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आशाओं का सीएमओ कार्यालय पर धरना
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र
Updated Tue, 18 Aug 2015 12:34 AM IST
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उत्तर प्रदेश सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा संघ का विभिन्न मांगों को लेकर बेमियादी धरना सोमवार से मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय पर शुरू हो गया।
आशा कार्यकर्ताओं ने चेताया कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं की जाती है तो धरना बेमियादी अनशन में तब्दील किया जाएगा। पहले दिन धरने पर सभा की गई और स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग की गई।
सभा में संघ की जिलाध्यक्ष सूर्यवती पांडेय ने कहा कि आशाएं दस वर्षों से भूखे पेट कार्य कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ समझी जाने वाली आशाएं प्रतिपूर्ति की धनराशि वर्षों से न मिलने के कारण भुखमरी के कगार पर पहुंच चुकी हैं।
वर्ष 2006 से 2011 तक आशाओं का काफी मानदेय बकाया है। सूर्यवती ने आरोप लगाया कि वर्ष 2010 में आशाओं को पूरा भुगतान दिलाने के लिए प्रदर्शन करने पर उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
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उन्होंने उनकी बर्खास्तगी की नई सिरे से जांच कराने की मांग के साथ ही आशाओं के मानदेय प्रतिपूर्ति की मांग उठाई। जानकी देवी ने कहा कि आशाओं को संविदा श्रमिक की भांति रखा गया है जबकि स्वास्थ्य से जुड़े प्राथमिक स्तर का सभी कार्य आशाएं करती हैं।
कहा कि आशाओं को श्रम कानून के दायरे में लाया जाए। उन्हें पीएफ योजना, इंश्योरेंस, पेंशन, मेडिकल डायरी, नि:शुल्क चिकित्सा की व्यवस्था लागू की जाए। कमलावती देवी, सुशीला देवी, लाल मुनी देवी मौजूद थीं।
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आशा कार्यकर्ताओं ने चेताया कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं की जाती है तो धरना बेमियादी अनशन में तब्दील किया जाएगा। पहले दिन धरने पर सभा की गई और स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग की गई।
सभा में संघ की जिलाध्यक्ष सूर्यवती पांडेय ने कहा कि आशाएं दस वर्षों से भूखे पेट कार्य कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ समझी जाने वाली आशाएं प्रतिपूर्ति की धनराशि वर्षों से न मिलने के कारण भुखमरी के कगार पर पहुंच चुकी हैं।
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वर्ष 2006 से 2011 तक आशाओं का काफी मानदेय बकाया है। सूर्यवती ने आरोप लगाया कि वर्ष 2010 में आशाओं को पूरा भुगतान दिलाने के लिए प्रदर्शन करने पर उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
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उन्होंने उनकी बर्खास्तगी की नई सिरे से जांच कराने की मांग के साथ ही आशाओं के मानदेय प्रतिपूर्ति की मांग उठाई। जानकी देवी ने कहा कि आशाओं को संविदा श्रमिक की भांति रखा गया है जबकि स्वास्थ्य से जुड़े प्राथमिक स्तर का सभी कार्य आशाएं करती हैं।
कहा कि आशाओं को श्रम कानून के दायरे में लाया जाए। उन्हें पीएफ योजना, इंश्योरेंस, पेंशन, मेडिकल डायरी, नि:शुल्क चिकित्सा की व्यवस्था लागू की जाए। कमलावती देवी, सुशीला देवी, लाल मुनी देवी मौजूद थीं।