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चेन्नई से घोरावल पहुंचे छह श्रमिक, जांच के बाद भेजे गए घर
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घोरावल। चेन्नई से पांच दिन का सफर कर छह प्रवासी मजदूर शनिवार को घोरावल पहुंचे। सभी मजदूर बगैर किसी सरकारी सहायता के बेहद कष्टदायी सफर तय कर ट्रकों व टैंकरों के जरिए घोरावल पहुंचे। मजदूरों का घोरावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्क्रीनिंग व स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। डॉक्टर ने सभी मजदूरों को 14 दिन तक घर में क्वारंटीन रहकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने का निर्देश देकर छोड़ दिया।
घोरावल कोतवाली क्षेत्र के पडवनिया निवासी रामरक्षा, अरविंद कुमार, हिनौती निवासी ओमप्रकाश, राजकुमार, विनोद कुमार एवं मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिला के बभनदेवा निवासी राजीव प्रसाद शनिवार को दोपहर बाद घोरावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण व स्क्रीनिंग की। मजदूरों ने बताया कि वे चेन्नई में काम करते थे। कोरोना संकट के मद्देनजर लॉक डाउन होने से वे वहीं फंस गए। पिछले ढाई महीने से वे अपने पास बचे रुपयों से किसी तरह अपना खर्च चलाते रहे। लेकिन रुपये खत्म होने के बाद वे भुखमरी के कगार पर आ गए। इसके बाद उन लोगों ने अपने अपने घरों से अपने बैंक खाते में रुपए मंगवाया। ट्रक, टैंकर, लारी इत्यादि के जरिए पांच दिन में वे घोरावल पहुंचे। मजदूरों ने बताया कि वे सरकारी सहायता का इंतजार करते रहे लेकिन उन्हें घर लौटने के लिए कोई सरकारी व्यवस्था नहीं मिली, जिससे वे तमाम कष्ट उठाकर किसी तरह घर पहुंचे। घोरावल सीएचसी के अधीक्षक डॉ. मुन्ना प्रसाद ने बताया कि चेन्नई से आधे दर्जन प्रवासी मजदूरों के स्वास्थ्य की जांच की गई। जांच के बाद सभी को 14 दिनों तक घर में क्वारंटीन रहने का निर्देश देकर छोड़ दिया गया।
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घोरावल कोतवाली क्षेत्र के पडवनिया निवासी रामरक्षा, अरविंद कुमार, हिनौती निवासी ओमप्रकाश, राजकुमार, विनोद कुमार एवं मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिला के बभनदेवा निवासी राजीव प्रसाद शनिवार को दोपहर बाद घोरावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण व स्क्रीनिंग की। मजदूरों ने बताया कि वे चेन्नई में काम करते थे। कोरोना संकट के मद्देनजर लॉक डाउन होने से वे वहीं फंस गए। पिछले ढाई महीने से वे अपने पास बचे रुपयों से किसी तरह अपना खर्च चलाते रहे। लेकिन रुपये खत्म होने के बाद वे भुखमरी के कगार पर आ गए। इसके बाद उन लोगों ने अपने अपने घरों से अपने बैंक खाते में रुपए मंगवाया। ट्रक, टैंकर, लारी इत्यादि के जरिए पांच दिन में वे घोरावल पहुंचे। मजदूरों ने बताया कि वे सरकारी सहायता का इंतजार करते रहे लेकिन उन्हें घर लौटने के लिए कोई सरकारी व्यवस्था नहीं मिली, जिससे वे तमाम कष्ट उठाकर किसी तरह घर पहुंचे। घोरावल सीएचसी के अधीक्षक डॉ. मुन्ना प्रसाद ने बताया कि चेन्नई से आधे दर्जन प्रवासी मजदूरों के स्वास्थ्य की जांच की गई। जांच के बाद सभी को 14 दिनों तक घर में क्वारंटीन रहने का निर्देश देकर छोड़ दिया गया।
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