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डीएम के स्टेनो समेत छह लोग कोर्ट में तलब
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अनुसूचित महिला को मृत दिखाकर उसकी जमीन दूसरे वर्ग के नाम वरासत करने के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट खलीकुज्ज्मा की अदालत ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए अनुसूचित महिला के प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया। इस मामले में डीएम के स्टोनो अमरपाल गिरी, राजस्व निरीक्षक हरिशंकर मिश्रा, लेखपाल विनोद कुमार दुबे, सगे भाइयों हरिशंकर, शिवसरन व तेजबली को समन जारी कर 27 नवंबर को कोर्ट में तलब किया है।
घोरावल कोतवाली क्षेत्र के तेंदुआ लहास गांव की मंगुरी ने 19 अक्तूबर 2021 को अपने अधिवक्ता के जरिए प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इसमें यह तर्क दिया गया था कि आरोपी पिछड़ी जाति के हैं जो अनुसूचित जाति के वारिस नहीं हो सकते। बावजूद विवेचक ने इस तथ्य की विवेचना नहीं की। वादिनी के जीवित होने के बावजूद भी नौ बीघा से अधिक जमीन पर आरोपियों का नाम दर्ज हो गया है जो फर्जी अभिलेख तैयार कर यह अपराध किया है। राजस्व अधिकारी ने आरोपियों के पिता का नाम मंगुरी लिखकर कागजात तैयार किया है। उसने आपराधिक षड्यंत्र किया है। डीएम के स्टोनो अमरपाल गिरी, राजस्व निरीक्षक हरिशंकर मिश्रा, लेखपाल विनोद कुमार दुबे की मिलीभगत से ही पिछड़ी जाति के सगे भाइयों हरिशंकर, शिवसरन व तेजबली का नाम अनुसूचित जाति के वारिस के रूप में दर्ज हुआ है। अंतिम रिपोर्ट घोरावल पुलिस ने 21 जून 2018 को न्यायालय में दाखिल की थी। जिस पर कोर्ट ने दलित महिला मंगुरी को नोटिस जारी किया था। महिला बीते 19 अक्तूबर को न्यायालय में हाजिर हुई और प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने महिला के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने पर गंभीर अपराध मानते हुए पुलिस की अंतिम रिपोर्ट निरस्त कर दी और प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया।
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घोरावल कोतवाली क्षेत्र के तेंदुआ लहास गांव की मंगुरी ने 19 अक्तूबर 2021 को अपने अधिवक्ता के जरिए प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इसमें यह तर्क दिया गया था कि आरोपी पिछड़ी जाति के हैं जो अनुसूचित जाति के वारिस नहीं हो सकते। बावजूद विवेचक ने इस तथ्य की विवेचना नहीं की। वादिनी के जीवित होने के बावजूद भी नौ बीघा से अधिक जमीन पर आरोपियों का नाम दर्ज हो गया है जो फर्जी अभिलेख तैयार कर यह अपराध किया है। राजस्व अधिकारी ने आरोपियों के पिता का नाम मंगुरी लिखकर कागजात तैयार किया है। उसने आपराधिक षड्यंत्र किया है। डीएम के स्टोनो अमरपाल गिरी, राजस्व निरीक्षक हरिशंकर मिश्रा, लेखपाल विनोद कुमार दुबे की मिलीभगत से ही पिछड़ी जाति के सगे भाइयों हरिशंकर, शिवसरन व तेजबली का नाम अनुसूचित जाति के वारिस के रूप में दर्ज हुआ है। अंतिम रिपोर्ट घोरावल पुलिस ने 21 जून 2018 को न्यायालय में दाखिल की थी। जिस पर कोर्ट ने दलित महिला मंगुरी को नोटिस जारी किया था। महिला बीते 19 अक्तूबर को न्यायालय में हाजिर हुई और प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने महिला के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने पर गंभीर अपराध मानते हुए पुलिस की अंतिम रिपोर्ट निरस्त कर दी और प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया।
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