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Sonebhadra News: अब बायोमेट्रिक प्रक्रिया से मिलेगी छात्रवृत्ति, रुकेगा फर्जीवाड़ा

Sun, 27 Oct 2024 11:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 27 Oct 2024 11:39 PM IST
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Now scholarship will be given through biometric process, fraud will stop
सोनभद्र। फर्जीवाड़ा कर छात्रवृत्ति लेना अब मुश्किल होगा। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए शासन स्तर से बायोमेट्रिक प्रक्रिया शुरू की गई है। नई व्यवस्था के तहत अब छात्रों को स्कूल में आकर अंगूठे का निशान देना होगा, इसके बाद ही नियमानुसार उन्हें छात्रवृत्ति मिलेगी। समाज कल्याण विभाग में बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठे का निशान लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए स्कूल, कॉलेज के लोग पहुंच रहे हैं।
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जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर यादव ने बताया कि शासन की तरफ से 9वीं कक्षा से लेकर ग्रेजुएशन तक के छात्रों को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति दी जाती है। पहले स्कूल-कॉलेज में छात्र एडमिशन लेने के बाद छात्रवृत्ति लेने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करते थे। इसके बाद स्कूल-कॉलेज से ऑनलाइन जांच के लिए लखनऊ जाती थी। इसके बाद समाज कल्याण विभाग के पास आती थी। इसके बाद कार्यालय से भुगतान दे दिया जाता था। इस प्रक्रिया में प्रदेश के कई जनपदों में गड़बड़ी पाई गई थी। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए शासन की तरफ से बायोमेट्रिक मशीन का सहारा लिया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अब छात्रवृत्ति लेने के लिए पहले स्कूल-कॉलेज के प्रधानाचार्य, प्राचार्य को छात्रवृत्ति नोडल अधिकारी को छात्रवृत्ति के पोर्टल पर अंगूठे के निशान देने होंगे। यही वेब पोर्टल स्कूल-कॉलेज में प्राचार्य और नोडल अधिकारी के अंगूठे के निशान से खुलेगा। इसके बाद वे अपने स्कूल-कॉलेज के सभी छात्रों के अंगूठे के निशान लेंगे। जांच के बाद डाटा लखनऊ जाएगा। इसके बाद जिला समाज कल्याण अधिकारी को छात्रवृत्ति देने के आदेश दिए जाएंगे। अंगूठे के निशान का एडमिशन रजिस्टर से मिलान किया जाएगा। इससे फर्जीवाड़ा नहीं हो सकेगा।
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ये होंगे छात्रवृत्ति के पात्र
जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि अनुसूचित जाति के छात्रों के परिवार के मुखिया की आय ढाई लाख सालाना से अधिक नहीं होनी चाहिए। सामान्य छात्रों के परिवार के मुखिया की आय दो लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए, तभी छात्रवृत्ति का लाभ मिल सकेगा। बायोमेट्रिक मशीन पर निशान देने के लिए स्कूल एवं कॉलेज के स्टाफ समाज कल्याण विभाग पहुंचने लगे हैं।
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