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Sonebhadra News: हर महीने आने वाले 12 से 15 कुष्ठ रोगियों में 95 प्रतिशत ग्रामीण

Mon, 03 Mar 2025 11:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 03 Mar 2025 11:15 PM IST
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Of the 12 to 15 leprosy patients who come every month, 95 percent are rural.
जिले के नगरीय क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा कुष्ठ मरीज मिल रहे हैं। अस्पतालों में हर महीने आने वाले 12 से 15 मरीजों में से 95 प्रतिशत मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ग्रामीण कुष्ठ रोग को लेकर गंभीर नहीं हैं।
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इस वजह से बीमारी में इजाफा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अभी जिले में 136 कुष्ठ रोगियों का इलाज चल रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक कुल 157 कुष्ठ रोगी मिले। वहीं अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक इनकी संख्या 155 रही।
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अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 तक कुल 161 कुष्ठ रोगी मिले है। यह संख्या इस सत्र में अभी बढ़ने का अंदेशा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जागरूकता अभियान चलाया जाता है।
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इसका उद्देश्य लोगों को कुष्ठ रोग के बारे में जागरूक करते हुए समय पर इलाज के लिए प्रेरित करना है। चिकित्सकों की माने तो कुष्ठ एक संक्रामक बीमारी है। इसकी वजह से त्वचा, श्वसन तंत्र, आंखें और तंत्रिकाएं काफी प्रभावित होती हैं।
यह रोग विशेष रूप से त्वचा, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बाहर की नसों को प्रभावित करता है। इसके मुख्य लक्षणों के रूप में त्वचा में घाव, गांठ आदि दिखाई दे सकते हैं। हालांकि इसके बाद भी गांवों में जागरूकता का अभाव है। नगरीय क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा कुष्ठ मरीज मिल रहे हैं।
वर्ष 2022-23 में मिले कुल मरीजों में 147 ग्रामीण व 10 नगरीय क्षेत्र के रहे। 202-23 में संख्या क्रमश: 146 व 9 थी। चालू वर्ष में कुल 153 ग्रामीण व 8 नगरीय कुष्ठ रोगी पीड़ित मिले हैं। वर्तमान में 136 कुष्ठ रोगियों का जिले में इलाज चल रहा है। इसमें 129 ग्रामीण व 7 नगरीय क्षेत्र के हैं। इन आंकड़ों में भी ओबरा, रेणुकूट और पिपरी नगर शामिल नहीं है।



ऐसे पहचानें लक्षण

जिला कुष्ठ रोग नियंत्रण अभियान के नोडल डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि चमड़ी पर लाल चकत्ते, दाग, जिनमें खुजली, चुभन या जलन न हो बल्कि सुन्न हो और गर्म-ठंडे का अहसास न हो। ये धब्बे या निशान शरीर के किसी भी भाग में हो सकते हैं। हाथ-पैरों में नमी का अनुभव, कोहनी के नीचे, कान के पीछे या घुटने के नीचे नस का सूजना कुष्ठ रोग का प्रमुख लक्षण है। चिह्नित मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से निशुल्क दवा उपलब्ध कराई जाती है। इलाज के बाद मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है। बीमारी के आधार पर 6 से 12 महीने का इलाज चलता है। कहा कि कुष्ठ रोग जीवाणु से होता है, जिसका पूर्ण इलाज संभव है। इसकी पहचान बहुत ही आसान है।




छुआछूत से नहीं फैलता है कुष्ठ रोग

गांव में जागरूकता की कमी के कारण लोग इसे छुआछूत की बीमारी भी मानते हैं, जबकि यह छुआछूत से नहीं होता। सभी अस्पतालों में कुष्ठ रोगियों के लिए मुफ्त इलाज की व्यवस्था है। इलाज न करवाने पर उससे अन्य लोगों में संक्रमण हो सकता है। कुष्ठ रोग के मरीजों की सभी जांचें निशुल्क हो रही हैं। गांव के लोग दाग,धब्बों को गंभीरता से नहीं लेते हैं, जो बाद में कुष्ठ का रूप ले लेते हैं। बीमारी के कारण शरीर के अंग गलने लगते हैं। इसके साथ ही चेहरे में भी बदलाव आ जाता है।
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