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शिकायत स्ट्रीट लाइट लगवाने की, साफ करवा दी गई नाली

Mon, 26 Sep 2022 10:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 26 Sep 2022 10:27 PM IST
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shikaayat street lait lagavaane kee, saaph karava dee gaee naalee
सोनभद्र। सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचने के लिए शासन ने शिकायतों के निस्तारण की ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की। इससे लोगों को सहूलियत जरूर मिली, लेकिन शिकायतों के निस्तारण को लेकर जिम्मेदारों का रवैया न सुधरने से समस्याएं जस की तस हैं। कई मामलों में बिना मौके पर गए ही अफसर-कर्मचारी झूठी रिपोर्ट लगाकर शिकायत का निस्तारण कर दे रहे हैं। नतीजा शिकायत और समाधान में कोई तालमेल ही नहीं हो रहा। अधीनस्थों की लापरवाही कई बार अफसरों के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर रही है। जिले में ऐसे कई मामले हैं। किसी ने स्ट्रीट लाइट की शिकायत की तो सफाई कराने की रिपोर्ट लगाई गई है तो कहीं शौचालय बनवाने के मामले में सड़क का सर्वे करा दिया गया। इसके मद्देनजर ही डीएम ने अब ग्राम स्तर पर समाधान दिवस की व्यवस्था शुरू की है। फिलहाल पोर्टल पर सबसे ज्यादा शिकायतें राजस्व से जुड़ी हैं। इसके पीछे भूमि विवादों को अहम बताया जा रहा है। इसके बाद पंचायती राज, विकास, पुलिस, आपूर्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली विभाग से जुड़े मामले हैं।
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करमा ब्लाक के सहदैइयां बैदाड़ निवासी अविनाश चंद्र शुक्ल ने गांव में कई बार हुई भैंस चोरी की घटनाओं के बाद खंभों पर स्ट्रीट लाइट लगवाने की मांग करते हुए आईजीआरएस में प्रार्थना पत्र लिया। पहले तो करमा ब्लॉक की शिकायत को घोरावल भेज दिया गया। वहां निस्तारण नहीं हुआ। दूसरी बार शिकायत पर मामले को सदर ब्लॉक भेज दिया गया। तीसरी बार शिकायत पर यह रिपोर्ट लगाते हुए शिकायत को निस्तारित किया गया कि गांव में सफाई कर्मी को भेजकर नाली साफ करा दी गई है। अब दोबारा मौके पर जाने की स्थिति नहीं है। इस रिपोर्ट को पढ़कर अविनाश माथा पीट रहे हैं।
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कोन ब्लॉक के ग्राम पंचायत रोरवा गांव निवासी राजेश भाटिया ने प्रार्थनापत्र दिया कि गांव में पंचायत भवन होने के बाद भी दो किमी दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय पुरानताली से ग्राम सचिवालय का संचालन होता है। यह भी कहा कि रोजगार सेवक गांव के पंचायत भवन में बैठते हैं, जबकि पंचायत सहायक व प्रधान दो किमी दूर स्कूल से सारे कार्य कराते हैं। गांव में आकर लोगों व शिकायकर्ता से बातचीत के बिना ही ग्राम विकास अधिकारी ने शिकायत गलत होने की रिपोर्ट लगा दी।
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चतरा ब्लॉक के चितविसरांव गांव निवासी आशीष विश्वकर्मा ने बताया कि गांव में आंगनबाड़ी की ओर से गर्भवतियों व बच्चों को मिलने वाले पुष्टाहार का वितरण चार महीने से नहीं हो रहा है। इसकी शिकायत ऑनलाइन की गई। ग्रामीण डीएम कार्यालय भी पहुंचे। बाल पुष्टाहार विभाग की ओर से एक टीम भी गांव में जांच के लिए पहुंची। आरोप है कि गांव के लोगों व शिकायतकर्ता से बात नहीं की। बाद में शिकायत गलत होने की रिपोर्ट लगा दी गई। शिकायकर्ता जांच से संतुष्ट नहीं हैं।
आईजीआरएस पोर्टल पर आने वाली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए शासन स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा की जाती है। इसके आधार पर रैंकिंग निर्धारित होती है। निस्तारण की बेहद सुस्त गति के चलते जून की रैंकिंग में सोनभद्र प्रदेश में 69वें स्थान पर था। डीएम ने अफसरों पर सख्ती दिखाई तो जुलाई में रैंकिंग घटकर 36 तक आई। अगस्त की रैंकिंग में सोनभद्र 32वें स्थान पर है। अगस्त में कुल 2499 शिकायतें (पुलिस को छोड़कर) प्राप्त हुई थीं, जिसमें 88.84 प्रतिशत का निस्तारण किया गया। हालांकि शिकायतों के निस्तारण में कर्मचारियों ने मनमानी भी खूब की है।

सीडीओ सौरभ गंगवार ने कहा आईजीआरएस की शिकायतों का समय सीमा के अंदर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण का निर्देश है। इसकी नियमित समीक्षा भी होती है। कई बार शिकायतों में ऐसा होता है कि तात्कालिक रूप से जो संभव कार्रवाई होती है, उसे कराया जाता है। नए कार्य के लिए कार्ययोजना तैयार कराई जाती है। शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। -
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