकस कर सुधार का प्रयास किया जाएगा। -कमलेश मोहन, नगर पंचायत अध्यक्ष दुद्धी।
विज्ञापन
स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगरों को स्वच्छ बनाने के लिए की जा रही कवायदों की हकीकत परखने के मकसद से भारत सरकार के आवासीय एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की तरफ से हर वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण की प्रतियोगिता कराई जाती है। निकायों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, कूड़ा छंटाई, निस्तारण सहित अन्य बिंदुओं पर आकलन के बाद रैंकिंग तय की जाती है। वर्ष 2024 में हुए सर्वेक्षण की रैंकिंग बृहस्पतिवार को जारी हुई। 20 हजार से 50 हजार की आबादी वाले निकायों की श्रेणी में नगर पालिका सोनभद्र को रखते हुए मूल्यांकन किया गया है। आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों की सफाई में नगर पालिका को भले ही शत-प्रतिशत अंक मिले हैं, लेकिन डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और पृथक्करण में बेहद खराब स्थिति है। कूड़ा कलेक्शन में सिर्फ 36 प्रतिशत और घरों में सूखा व गीला कचरा अलग-अलग रखने के मानक पर सिर्फ 11 प्रतिशत अंक हासिल हुए हैं। नतीजा प्रदेश स्तर पर नगर पालिका की रैंकिंग 298 पहुंच गई है, जबकि पिछले साल 104वीं रैंक थी। 20 हजार से कम आबादी वाले निकायों में शामिल चोपन नगर पंचायत की स्टेट रैंकिंग 269 से बढ़कर 744 तक पहुंच गई है। डोर-टू-डोर कलेक्शन में निकाय का प्रदर्शन अच्छा है, लेकिन स्रोत पर ही कूड़ा अलग-अलग रखने में महज दो प्रतिशत अंक मिले हैं। यही हाल दुद्धी और पिपरी नगर पंचायत का है। इन तीनों नगर पंचायतों में सत्ताधारी दल से अध्यक्ष होने के कारण बजट व सुविधाएं भी अन्य निकायों से बेहतर मिल रही हैं, बावजूद इन निकायों की खराब स्थिति चिंताजनक है।
विज्ञापन
सबसे ज्यादा चुनौती, फिर भी बेहतर प्रदर्शन
आबादी के लिहाज से अनपरा जिले की सबसे बड़ी निकाय है। इसने 50 हजार से तीन लाख की आबादी वाली श्रेणी में हिस्सा लिया था। नवसृजित निकाय और बड़ी आबादी होने के चलते यहां चुनौतियां भी अधिक रहीं, बावजूद स्वच्छता के मामले में इस निकाय ने बेहतर प्रदर्शन किया है। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन में 66 और स्रोत स्तर से ही कूड़ा अलग-अलग रखने के मामले में 27 प्रतिशत, जबकि छंटाई व प्रोसेसिंग में 98 प्रतिशत अंक हासिल हुआ है। सबसे छोटी निकाय चुर्क-गुरमा में भी बजट और संसाधनों की चुनौती के बावजूद हर क्षेत्र में अच्छे अंक प्राप्त किए हैं।
विज्ञापन
यहां सुधार की जरूरत
इंदौर की तरह अपने निकायों को स्वच्छता में अव्वल बनाने के लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। जिले की सभी निकायों को घरों में गीला व सूखा कचरा अलग-अलग रखने के मामले में सबसे कम अंक मिले हैं। अमूमन एक ही डस्टबिन में लोग कूड़ा रखते हैं और उसे एक साथ बाहर निकाल देते हैं। इससे कूड़े की छंटाई और प्रसंस्करण में दिक्कत आ रही है।
पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण के मानक अलग थे। बावजूद निकायों ने राष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन किया है। स्टेट रैंकिंग में गिरावट के कारणों का अध्ययन कर सुधार किया जाएगा। जन सहयोग के माध्यम से आगे बेहतर प्रदर्शन का प्रयास रहेगा। -सत्यम पांडेय, जिला परियोजना प्रबंधक, स्वच्छ भारत मिशन नगरीय क्षेत्र-सोनभद्र।
नगर में स्थाई ईओ लंबे समय से नहीं है। इससे कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कार्यों की निगरानी, कर्मचारियों पर सही दबाव न बनने के कारण नगर की सफाई से लेकर विकास कार्य प्रभावित हो रहा है। जो भी कमियां हैं, उसे आगे दूर कराया जाएगा। -उस्मान अली, अध्यक्ष, नगर पंचायत चोपन।
छोटी नगर पंचायत होने के कारण बजट काफी कम है। संसाधन भी सीमित हैं। बावजूद बेहतर प्रदर्शन का प्रयास रहता है। लोगों में जागरूकता की कमी है। सर्वेक्षण में बताई गई खामियों पर फोकस कर सुधार का प्रयास किया जाएगा। -कमलेश मोहन, नगर पंचायत अध्यक्ष दुद्धी।